विज्ञापन

Success Story: कोविड में सब कुछ हुआ बंद, महिला को इंटरनेट से मिला ऐसा आइडिया, घर बैठे कमा रहीं 20 लाख

Sujata Agarwal success story: शौक से शुरू हुआ गार्डनिंग का सफर बना 20 लाख का सफल स्टार्टअप. जानिए कैसे ओडिशा की एक गृहिणी ने घर की चारदीवारी में केसर और विदेशी सब्जियां उगाकर मिसाल कायम की.

Success Story: कोविड में सब कुछ हुआ बंद, महिला को इंटरनेट से मिला ऐसा आइडिया, घर बैठे कमा रहीं 20 लाख
Sujata Agarwal saffron farming in Odisha story

कहते हैं अगर दिल में कुछ नया करने की लगन हो, तो रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं. ओडिशा के झारसुगुड़ा की रहने वाली सुजाता अग्रवाल ने कुछ ऐसा ही करिश्मा कर दिखाया है. एक आम गृहिणी, जिसे कभी सिर्फ फूलों का शौक था, उसने उसी शौक को एक अनोखे मुकाम पर पहुंचा दिया. सुजाता ने उस तकनीक को अपनाया जहां मिट्टी की जरूरत ही नहीं होती, यानी पानी और हवा के सहारे खेती. और तो और, जिस कश्मीर के केसर के बारे में लोग सोचते थे कि यह सिर्फ वादियों की ठंडी हवाओं में ही मुमकिन है, उसे सुजाता ने ओडिशा की तपती धरती पर अपने ही घर में खिलाकर सबको हैरान कर दिया. आज सुजाता सालाना 20 लाख की कमाई घर बैठे ही कर रही है.


जब शौक बना जिंदगी का नया मकसद

सुजाता को बचपन से ही पेड़-पौधों और फूलों से गहरा लगाव था. यह शौक उन्हें अपनी मां से विरासत में मिला था. शादी के बाद पवन कुमार अग्रवाल के साथ नई जिंदगी की शुरुआत हुई, तो उन्होंने अपने घर की छत पर एक छोटा सा खूबसूरत बगीचा सजा लिया. वहां गुलाब, जरबेरा, गेंदा और गुड़हल की बहार थी. आज आलम यह है कि उनके पास गुलाब की ही 250 से ज्यादा किस्में मौजूद हैं. लेकिन असली बदलाव आया साल 2020 के लॉकडाउन में. लॉकडाउन से पहले सुजाता बच्चों को अबेकस, ओडिसी डांस और पेंटिंग सिखाती थीं. जब सब कुछ बंद हो गया और वक्त ही वक्त था, तो टाइमपास के लिए मोबाइल चलाते-चलाते उनकी नजर हाइड्रोपोनिक्स (बिना मिट्टी की खेती) पर पड़ी. 

ये भी पढ़ें: 29 साल में रिटायरमेंट: पुणे की स्नेहा का 4-स्टेप फॉर्मूला जो बदल दे जीवन की परिभाषा


बिना मिट्टी के खेती

सुजाता ने इस तकनीक का नाम पहली बार सुना था, पर सीखने का जुनून ऐसा सवार हुआ कि इंटरनेट पर दिन-रात रिसर्च शुरू कर दी.

पहला कदम (2021): नोएडा से ऑनलाइन 320 पौधों वाला हाइड्रोपोनिक सिस्टम मंगाया और अपने घर के 100 वर्ग फुट के कमरे में लगा दिया.

शुरुआती लागत: सिस्टम पर करीब 25,000 रुपये और बीज-पोषक तत्वों पर सिर्फ 500 रुपये का खर्च आया. चूंकि कमरे के अंदर धूप नहीं थी, इसलिए पौधों के लिए खास 'ग्रो लाइट्स' का इंतजाम किया. शुरुआत में पौधे मुरझाए, पर सुजाता ने हार नहीं मानी. तीसरी फसल तक आते-आते मेहनत रंग लाई.

पहले उन्होंने घर के खाने के लिए लेट्यूस, ब्रोकली और लाल पत्तागोभी उगाई. जब पैदावार बढ़ी, तो उन्होंने देखा कि झारसुगुड़ा के कैफे और रेस्टोरेंट यह सब्जियां पुणे और बेंगलुरु से महंगे दामों पर मंगवाते हैं. सुजाता ने स्थानीय कैफे वालों से संपर्क किया. पहले तो किसी को यकीन ही नहीं हुआ कि ओडिशा के मौसम में ऐसी विदेशी सब्जियां उग सकती हैं. लेकिन जब उन्होंने खुद आकर देखा और ताजी सब्जियां चखीं, तो तुरंत पक्के ग्राहक बन गए.

शुरुआत में बाजार बनाने के लिए सुजाता ने कीमतें कम रखीं जैसे 500 रुपये किलो वाली शिमला मिर्च 350 रुपये में और 700 रुपये किलो वाला लेट्यूस 300 से 400 रुपये में बेचा. उस वक्त उनकी सालाना कमाई करीब एक लाख रुपये थी. 

