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Success Story: जुड़वा बहनों का कमाल, एक साथ जन्मीं, एक साथ पढ़ीं, अब NET-JRF में रचा इत‍िहास

बिहार के मुजफ्फरपुर की जुड़वा बहनों शोनाया और शनाया निशांत ने गांव में रहकर सेल्फ स्टडी के जरिए CSIR-NET परीक्षा में सफलता पाई है. मैट्रिक से पीजी तक हमेशा आगे रहने वाली बड़ी बहन शोनाया ने NET क्वालीफाई किया, वहीं 20 मिनट छोटी शनाया ने ऑल इंडिया 92वीं रैंक के साथ JRF हासिल किया.

Success Story: जुड़वा बहनों का कमाल, एक साथ जन्मीं, एक साथ पढ़ीं, अब NET-JRF में रचा इत‍िहास
बिहार की जुड़वा बहनों की CSIR-NET में अनोखी सफलता
NDTV
  • बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की जुड़वा बहनों शोनाया और शनाया निशांत ने CSIR-UGC NET परीक्षा में सफलता हासिल की है
  • दोनों बहनों ने जंतु विज्ञान विषय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई लंगट सिंह कॉलेज से प्रथम श्रेणी में पूरी की है
  • शनाया ने ऑल इंडिया 92वीं रैंक हासिल कर जूनियर रिसर्च फेलोशिप प्राप्त की जबकि शोनाया ने NET क्वालीफाई किया है

Success Story Bihar: एक साथ जन्मीं, एक साथ पली-बढ़ीं, साथ पढ़ीं और अब सफलता भी साथ हासिल की. ब‍िहार के मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर प्रखंड स्थित खरहर गांव की जुड़वा बहनों शोनाया निशांत और शनाया निशांत ने CSIR-UGC NET में सफलता का परचम लहराया है. दोनों ने जंतु विज्ञान विषय से यह परीक्षा दी थी. शनाया ने ऑल इंडिया 92वीं रैंक के साथ जूनियर रिसर्च फेलोशिप हासिल की है, जबकि शोनाया ने भी NET क्वालीफाई कर लिया है.

26 वर्षीय दोनों बहनों की सक्‍सेस स्‍टोरी में एक दिलचस्प पहलू भी है. जन्म में महज 20 मिनट के अंतर से शोनाया बड़ी हैं. मैट्रिक से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक की सभी परीक्षाओं में शोनाया अपनी छोटी बहन शनाया से मामूली अंतर से आगे रहती थीं. हालांकि, यह पहला अवसर है जब छोटी बहन शनाया ने बड़ी बहन से बढ़त बनाई और ऑल इंडिया 92वीं रैंक प्राप्त की.
twin sisters success story bihar qualify csir net jrf

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जन्म, पढ़ाई और परीक्षा का सफर रहा साथ

दसवीं तक दोनों ने छपरा हाई स्कूल से पढ़ाई की. इसके बाद इंटरमीडिएट, ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई लंगट सिंह कॉलेज, मुजफ्फरपुर से पूरी की. दोनों ने जंतु विज्ञान संकाय से पीजी किया. दोनों ने फर्स्ट क्लास से अपनी पढ़ाई पूरी की. दिलचस्प बात यह रही कि मैट्रिक से लेकर पीजी तक के परिणामों में शोनाया हमेशा मामूली अंकों से आगे रहीं. लेकिन जब CSIR-NET का परिणाम आया, तो पहली बार छोटी बहन आगे निकल गई. शनाया ने 92वीं रैंक के साथ JRF हासिल किया, वहीं शोनाया ने NET क्वालीफाई किया.

