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बिहार के जीशान अली, पैसे की तंगी से छोड़नी पड़ी डॉक्टरी, आज हजारों अनाथ-गरीब बच्चों की जिंदगी में ला रहे रोशनी

Bihar boy inspirational story: 10 साल की उम्र में सिर से उठा पिता का साया और फिर पैसों की तंगी से टूटा खुद का सपना. जानिए कैसे मुंगेर के जीशान ने हार को अपनी ताकत बनाकर 149 गांवों की किस्मत बदल दी.

बिहार के जीशान अली, पैसे की तंगी से छोड़नी पड़ी डॉक्टरी, आज हजारों अनाथ-गरीब बच्चों की जिंदगी में ला रहे रोशनी
जीशान अली की संस्था ओडिशा में आदिवासियों के साथ काम कर रही है.

बिहार के मुंगेर के रहने वाले जीशान अली.  जब वह सिर्फ 10 साल के थे, तब उनके सिर से पिता का साया उठ गया. मुश्किलें बड़ी थीं, लेकिन जीशान की आंखों में सपने उससे भी बड़े थे. बीएसएफ बोर्डिंग स्कूल में दाखिला मिला तो एक नई उम्मीद जगी. जीशान ने दिन-रात एक कर दिया, मेडिकल की प्रवेश परीक्षा भी पास कर ली और डॉक्टर बनने का सपना देखने लगे.

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. घर के माली हालात ऐसे नहीं थे कि डॉक्टर की पढ़ाई की भारी-भरकम फीस चुकाई जा सके. पैसों की तंगी ने जीशान के कदम रोक दिए.

नौकरी के लिए गांव-गांव भटके, राह दिखाने वाला कोई नहीं

जरा सोचिए, उस नौजवान पर क्या गुजरी होगी? लेकिन जीशान ने हार नहीं मानी. उन्होंने एग्रीकल्चर की पढ़ाई की और फिर XIM Bhubaneswar से रूरल मैनेजमेंट की डिग्री ली. नौकरी के दौरान जब वो गांव-गांव घूमे, तो उन्हें अपने बचपन के दिन याद आ गए. उन्होंने देखा कि देश के गांवों में न जाने कितने ऐसे बच्चे हैं, जिनकी आंखों में बड़े-बड़े सपने तो हैं, लेकिन उन्हें राह दिखाने वाला कोई नहीं है. 

Zeeshan ali social shapes foundation bihar to odisha success story

बस, यहीं से जीशान ने एक बड़ा फैसला लिया. साल 2019 में उन्होंने 'सोशल शेप्स फाउंडेशन' (Social Shapes Foundation) की नींव रखी. शुरुआत ओडिशा के आठ गांवों से हुई.

आदिवासी बच्ची को दिखाई राह

इसी सफर के दौरान जीशान की मुलाकात 13 साल की गौरी से हुई. गौरी, सौरा आदिवासी समाज की एक ऐसी बच्ची थी, जिसने अपनी मां को खो दिया था और पढ़ाई छोड़ चुकी थी. फाउंडेशन के 'विकल्प' कार्यक्रम ने गौरी का हाथ थामा. उसे दोबारा स्कूल भेजा गया और आज वो एक सरकारी आवासीय विद्यालय में पढ़ रही है.  

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जो सफर सिर्फ आठ गांवों से शुरू हुआ था, वो जून 2026 तक ओडिशा के छह जिलों के 149 गांवों तक पहुंच चुका है. आज यह संस्था हजारों युवाओं को उच्च शिक्षा, हुनर और रोजगार की राह दिखा रही है. 

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