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इस भारतीय ने बनाए ऐसे AI मॉडल्स, सुपरकंप्यूटर भी हुए फेल, 'टाइम मैगजीन' की टॉप 100 लिस्ट में हुईं शामिल

Anima Anandkumar Success story: मैसूर से निकलीं भारतवंशी वैज्ञानिक अनिमा आनंदकुमार का AI मॉडल अब सुपरकंप्यूटरों से भी तेज मौसम की सटीक भविष्यवाणी कर रहा है. जानिए कैसे भारतीय जीनियस महिला ने टेक जगत में रचा इतिहास.

इस भारतीय ने बनाए ऐसे AI मॉडल्स, सुपरकंप्यूटर भी हुए फेल, 'टाइम मैगजीन' की टॉप 100 लिस्ट में हुईं शामिल
Anima Anandkumar TIME 100 AI story
  • टाइम मैगजीन की टॉप 100 AI दिग्गजों में शामिल हुईं भारत की अनिमा आनंदकुमार, UN बोर्ड में भी मिली जगह
  • इनके AI मॉडल सुपरकंप्यूटर से भी कई गुना तेजी से मौसम और तूफानों की सटीक भविष्यवाणी कर सकते हैं
  • IIT, Caltech और NVIDIA से जुड़ीं अनिमा भरतनाट्यम डांसर भी हैं; दवा खोज व चिप्स में मददगार हैं इनके मॉडल

सोचिए, अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फिजिक्स के सबसे पेचीदा रहस्यों को सुलझा दे और मौसम का सटीक हाल सुपरकंप्यूटरों से भी कई गुना तेजी से बता दे, तो दुनिया कितनी बदल जाएगी. यह कोई कोरी कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत है. और इस हकीकत को जमीन पर उतारने वाला बड़ा नाम हैं अनिमा आनंदकुमार. उन्हें प्रतिष्ठित मैगजीन 'टाइम' AI की क्षेत्र काम करने वाली दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों में शामिल किया है. ये भारतीय महिला शायद मौसम को अपने इशारों पर बदल न सकें, लेकिन मौसम का मिजाज कब बदलेगा, इसका सटीक अंदाजा वो पलक झपकते ही लगा सकती है. कर्नाटक के ऐतिहासिक शहर मैसूर में जन्मी अनिमा का नाता साइंस और मैथ्स से बहुत गहरा रहा है. उनके परिवार में पढ़ाई-लिखाई का माहौल ऐसा था कि गणित घर की बातचीत का हिस्सा हुआ करता था. माता-पिता दोनों इंजीनियर, दादा गणितज्ञ और परदादा संस्कृत के प्रकांड विद्वान.

अनिमा की दुनिया सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं थी. एक तरफ जहां उनका दिमाग समीकरणों को हल करता था, वहीं दूसरी तरफ वो कई सालों तक मंच पर भरतनाट्यम की ताल पर थिरकती रहीं. कला और विज्ञान का यह अनोखा तालमेल ही आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना. उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की शुरुआती पढ़ाई देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पूरी की और 2004 में बीटेक की डिग्री हासिल की.  

IIT मद्रास से लेकर कॉर्नेल और MIT तक का सफर

इंजीनियरिंग के बाद अनिमा ने सपनों की नई उड़ान भरी और अमेरिका की मशहूर कॉर्नेल यूनिवर्सिटी जा पहुंचीं. 2009 में उन्होंने यहां से अपनी पीएचडी पूरी की. उनका रिसर्च डेटा और बड़े सिस्टम के जटिल गणित पर आधारित था. पीएचडी के दौरान ही उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें IBM फेलोशिप से नवाजा गया.

पीएचडी के बाद उनका अगला पड़ाव बना मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT). यहां पोस्टडॉक्टरल रिसर्चर के तौर पर उन्होंने मशीन लर्निंग और जटिल सिस्टम्स को समझने के नए तरीके विकसित किए. यह वही दौर था, जब अनिमा दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक संस्थानों की नजरों में आ चुकी थीं. 


अमेजन, कालटेक और एनवीडिया, सबने किया सलाम

अनिमा का सफर सिर्फ क्लासरूम और लैब तक सीमित नहीं रहा. वो टेक जगत की दिग्गज कंपनी अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) में प्रिंसिपल साइंटिस्ट बनीं. आज दुनिया भर में मशहूर मशीन लर्निंग टूल 'Amazon SageMaker' को तैयार करने और लॉन्च करने में अनिमा की अहम भूमिका रही. साल 2017 में वो दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित विज्ञान संस्थानों में से एक, कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) में बतौर प्रोफेसर शामिल हुईं. इसके बाद 2018 में उन्होंने चिप और ग्राफिक्स की दिग्गज कंपनी NVIDIA में 'सीनियर डायरेक्टर ऑफ AI रिसर्च' की जिम्मेदारी संभाली. 

