- केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण एक संवैधानिक अधिकार है, जिसे कोई भी ताकत खत्म नहीं कर सकती
- उन्होंने दलितों के खिलाफ भेदभाव को आज भी मौजूद बताया और इसे खत्म करने का संकल्प जताया
- चिराग पासवान ने मल्लिकार्जुन खरगे के साथ हुए भेदभाव का उदाहरण देते हुए वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को कहा कि आरक्षण एक संवैधानिक अधिकार है, जिसे कोई भी ताकत खत्म नहीं कर सकती. जंतर-मंतर पर 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि दलितों के साथ भेदभाव अभी भी जारी है और जब तक वह सरकार में हैं, तब तक इस व्यवस्था को कमजोर नहीं होने देंगे.
आरक्षण क्यों जरूरी?
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान कहते हैं, "ये लोग हर चीज में राजनीति देखते हैं... और क्या आरक्षण कोई ऐसी चीज है, जिसे सिर्फ इसलिए खत्म किया जा सकता है क्योंकि कोई ऐसा कहता है? यह एक संवैधानिक अधिकार है. आरक्षण किसी को दी जाने वाली खैरात नहीं है. यह एक संवैधानिक अधिकार है और दुनिया की कोई भी ताकत आरक्षण को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकती. जो लोग इसे खत्म करने के बारे में सोचते हैं - कभी समीक्षा के जरिए तो कभी सुधारों के जरिए - वे शायद यह नहीं समझते कि आरक्षण क्यों जरूरी है. जब आप अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की बात करते हैं, तो यह पूछना बहुत आसान है कि इन लोगों को आरक्षण क्यों दिया जाना चाहिए. लेकिन आज भी ऐसी घटनाएं होती हैं."
मल्लिकार्जुन खरगे का दिया उदाहरण
चिराग पासवान ने आगे कहा, "उस मंच पर खरगे जी के साथ जो हुआ, उसे देखिए. उनके जाने के बाद मंच को शुद्ध किया गया था, है ना? आज भी, दलित युवाओं को घोड़े पर चढ़ने से रोका जाता है; दलित लड़कों को शादी की बारात निकालने से रोका जाता है. जब बड़े नेता मंदिर जाते हैं, तो कभी-कभी परिसर को गंगाजल से धोया जाता है. तो, यह भेदभाव आज भी कायम है, है ना? और ये वही अनुसूचित जातियां हैं जो छुआछूत की शिकार रही हैं. भेदभाव आज भी मौजूद है... मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि जब तक मैं यहां हूं और जब तक राम विलास पासवान का बेटा चिराग पासवान सरकार का हिस्सा है, मैं इस व्यवस्था को कभी कमजोर नहीं होने दूंगा."
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कौन कर रहा आरक्षण हटाने की मांग
यह बयान तब आया जब शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' (RHA) के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग जाति-आधारित आरक्षण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने और इस व्यवस्था में पूरी तरह बदलाव की मांग करने के लिए इकट्ठा हुए. उन्होंने मांग की कि शिक्षा और रोजगार में कोटा सामाजिक या जातिगत पहचान के बजाय आय के स्तर के आधार पर तय किया जाना चाहिए. इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने "एक परिवार, एक आरक्षण" नीति की वकालत की और UGC के 2026 के जाति-समानता निर्देशों को तुरंत वापस लेने की मांग की.
जाति-आधारित आरक्षण के विरोध में शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शन स्थल पर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय बलों को तैनात किया गया. 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' (RHA) एक आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज है, जिसके 5.6 मिलियन फ़ॉलोअर्स हैं. इस प्लेटफॉर्म ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध-प्रदर्शन और लोगों को एकजुट करने के तरीकों को अपनाकर तेज़ी से लोकप्रियता हासिल की है और अब आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है.
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