VIDEO: क्या 29 साल की उम्र में कोई रिटायर हो सकता है? आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहां लोग 60 की उम्र तक ऑफिस की फाइलों में दबे रहते हैं, वहीं एक लड़की ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. इस 29 साल की लड़की ने न सिर्फ कॉर्पोरेट की '9-to-5' वाली चक्की से खुद को आजाद किया, बल्कि पुणे के पास एक सुकून भरी दुनिया भी बसा ली है. सोशल मीडिया पर उनकी कहानी वायरल हो रही है. लोग हैरान भी हैं और उनसे प्रेरणा भी ले रहे हैं. इंस्टाग्राम पर @baapbetifarm नाम से अकाउंट चलाने वाली स्नेहा राजगुरु ने अपनी इस अनोखी कहानी और जिंदगी का चार-स्टेप फॉर्मूला भी शेयर किया है. स्नेहा का कहना है कि रिटायरमेंट का मतलब काम छोड़ना नहीं, बल्कि जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीना है.
आइए जानते हैं स्नेहा का वो 4-स्टेप वाला प्लान, जिसने उन्हें तनाव की जिंदगी से निकालकर सुकून की जिंदगी दी.
अपनी जमीन, अपनी पहचान
स्नेहा कहती हैं कि सबसे पहला कदम है- एक छोटा सा जमीन का टुकड़ा खरीदिए. उसे सिर्फ प्रॉपर्टी मत समझिए, उसे अपना नाम दीजिए, अपनी पहचान दीजिए. जैसे स्नेहा ने अपने इस आशियाने को नाम दिया है- 'बाप-बेटी फार्म'. यह वो जगह है जहां से आपकी नई जिंदगी की नींव पड़ती है.
पेड़ों से गहरा नाता और फलों की मिठास
उनका दूसरा नुस्खा बड़ा ही प्यारा और आसान है. स्नेहा कहती हैं कि अपनी जमीन पर फलों के पेड़ लगाइए. पेड़ों की सबसे अच्छी बात यह है कि ये आपके साथ बड़े होते हैं. इन्हें बहुत ज्यादा देखरेख और मजदूरी की जरूरत नहीं होती. एक बार प्यार से लगा दीजिए, फिर ये सालों-साल आपको मीठे फल देते रहेंगे.
थाली में खुद की उगाई सब्जी
तीसरा कदम आपको पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाता है. अपनी सब्जियां और अनाज खुद उगाइए. स्नेहा एक बहुत पते की बात कहती हैं, "अगर कल को फिर से लॉकडाउन लग जाए या युद्ध जैसी कोई आफत आ जाए, तो आपको किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. सच मानिए, सरकार के भरोसे रहने की भी जरूरत नहीं होगी." अपनी थाली का इंतजाम खुद करना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है.
फूलों की महक से मन का इलाज
चौथा कदम सीधे आपके दिल और दिमाग को छूता है. स्नेहा का मानना है कि अपनी जमीन को रंग-बिरंगे फूलों से भर दीजिए. जब आपकी नजरें रोज सुबह इस कुदरती खूबसूरती को देखेंगी, तो मन अपने आप चंगा हो जाएगा. वो कहती हैं, "रोज इस खूबसूरती को देखने वाले मन को कभी अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ती." ऐसी जगह बनाइए जो सिर्फ पेट ही न भरे, बल्कि आपकी रूह को भी सुकून दे.
इस कहानी का असली संदेश क्या है?
स्नेहा राजगुरु ने रिटायरमेंट की जो नई परिभाषा लिखी है, वो वाकई दिल को छू लेने वाली है. वो कहती हैं कि रिटायरमेंट का संबंध किसी उम्र की सीमा से नहीं है. यह तो एक फैसला है-दबाव और तनाव की जिंदगी को छोड़कर सुकून और शांति का रास्ता चुनने का. यह कहानी सिर्फ नौकरी छोड़ने की नहीं है. यह कहानी है खुद को जानने की, कुदरत की गोद में वापस लौटने की और एक ऐसी जिंदगी जीने की, जो हर रोज किसी अंधी दौड़ जैसी न लगे.
हालांकि यह लाइफस्टाइल सुनने में बेहद खूबसूरत लगती है, लेकिन ध्यान रहे कि खेती और आत्मनिर्भरता का यह रास्ता रातों-रात नहीं बनता. इसके लिए धैर्य, शुरुआती पूंजी और कड़ी मेहनत की जरूरत होती है. बिना पूरी तैयारी और वित्तीय सुरक्षा के कॉर्पोरेट जॉब छोड़ना आको मुसीबत में डाल सकता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं