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ऐसे तीन इरादे रखने वाले होते हैं 'दिमागी नक्सली', रिजिजू ने बताया किनके बारे में बोले थे PM मोदी

बीजेपी सांसद किरेन रिजिजू ने रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी की 'माओवादी मानसिकता' वाले बयान से जोड़ते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट किया है. इस पोस्ट में उन्होंने विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर जवाब देने की कोशिश की है.

ऐसे तीन इरादे रखने वाले होते हैं 'दिमागी नक्सली', रिजिजू ने बताया किनके बारे में बोले थे PM मोदी
पीएम मोदी पर कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों का किरेन रिजिजू ने जवाब दिया है. (Photo: IANS)
नई दिल्ली:

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी की 'माओवादी मानसिकता' वाले बयान की आलोचना करने पर विपक्षी दलों पर निशाना साधा है. उन्होंने दावा किया है कि प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को नक्सली मानसिकता वाले लोग नहीं कहा था. किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पोस्ट में तीन तरह के लोगों का जिक्र किया है. रिजिजू के मुताबिक, 'दिमागी नक्सली' का मतलब सिर्फ उन लोगों से है, जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को नहीं मानते. जो अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं और अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं. और जो उत्तर-पूर्व को भारत से अलग करने के लिए 'चिकन्स नेक' कॉरिडोर को काटने की वकालत करते हैं.

रिजिजू का यह बयान तब आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए हजारों शहीद सुरक्षाकर्मियों के बलिदान को याद किया और देश से नक्सलवाद को सफलतापूर्वक खत्म करने के लिए तारीफ की.

लाल किले से पीएम मोदी ने क्या कहा?

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भले ही जंगल में हथियार उठाने वाले नक्सली खत्म कर दिए गए हों, लेकिन 'दिमागी नक्सली' भी हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं. उन्हें 'पहचानकर अलग-थलग' करने की जरूरत है, जिससे देश के युवाओं को एक विकसित भारत के लिए एकजुट किया जा सके.

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नरेंद्र मोदी ने लाल किले से बयान देते हुए कहा, "कई साल तक सार्वजनिक जीवन में माओवादी सोच वाले लोग मौजूद रहे. सरकारी कमेटियों में भी इस सोच ने कई संस्थानों और पहलों को प्रभावित किया. मेरे प्यारे देशवासियों, हम 'हथियारबंद नक्सल' पर लगाम लगाने और देश को उनसे मुक्त करने में सफल रहे हैं. भले ही ये नक्सली चले गए हों, लेकिन 'दिमागी नक्सल' यानी नक्सली सोच वाले लोग मौके की तलाश में हैं, हिंसा के रास्ते खोज रहे हैं और देश को गलत रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं."

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि हमें इन 'दिमागी नक्सलियों' की पहचान करनी होगी, उन्हें अलग-थलग करना होगा और एक विकसित देश के लिए युवाओं को एकजुट करना होगा.

लाल किले से दिए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की प्रधानमंत्री की स्पीच के बाद, कांग्रेस ने इसकी कड़ी आलोचना की और उनके बयान को खोखली सियासी बयानबाजी करार दिया.

पीएम मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सीनियर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, "इस शब्द का कोई वास्तविक आधार नहीं है." उन्होंने इसकी तुलना 'अर्बन नक्सल' शब्द को लेकर हुई पिछली बहसों से की.

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