ओडिशा को माओवाद मुक्त बनाने की दिशा में सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है. मलकानगिरि जिले के घने जंगलों में चलाए गए संयुक्त अभियान में माओवादियों के छिपाए गए हथियार और विस्फोटकों का बड़ा जखीरा बरामद हुआ है. खास बात यह है कि यह कार्रवाई सरेंडर कर चुके माओवादियों से मिली पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर की गई, जिससे एक बड़ी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया.
संयुक्त ऑपरेशन में मिली सफलता
मलकानगिरि जिले के मथिली थाना क्षेत्र के किरमिटी और काटुआपदर के जंगलों में डीवीएफ (District Voluntary Force) और बीएसएफ के जवानों ने मिलकर सघन सर्च ऑपरेशन चलाया. कठिन और संवेदनशील इलाके में घंटों तक कॉम्बिंग के बाद सुरक्षाबलों ने माओवादियों के ठिकाने का पता लगाया और वहां से बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए.
क्या-क्या बरामद हुआ?
इस कार्रवाई के दौरान एक INSAS LMG, दो INSAS राइफल, एक ग्रेनेड, तीन IED, 18 डेटोनेटर और AK मैगजीन जैसे खतरनाक हथियार मिले हैं. इसके अलावा वायरलेस रिमोट स्विच और वॉकी-टॉकी जैसे संचार उपकरण भी जब्त किए, जो किसी बड़े हमले की तैयारी की ओर इशारा करते हैं.
हथियारों के अलावा सुरक्षाबलों को कई अन्य सामान भी मिला है, जिनमें सोलर प्लेट, बिजली के तार, प्रिंटर कार्ट्रिज, मेडिकल सामग्री, सलाइन बोतलें, टेंट, गन पाउडर और स्प्लिंटर शामिल हैं. इन चीजों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि माओवादी लंबे समय तक जंगल में टिके रहने और बड़े पैमाने पर गतिविधियां संचालित करने की तैयारी कर रहे थे.
AOBSZC कैडरों पर शक
प्राथमिक जांच में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि ये हथियार AOBSZC (आंध्र-ओडिशा बॉर्डर स्पेशल जोन कमेटी) से जुड़े माओवादी कैडरों के हो सकते हैं. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, इन हथियारों का इस्तेमाल आम नागरिकों और सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए किया जाना था.
बड़ी साजिश हुई नाकाम
इस कार्रवाई से माओवादियों की एक बड़ी साजिश पर पानी फिर गया है. समय रहते हथियारों की बरामदगी ने संभावित बड़े हमले को टाल दिया. फिलहाल बरामद सामग्री की जांच की जा रही है और उससे जुड़े नेटवर्क को खंगाला जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने साफ कर दिया है कि ओडिशा को पूरी तरह माओवाद मुक्त बनाने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे.
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