- सुधांशु त्रिवेदी ने दिमागी नक्सली वाले मुद्दे पर पी. चिदंबरम और कांग्रेस पर पलटवार किया है.
- पीएम मोदी ने किसी का नाम नहीं लिया. 24 घंटे में खुद ही सामने आ गए दिमागी नक्सली.
- बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने खुद को दिमागी नक्सली बताया था.
पी. चिदंबरम ने खुद को 'दिमागी नक्सली' बताया था. जिस पर बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस मुद्दे पर पी. चिदंबरम पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा पीएम मोदी ने किसी का नाम नहीं लिया था. '24 घंटे में दिमागी नक्सली सामने आए हैं. जिनके दिमाग में नक्सल है, वह सामने आ गए हैं. नक्सलवाद देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए खतरा है.' इस मुद्दे पर देश में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच सियासत देखी जा रही है. इससे पहले रविवार को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस मुद्दे पर पोस्ट किया था.
सुधांशु त्रिवेदी ने उठाया 'दिमागी नक्सली' का मुद्दा
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा 'देश अपने स्वतंत्रता के 80वें साल में प्रवेश कर चुका है, विगत स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बहुत महत्त्वपूर्ण और आज के परिप्रेक्ष्य में अत्यंत उपयुक्त विषय, दिमागी नक्सल के विषय को उठाया था. परंतु हम लोग इस विषय को लेकर आश्चर्य में हैं कि मात्र 24 घंटे के अंदर किसके दिमाग में नक्सली दिमाग था वो खुद ब खुद निकल कर सामने आ गया. पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता पी चिदंबरम साहब ने खुद आकर कहा कि उन्हें दिमागी नक्सली होने पर गर्व है. यानी देखिए कितने आश्चर्य की बात है कि प्रधानमंत्री ने कहा और इतनी त्वरित प्रतिक्रिया हुई कि पूरे देश के सामने आ गया कि किसके दिमाग में नक्सल बैठा हुआ है और वह स्वयं गर्व की अनुभूति करने लगे.
🔴#BREAKING | 'सड़क से समाधान निकालने वाले दिमागी नक्सल',- BJP#BJP | #Congress | @vikasbha pic.twitter.com/nWuW3DWWjP
— NDTV India (@ndtvindia) August 17, 2026
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'पूर्व पीएम ने नक्सलवाद को सबसे बड़ी समस्या बताया था'
बीजेपी सांसद ने कहा 'मैं कांग्रेस पार्टी और पी चिदंबरम साहब को याद दिलाना चाहता हूं कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने 13 अप्रैल 2006 को कहा था 'यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि नक्सलवाद की समस्या हमारे देश के सामने अब तक की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती है. अर्थात उन्होंने कहा कि इसको कहने में अतिशयोक्ति नहीं होगी कि नक्सलवाद का खतरा भारत के इतिहास में आज तक आंतरिक सुरक्षा के लिए उत्पन्न सबसे बड़ा खतरा है.' डॉक्टर मनमोहन सिंह इस बात को समझे थे, लेकिन जिस विवशता के चंगुल में जकड़ कर और नक्सली दिमाग वालों से भरी हुई उनकी सुपर कैबिनेट यानी NEC के की तरफ से उनको कुछ करने नहीं दिया गया था. लेकिन नक्सलवाद के खात्मे को सिद्ध करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने दिखाया है.
पी.चिदंबरम से पूछा सवाल
सुधांशु त्रिवेदी ने पी.चिदंबरम से सवाल पूछते हुए कहा 'देश का एक ऐसा पूर्व गृह मंत्री है जिसे नक्सलवाद खत्म होने पर गर्व का अनुभव नहीं हो रहा है, उसे इस बात में गर्व का अनुभव हो रहा है कि वह दिमागी नक्सली हैं. तो मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि डॉक्टर मनमोहन सिंह सही है या आज के आपके स्वघोषित दिमागी नक्सली चिदंबरम साहब. यह पी चिदंबरम साहब वह हैं इनके लिए क्या कहा जाए. जिस यूपीए के शासन साल में पशुपति से लेके तिरुपति तक रेड कॉरिडोर बना था, 180 से अधिक जिले नक्सलवाद से प्रभावित हो गए थे. दंतेवाड़ा में 2010 में सीआरपीएफ के इतने बड़ी संख्या में 75-76 जवान शहीद हुए और उसके बाद राजधानी के एक नामी गिरामी विश्वविद्यालय में खुशियां मनाई गईं थी. ये होता है दिमागी नक्सली.'
इतना ही नहीं चिदंबरम साहब के शासनकाल में 5000 से अधिक निर्दोष नागरिकों की मौत हुई, 1913 सुरक्षा बलों के जवान नक्सली अभियानों में शहीद हुए. 180 जिले नक्सल प्रभावित हो गए. 92 से प्रतिशत से अधिक हथियार जो नक्सलियों के पास थे वो पुलिस के द्वारा पुलिस के हथियार थे जो लूटे गए थे. 2009 में उस समय नक्सली नेता किशनजी ने कहा था कि हमारा 2030 तक दिल्ली पर हमारा कब्जा होगा. लेकिन आज सभी 180 नक्सल प्रभावित जिले शून्य पर आ गए हैं. लेकिन वहां सामंजस्य दिखता था. लेकिन यहां समस्या दिख रही है.
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