Odisha Homemaker Indoor Saffron Farming Sujata Agarwal Success story Now Earns Rs 20 Lakh A Year

100 वर्ग फुट के कमरे में 2,000 पौधे

मांग बढ़ी तो सुजाता ने अपना दायरा भी बढ़ाया. 720 प्लांटर वाला नया सिस्टम लगाया और डच बकेट तकनीक से चेरी टमाटर, शिमला मिर्च और चायनीज पत्तागोभी उगाने लगीं. सुजाता बताती हैं कि हाइड्रोपोनिक्स का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें पानी, जगह और समय—तीनों की भारी बचत होती है. पारंपरिक खेती में जहां साल में 3 बार फसल मिलती है, वहीं इस तकनीक से साल में 7 बार कटाई की जा सकती है. सिर्फ 100 वर्ग फुट के कमरे में 2,000 पौधे लहलहाने लगे.

साल 2022 में उन्होंने न्यूट्रिएंट्स से भरपूर माइक्रोग्रीन्स (सुपरफूड्स) उगाना शुरू किया. यह नन्हे पौधे महज एक हफ्ते में तैयार हो जाते हैं. हर रविवार को माइक्रोग्रीन्स बेचकर ही वह हफ्ते के 15,000 से 20,000 रुपये कमाने लगीं. उन्होंने अपने इस कारोबार को नाम दिया 'ब्लूम इन हाइड्रो' (Bloom in Hydro). 

ये भी पढ़ें: इस भारतीय ने बनाए ऐसे AI मॉडल्स, सुपरकंप्यूटर भी हुए फेल, 'टाइम मैगजीन' की टॉप 100 लिस्ट में हुईं शामिल


ओडिशा के कमरे में अब कश्मीर का केसर

साल 2022 की एक सुबह पूजा करते वक्त सुजाता की नजर केसर की डिब्बी पर पड़ी. दिमाग में बिजली सी कौंधी "क्या केसर मेरे घर में नहीं उग सकता?" परिवार ने सुना तो सीधे कह दिया कि दिमाग खराब हो गया है, केसर सिर्फ कश्मीर की वादियों में ही उगता है. लेकिन सुजाता ठान चुकी थीं.

कमरे को बनाया 'मिनी कश्मीर': करीब 11 लाख रुपये का निवेश कर एक क्लाइमेट-कंट्रोल कमरा तैयार किया, जिसमें चिलर, ह्यूमिडिफायर और डीह्यूमिडिफायर लगाकर कश्मीर जैसा ठंडा और नमी वाला माहौल बनाया. 

धोखाधड़ी का डर: कश्मीर के एक किसान से 1,000 रुपये प्रति किलो के भाव से 300 किलो केसर के कंद (बल्ब्स) मंगाए और पूरे पैसे एडवांस दे दिए. पैसे मिलते ही किसान ने फोन उठाना बंद कर दिया. एक महीने तक सांसें थमी रहीं, लेकिन आखिरकार कंद सुरक्षित पहुंच गए. 

एरोपोनिक्स में खिला लाल सोना: हवा में लटकती जड़ों (Aeroponics) वाली तकनीक से तापमान नियंत्रित किया. डेढ़ महीने बाद कंद फूटे और बैंगनी फूलों की बहार आ गई. एक-एक बल्ब से 5-5 फूल निकले. अक्टूबर 2022 में 450 ग्राम और जनवरी 2023 में 50 ग्राम असली केसर तैयार हुआ. इसके बाद उन्होंने केसर के साथ-साथ फेस सीरम, फेस पैक और कश्मीरी कहवा टी जैसे प्रोडक्ट्स भी बाजार में उतारे, जिनकी आज देश भर में भारी मांग है. 

ये भी पढ़ें: अमेरिका में इस गुजराती ने लाखों भारतीयों को बनाया करोड़पति, लेकिन खुद गरीबी में तोड़ा दम
 

20 लाख का टर्नओवर और दूसरों को रोजगार

आज सुजाता का 'ब्लूम इन हाइड्रो' सालाना करीब 20 लाख रुपये का टर्नओवर कर रहा है. उन्होंने अपने साथ 20 महिलाओं और स्थानीय लोगों को रोजगार दिया है, जो पैकेजिंग, डिलीवरी और सोशल मीडिया का काम संभालते हैं. सुजाता सिर्फ खुद आगे नहीं बढ़ीं, बल्कि अब तक 80 से ज्यादा लोगों को हाइड्रोपोनिक्स, माइक्रोग्रीन्स और केसर की आधुनिक खेती की ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बना चुकी हैं. सुजाता कहती हैं, "अगर सच्ची लगन हो, तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं है. जब मैं घर की चारदीवारी में केसर उगा सकती हूं, तो कोई भी कर सकता है." 

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Success Story, Business Story, Startup Story, Women Startup India
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com