AI  बताएगा कि कितना बड़ा तूफान आने वाला है?

अनिमा आनंदकुमार का मुख्य शोध इस बात पर है कि कैसे AI को फिजिक्स के नियमों के साथ जोड़ा जाए. उन्होंने 'न्यूरल ऑपरेटर्स' नाम की तकनीक पर काम किया है. सरल शब्दों में समझें तो, जिन वैज्ञानिक समस्याओं को हल करने में सुपरकंप्यूटरों को हफ्तों लग जाते थे, अनिमा के AI मॉडल उन्हें चंद पलों में हल करने की ताकत रखते हैं.

मौसम की सटीक भविष्यवाणी: तूफान कब आएगा, बारिश कहां होगी, इसका अनुमान अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और सटीक हो गया है.

दवाइयों की तेज खोज: बीमारियों के नए इलाज और दवाइयों को खोजने में लगने वाले सालों के वक्त को घटाने में यह तकनीक मददगार साबित हो रही है.  

Who Is Anima Anandkumar? The Mysore-Born Scientist Teaching Supercomputers to Predict Weather with AI

अनिमा के AI मॉडल्स दुनिया में सबसे अलग क्यों?

इनके बनाए AI मॉडल्स आज अस्पतालों के लिए ऐसे मेडिकल उपकरण डिजाइन कर रहे हैं, जो मरीजों को संक्रमण से बचा सकें. क्वांटम कंप्यूटर्स के पुर्जे और मोबाइल-लैपटॉप की माइक्रोचिप्स तैयार करने में मदद कर रहे हैं. यही नहीं, भविष्य में हमें प्रदूषण मुक्त असीम ऊर्जा देने वाले न्यूक्लियर फ्यूजन को सुरक्षित बनाने की दिशा में भी इनका काम मील का पत्थर साबित हो रहा है. यही वजह है कि अनिमा के इस वैज्ञानिक कद को दुनिया ने सलाम किया है. इसी साल मार्च में संयुक्त राष्ट्र (UN) महासचिव ने उन्हें अपने 'साइंटिफिक एडवाइजरी बोर्ड' में शामिल किया. आज वो दुनिया भर के शीर्ष नेताओं को बता रही हैं कि AI को सही दिशा में कैसे इस्तेमाल किया जाए. उनका सबसे बड़ा जोर इस बात पर है कि जब AI को लेकर दुनिया भर में डर और गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं, तब विकासशील देशों खासकर ग्लोबल साउथ के आम लोगों तक इस तकनीक का असली फायदा पहुंचे.

अक्सर यह डर जताया जाता है कि क्या AI और बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स सिर्फ लोगों की निगरानी और जासूसी के लिए काम आएंगे? इस पर अनिमा आनंदकुमार का जवाब बेहद साफ और बेबाक है. उन्होंने TIME मैगजीन से बातचीत में दो टूक कहा, "हां, अगर ध्यान न दिया जाए तो यह भी एक मुमकिन भविष्य हो सकता है. लेकिन अगर हमारा लोकतंत्र जिंदा है, तो यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम यह तय करें कि इस ताकत का इस्तेमाल इंसानों की जासूसी के लिए नहीं, बल्कि मौसम, पर्यावरण और जीवन बचाने वाली वैज्ञानिक खोजों के लिए हो." 

Who Is Anima Anandkumar? The Mysore-Born Scientist Teaching Supercomputers to Predict Weather with AI

मैसूर की बेटी को दुनिया भर से मिले सम्मान

अनिमा के इस असाधारण योगदान के लिए उन्हें दुनिया भर में सराहा गया है. उन्हें प्रेस्टीजियस IEEE फेलोशिप, अल्फ्रेड पी. स्लोअन फेलोशिप और NSF करियर अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है. इतना ही नहीं, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और एडोब जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी उन्हें सम्मानित किया है. भरतनाट्यम की साधना से लेकर आधुनिक AI के शिखर तक, अनिमा आनंदकुमार की कहानी साबित करती है कि जब भारतीय मेधा और कड़ी मेहनत मिलती है, तो दुनिया की दिशा और दशा दोनों बदल जाती हैं. 

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