जुड़वा बहनों के पिता कौशलेंद्र झा ने NDTV से बातचीत में बताया कि  छोटी बहन शनाया को खुद से ज्यादा अंक मिलने की सबसे ज्यादा खुशी शोनाया को ही है. शोनाया इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है कि वह अगली परीक्षा में NET JRF क्लियर कर लेगी और उसने अगली परीक्षा का फॉर्म भी भर दिया है. वैसे, शोनाया भी असिस्टेंट प्रोफेसर और PhD के लिए क्वालीफाई कर चुकी है.
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बिहार की जुड़वा बहनों का CSIR-NET में कमाल

गांव में रहकर तैयारी की 

CSIR-NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की कठिन परीक्षा की तैयारी के लिए इन जुड़वा बहनों ने किसी बड़े शहर में कोचिंग नहीं की. अपने गांव खरहर में रहकर ही सेल्फ स्टडी पर भरोसा जताया. शोनाया और शनाया ने NDTV को बताया कि वे दोनों रोजाना करीब 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं. उन्होंने ऑनलाइन कक्षाओं और डिजिटल स्टडी मटेरियल से अपनी तैयारी को धार दी. इसके लिए उन्होंने IFAS जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की मदद ली.

एक ही विषय होने के कारण पढ़ाई में दोनों एक-दूसरे की स्वाभाविक सहपाठी बनीं. किसी टॉपिक को समझने में परेशानी होती तो वे आपस में चर्चा कर लेती थीं और कोई सवाल अटकता तो मिलकर उसका हल तलाशती थीं. उनकी तैयारी में बाहरी संसाधनों से ज्यादा नियमित पढ़ाई, विषय की गहरी समझ और निरंतर रिवीजन पर जोर रहा, जिससे यह सफलता आसान हो गई.
मुजफ्फरपुर की जुड़वा बहनों शोनाया और शनाया ने पास की CSIR-NET

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एक-दूसरे की साथी, कभी-कभी शिक्षक भी

एक ही विषय में पढ़ाई करने का पूरा फायदा तैयारी के दौरान दोनों को मिला. किसी विषय पर एक की समझ बेहतर होती तो वह दूसरी को समझाती. इस तरह दोनों के बीच आपसी सहयोग लगातार बना रहा. शोनाया और शनाया का कहना है कि उनके बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा जरूर थी, लेकिन एक-दूसरे को पीछे छोड़ना कभी लक्ष्य नहीं रहा. दोनों के लिए जरूरी था कि जिस विषय में समस्या हो, उसे साथ बैठकर सुलझाया जाए. शायद यही वजह है कि CSIR-NET के परिणाम में अंतर होने के बावजूद परिवार इस उपलब्धि को दोनों की साझी सफलता के रूप में देख रहा है.

लेखक-पत्रकार पिता ने बनाया पढ़ाई का माहौल

शोनाया और शनाया के पिता कौशलेंद्र झा एक लेखक और स्थानीय पत्रकार हैं. मीनापुर प्रखंड के खरहर गांव के निवासी कौशलेंद्र झा ने राजनीति विज्ञान से PG किया है. लेखन के साथ-साथ वे कृषि कार्य से भी जुड़े हैं. उन्होंने मीनापुर और स्थानीय इतिहास से जुड़े विषयों पर कई पुस्तकें लिखी हैं. इनमें 'मीनापुर की क्रांति गाथा' (जो 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की स्थानीय पृष्ठभूमि पर केंद्रित है) के अलावा 'गुमनाम हकीकत' और 'अनहद, अग्रदूत' जैसी चर्चित पुस्तकें शामिल हैं.

उनकी पत्नी कल्पना देवी गृहिणी हैं. इस मध्यमवर्गीय परिवार में बच्चों की शिक्षा को हमेशा पहली प्राथमिकता दी गई, जिससे घर में शुरू से ही पठन-पाठन का माहौल बना रहा. परिवार में उच्च शिक्षा का यह सिलसिला सिर्फ इन दोनों बहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके बड़े भाई शौनित निशांत ने भी MBA किया है और वे भी NET क्वालीफाई कर चुके हैं. 

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