Ahmedabad Plane Crash: अहमदाबाद विमान हादसे का आज एक साल पूरा हो गया. इस बीते एक साल में समय के साथ बहुत कुछ बदल चुका है लेकिन पीड़ितों के जज्बात और उनकी तकलीफें अब भी वही ठहरी है. आज ही के दिन 12 जून को ठीक एक साल पहले अहमदाबाद का आसमान एक ऐसे भयावह मंजर का गवाह बना, जिसने भारतीय विमानन इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया. एक झटके में सैकड़ों जिंदगियां खाक हो गई. उन जिंदगियों के साथ हजारों सपने भी चकनाचूर हो गया. आज क्रैश साइट से मलबा हट चुका है, सायरनों की आवाजें थम चुकी हैं. लेकिन इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के लिए समय जैसे थम गया हो. उनके लिए दुनिया आज भी उसी दोपहर के धुएं और अफरा-तफरी में जमी हुई है. एक ऐसा आघात जो सार्वजनिक सदमे से निकलकर निजी, दर्दनाक रोजमर्रा में बदल चुका है.
UK में सेटल बेटे से मिलने का सपना लिए खेड़ा के बुर्जुग दंपत्ति की हुई मौत
आज जब अहमदाबाद विमान हादसे का एक साल पूरा हो रहा है तो हम एक ऐसे परिवार की कहानी सामने लाते हैं, जो इस हादसे से पूरी तरह बिखर गया. वे हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरकर उस बेटे के पास जा रहे थे, जिसने यूनाइटेड किंगडम में उनके लिए एक सपनों की जिंदगी बनाई थी. लेकिन खेड़ा के रहने वाले बुजुर्ग दंपति राजनीकांत और पुष्पाबेन दर्जी अहमदाबाद की जमीन पर ही अपनी आखिरी सांसें ले बैठे.

क्रैश साइट पर पहुंचे रजनीकांत के परिजनों ने नम आंखों से दी श्रद्धांजलि
इस विनाशकारी हादसे की पहली बरसी पर रजनीकांत के परिजन उस शांत परिसर में आकर रोते हुए खड़े हैं, जहां उनकी दुनिया टूट गई थी. यह वही दंपत्ति था, जिसने अपनी जिंदगी में कभी अहमदाबाद से बाहर कदम नहीं रखा था. उनकी पहली यात्रा बेटे के प्यार और सम्मान का जश्न बनने वाली थी, लेकिन वह एक भयानक अंत में बदल गई.
जिस मेडिकल परिसर पर गिरा विमान, उसी से रजनीकांत के बेटे ने की थी पढ़ाई
रजनीकांत भाई और पुष्पाबेन ने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए पूरी जिंदगी कड़ी मेहनत और संघर्ष में बिताई. एक विडंबना यह भी रही कि उनका बेटा उसी मेडिकल परिसर से डॉक्टर बना, जहां यह हादसा हुआ. डॉक्टर बनने के बाद वह UK चला गया, जहां उसने अपने करियर में बड़ी सफलता हासिल की.
पहली हवाई यात्रा ही साबित हो गई अंतिम
अच्छी कमाई के बाद उसने तय किया कि अब वक्त आ गया है कि वह अपने माता-पिता को उनके संघर्षों का फल दे और उन्हें अपने साथ यूके बुलाकर आरामदायक जीवन दे. उसने हर व्यवस्था खुद की, फ्लाइट टिकट से लेकर कैब तक सब कुछ. लेकिन दुखद रूप से उनके जीवन की पहली हवाई यात्रा ही उनकी आखिरी यात्रा बन गई.

क्रैश साइड पर परिजनों को श्रद्धांजलि देते रजनीकांत के परिजन.
Photo Credit: NDTV
जहां विमान गिरा वहीं खड़े फूट-फूटकर रो पड़े परिजन
आज इस त्रासदी की पहली बरसी पर शोक संतप्त परिवार एक बार फिर हादसे की जगह पहुंचा और मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. जिस जमीन पर विमान गिरा था, वहीं खड़े होकर परिजन फूट-फूटकर रो पड़े और NDTV से अपनी गहरी पीड़ा साझा की. राजनीकांत भाई के भाई प्रमोद भाई ने बातचीत में परिवार के दर्द को शब्दों में बयान किया.
रजनीकांत के भाई प्रमोद ने बताया- कैसे पहली यात्रा ही हो गई अंतिम
भावुक बातचीत में प्रमोदभाई ने कहा, “बहुत मेहनत और संघर्ष करके मेरे भाई और भाभी ने अपने बेटे को पाला. उन्होंने अपनी ज़िंदगी में बहुत तकलीफें देखी हैं, बहुत संघर्ष किया है. तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपने बेटे को डॉक्टर बनाया. आज उनका बेटा इतना कामयाब है, यूके में सेटल है, और सबसे पहला काम उसने यह करना चाहा कि अपने माता-पिता को अपने साथ यूके बुलाए.
प्रमोद भाई ने आगे बताया कि मेरे भाई और भाभी कभी अहमदाबाद से बाहर नहीं गए थे. उन्होंने कभी हवाई जहाज में सफर नहीं किया था, यह उनका पहला सफर था और वे विदेश जा रहे थे. उन्हें क्या पता था कि उनका पहला सफर ही आखिरी सफर बन जाएगा. हमारा पूरा परिवार बिखर गया है, हम सब पूरी तरह टूट चुके हैं. हम आज यहां प्रार्थना करने आए हैं.
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