- संसद में विपक्ष रोजाना बैठक कर सरकार के खिलाफ रणनीति बनाता है और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करता है
- विपक्ष का मुख्य आरोप है कि जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हिंसा को लेकर गृहमंत्री जवाब दें और बयान दें
- समाजवादी पार्टी राम मंदिर चंदा चोरी के मुद्दे को जोरशोर से उठा रही है और सांसदों से चंदा इकट्ठा कर रही है
संसद में विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है. रोज सुबह इंडिया गठबंधन की बैठक होती है, जहां विपक्ष के सभी बड़े नेता शामिल होते हैं. ये बैठक राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कमरे में होती है, जिसमें राहुल गांधी,प्रियंका गांधी,अखिलेश यादव और बाकी विपक्ष के नेता भी शामिल होते है. हां आजकल इसमें डीएमके नहीं होती.मगर तमिलनाडु की बाकी पार्टियां जरूर रहती हैं. यहां यह तय होता है कि किस मुद्दे पर संसद के बाहर मकर द्वार पर धरना करना है.
इन मुद्दों पर विपक्ष सरकार पर हमलावर
विपक्ष के पास अभी दो ही मुद्दे हैं एक ये कि 20 जुलाई को जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर जो पेलेट गन, कील लगी लाठियां जैसी चीजें चलाई गई वो किसके कहने पर चलाई गई. क्या गृहमंत्री को इसकी जानकारी थी और वो सदन में आकर इस पर बयान दें. विपक्ष का दूसरा मुद्दा है अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी, जिसे समाजवादी पार्टी पूरे जोरशोर से रोज उठाती है. समाजवादी पार्टी के सांसद रोज एक दान पेटी ले कर आते हैं उसमें सभी सांसद पैसे डालते हैं और बाद में एक गमछा बिछा कर दानपेटी में मिले चंदे को सबके सामने गिना जाता है. बाद में उस चंदे की रकम को अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद को दिया जाता है कि वो उसे अयोध्या के राम मंदिर के चंदे के बक्से में डाल दें. जैसे सोमवार को सांसदों के चंदे में 47 हजार इकट्ठा हुआ था.
विपक्ष कर रहा चंदा चोरी पर बहस की मांग
विपक्ष गृहमंत्री के बयान और चंदा चोरी पर बहस से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है और सरकार इन दोनों मुद्दों पर राजी नहीं हो रही है, इसलिए संसद में गतिरोध बना हुआ है. सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ने बीएसी यानि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक बुलाई, उसमें भी सरकार और विपक्ष के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई. विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा हुआ है और सरकार ने कहा कि वह अपने तीन विधेयक इस हफ्ते लाना चाहती है. मगर उसनें एफसीआरए बिल जो विदेशी चंदे से चलने वाले धार्मिक संगठनों के बारे में है का कोई जिक्र नहीं किया गया. इस बिल का विरोध दक्षिण की कई पार्टियां कर रही हैं. इसलिए सरकार ने अभी यह नहीं बताया है कि यह बिल कब आएगा.
विवादित मुद्दों को सत्र के अंतिम हफ्ते में लाने की कोशिश
हालांकि सरकार जब भी चाहे कोई भी बिल कभी भी एजेंडे में डाल सकती है. मगर अभी जो स्थिति संसद में सरकार और विपक्ष के बीच बनी है, सरकार भी फिलहाल टकराव टालना चाहती. इसलिए वह विवाद के मुद्दों से फिलहाल बच रही है. यह भी कहा जा रहा है कि जितने भी विवादित मुद्दे हैं सरकार उसे मानसून सत्र के अंतिम हफ्ते में लाने की कोशिश करेगी. इसमें बहुचर्चित परिसीमन बिल भी शामिल है, जिसके लिए सरकार को डीएमके का भी समर्थन चाहिए होगा. कोशिशें चल रही हैं और अगर डीएमके का समर्थन पक्का हो जाता है तभी सरकार ये बिल लाएगी. क्योंकि इस बिल के लिए डीएमके को सरकार के पक्ष में वोट करना होगा. संसद के गलियारों में यह भी चर्चा है कि सरकार 15 अगस्त के बाद तीन दिनों का एक स्पेशल सत्र बुलाए और उसमें परिसीमन बिल पास कराने की कोशिश करेगी.
ये भी पढ़ें-'भारत अब दो घोड़ों की सवारी कर रहा है', कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने क्यों कहा ऐसा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं