हाथ पर बने एक छोटे से टैटू ने वह कर दिखाया, जो तीन दशक से ज्यादा समय में नहीं हो पाया था. ओडिशा की एक महिला, जो करीब 35 साल पहले परिवार से बिछड़ गई थी, आखिरकार अपने गांव और अपनों तक लौट आई. उसकी पहचान का सबसे बड़ा सुराग बना हाथ पर ओड़िया भाषा में गुदा हुआ टैटू. ओडिशा के केंद्रापड़ा जिले के बलुरिया गांव की रहने वाली 70 वर्षीय प्रमिला मलिक 35 साल बाद अपने परिवार से मिल पाईं.
पुलिस के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के एक वृद्धाश्रम में रह रही प्रमिला की पहचान उनके हाथ पर बने ओड़िया लिपि के टैटू से हुई. इसी टैटू से अधिकारियों को पता चला कि उनका संबंध ओडिशा से है, जिसके बाद उनके परिवार की तलाश शुरू की गई.
परिवार को नहीं पता था कहां हैं प्रमिला
प्रमिला के बेटे ध्रुव चरण मलिक ने बताया कि उनकी मां कई दशक पहले ससुराल और मायके दोनों जगहों को छोड़कर चली गई थीं. इसके बाद परिवार का उनसे कोई संपर्क नहीं रहा. लंबे समय तक उनकी कोई खबर नहीं मिली और परिवार को यह भी नहीं पता था कि वह कहां हैं.
परिवार की तलाश के दौरान यह जानकारी सामने आई कि प्रमिला वर्ष 2011 से 2018 तक हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में रहीं. इसके बाद उन्हें शिमला के नारी निकेतन में रखा गया. बाद में फरवरी 2023 में उन्हें मंडी जिले के भंगरोटू स्थित वृद्धाश्रम में भेज दिया गया था.
वृद्धाआश्रम में हुई पहचान
वृद्धाश्रम में रहने के दौरान अधिकारियों की नजर उनके हाथ पर बने ओड़िया टैटू पर पड़ी. इसी सुराग के आधार पर उनकी पहचान की कोशिश शुरू हुई. हिमाचल प्रदेश के बल्ह उपमंडल के एसडीएम के नेतृत्व में एक टीम ने ओडिशा पुलिस की मदद से जांच की और आखिरकार केंद्रापड़ा जिले के पट्टामुंडई क्षेत्र में उनके परिवार का पता लगा लिया.
जब प्रमिला को बताया गया कि उनका परिवार मिल गया है, तो उन्होंने अपने गृह राज्य लौटने और परिजनों से मिलने की इच्छा जताई. इसके बाद केंद्रापड़ा पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर 26 सितंबर को एक विशेष पुलिस टीम हिमाचल प्रदेश भेजी गई. सभी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस टीम प्रमिला को ओडिशा लेकर आई.
4 अक्टूबर को प्रमिला अपने गांव बलुरिया पहुंचीं और 35 साल बाद परिवार से उनका भावुक मिलन हुआ. हालांकि इस खुशी के बीच एक गहरा दर्द भी था. उनके पति दीनबंधु मलिक का करीब छह महीने पहले निधन हो चुका है. प्रमिला अपने पति से दोबारा नहीं मिल सकीं.
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश और ओडिशा के प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय, लगातार प्रयास और एक छोटे से टैटू की मदद से यह पुनर्मिलन संभव हो सका.
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