- नोएडा सेक्टर 150 में निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में भरे पानी में इंजीनियर युवराज मेहता की डूबकर मौत हो गई.
- युवराज की मौत के बाद जांच में पाया गया कि बेसमेंट में पानी भरा था और सुरक्षा उपायों की कमी थी.
- रेस्क्यू टीम के पास पर्याप्त साधन और प्रशिक्षित कर्मी नहीं थे, जिससे युवराज को बचाया नहीं जा सका.
Noida Engineer Death Case: पूरे दो घंटे थे लेकिन किसी ने उसे बचाया नहीं. वो किसी बड़ी नदी में नहीं डूब रहा था. वो एक रिहाइशी इलाके में बन रहे बेसमेंट में जमा पानी में डूबकर मर गया. इस दौरान वो अपने पापा से फोन पर कहता रहा- पापा बचा लो. जवान बेटे की पुकार सुनकर बूढ़ा बाप भी मौके पर आ चुका था. उन्होंने भी बेटे को बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन फिर भी वो बेटे को बचा नहीं सके. अपनी आंखों के सामने बेटे को डूबते देखते रहे. नोएडा सेक्टर 150 के अधूरे मॉल में पानी से भरे बेसमेंट में कार समेत गिरे इंजीनियर युवराज की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है? अगर आप घटनाक्रम समझेंगे तो सब साफ हो जाएगा.
कोहरे के कोहराम के बीच हुआ ये हादसा
दिल्ली NCR में इन दिनों कोहरे का कोहराम मचा हुआ है. हाथ को हाथ नहीं दिखाई देता. ऐसी की एक रात 16 जनवरी को युवराज मेहता नाम के शख्स गुरुग्राम से ग्रेटर नोएडा अपने घर जा रहे थे. उन्हें कोहरे के कारण कुछ दिखा नहीं और कोई वजह थी लेकिन उनका संतुलन बिगड़ा. कार सड़क किनारे बनी दीवार को तोड़कर एक मॉल के निर्माणाधीन बेसमेंट में जा घुसी. बेसमेंट में पानी भरा हुआ था लिहाजा कार डूब गई.
इंजीनियर युवराज की मौत मामले में उठ रहे कई सवाल
युवराज के पिता ने बयान दिया जो रेस्क्यू टीम आई उसके पास पर्याप्त साधन नहीं थे. एक डिलिवरी बॉय ने रस्सी फेंककर युवराज को बचाने की कोशिश की लेकिन वो भी नाकाम रहा, यही से दूसरा सवाल उठता है.
जब सूचना डूबने की मिली थी तो कोई ड्राइवर मौके पर क्यों नहीं गया? क्या रेस्क्यू टीम को चलाने वाले लोगों की भी जवाबदेही तय होगी?
सोए सिस्टम का खामियाजा इंजीनियर को उठाना पड़ा
स्थानीय लोग बताते हैं कि कई बार शिकायत की गई थी. लेकिन अथॉरिटी ने ध्यान नहीं दिया. जाहिर सी बात ये एक जानलेवा लापरवाही थी. सिस्टम के सोए होने का खामियाजा एक युवा इंजीनियर को उठाना पड़ा, वो हमेशा के लिए सो गया. युवराज के पिता ने बताया कि उसने बहुत मेहनत की थी, तब जाकर इंजीनियर बना था.

इंजीनियर युवराज के पिता राजकुमार मेहता का दर्द
मेरे बेटे ने रात करीब 12 बजे फोन किया कि पापा मैं नाले में गिर गया हूं. मुझे बचाओ. इतना सुनते ही उसको बचाने के लिए मैं जिस हालत में था, दौड़ पड़ा. किस्मत से बाहर मुझे कैब मिल गई. मैंने हाथ जोड़े कि भाई मुझे नाले के पास ले चलो. उसने मुझे बिठा लिया. पहले हम एक नाले के पास गए. वह वहां नहीं था. मैंने उसको फोन किया तो उसने बताया कि मैं सोसाइटी के पास वाले नाले में गिरा हूं. मुझे उसके पास पहुंचने में 40 मिनट लग गए.
उन्होंने बताया कि वह गाड़ी से निकलकर बाहर आया और हिम्मत करके छत पर लेट गया था. वहां से वह 'हेल्प हेल्प' चिल्ला रहा था ताकि को राह चलता आदमी उसकी हेल्प कर पाए.

पिता ने बताया रेस्क्यू करने पहुंची टीम के पास क्या थी कमी?
राजकुमार मेहता ने आगे बताया कि मैं भी वहां पहुंचा और सहायता के लिए इधर-उधर दौड़ने लगा. कोई तो मदद करे. फिर मैंने 112 डायल किया. पुलिस करीब 20 मिनट में पहुंच गई थी. फायर ब्रिगेड की टीम आई लेकिन रेस्क्यू के नाम पर उन्होंने समीति कोशिश की. हाइड्रोलिक मशीन का इस्तेमाल किया, लेकिन वह मेरे बेटे तक रस्सी नहीं पहुंचा पाए.
Noida, Uttar Pradesh: A car broke through the boundary wall of a drain near the Sector-150 turn in the Knowledge Park area and fell into the water-filled drain on Friday night, resulting in one death. The deceased has been identified as Yuvraj, son of Rajkumar Mehta.
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कमी यह थी कि उनके पास कोई ट्रेनिंग वाला आदमी नहीं था. नाव भी नहीं थी. करीब ढाई बजे के आस-पास मोबाइल की वह रोशनी बंद हो गई, जिससे वह कार की छत से दिखा रहा. मैं समझ गया कि बात हाथ से निकल गई है.
सेक्टर 150 के टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में रहता था इंजीनियर
पुलिस ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त स्थल पर लापरवाही और सुरक्षा उपायों की कमी का आरोप लगाते हुए स्थानीय निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया. पुलिस के मुताबिक, इस घटना के संबंध में दो रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस ने बताया कि युवराज मेहता सेक्टर 150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी का रहने वाला था.
पुलिस के मुताबिक, वह गुरुग्राम की एक प्रतिष्ठित कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत था और शनिवार तड़के काम से घर लौट रहा था तभी यह दुर्घटना हुई.
नोएडा प्राधिकरण ने किस पर क्या की कार्रवाई?
नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. लोकेश एम ने रविवार को इस घटना पर संज्ञान लेते हुए सड़क पर ब्लिंकर और संकेतक नहीं लगे होने की शिकायत पर यातायात प्रकोष्ठ के वरिष्ठ प्रबंधक और प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया. इसके अलावा क्षेत्र के कनिष्ठ अभियंता नवीन कुमार की सेवाएं तत्काल समाप्त करने के आदेश जारी किए गये हैं.
अधिकारी ने बताया कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्र की परियोजनाओं का निरीक्षण करने और सुरक्षा इंतजाम पुख्ता करने के निर्देश दिए गए हैं.
नॉलेज पार्क थाने ने क्या कुछ बताया?
नॉलेज पार्क थाने के अनुसार, सेक्टर 150 के पास निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में कार गिरने की सूचना देर रात करीब सवा 12 बजे मिली. उन्होंने बताया कि तलाशी अभियान शुरू किया गया और दमकल विभाग, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और स्थानीय पुलिस की टीमों की मदद से शनिवार सुबह शव बरामद किया गया.

प्रत्यक्षदर्शी का दावा- समय पर कार्रवाई होती को बच जाती इंजीनियर की जान
प्रत्यक्षदर्शी होने का दावा करने वाले ‘डिलीवरी एजेंट' मोनिंदर ने आरोप लगाया कि बचाव कार्य में देरी हुई. उसने बताया कि समय पर कार्रवाई की जाती तो इंजीनियर की जान बचाई जा सकती थी. मोहिंदर ने पत्रकारों को बताया कि वह रात करीब पौने दो बजे घटनास्थल पर पहुंचा था और ठंड व लोहे की छड़ों की मौजूदगी के कारण बचाव कर्मी पानी में उतरने से हिचकिचा रहे थे.
उसने दावा किया, “मैंने अपनी कमर में रस्सी बांधी और खुद पानी में उतर गया. मैंने करीब 30 मिनट तक युवक और उसकी कार को ढूंढा. ” मोनिंदर ने आरोप लगाया कि मेहता को पहले अपनी कार की छत पर खड़े होकर राहगीरों को मोबाइल फोन की टॉर्च से इशारा करते और मदद की गुहार लगाते देखा गया था.
Noida, Uttar Pradesh: On the death of Yuvraj Mehta, who fell into a drain near Sector-150 in Noida, Eyewitness Moninder Jatav says, "...I searched in the water for 30–40 minutes, but I could not find him. By the time I reached here, he had already drowned. I was late. Before me,… pic.twitter.com/u1IhAdwKxa
— IANS (@ians_india) January 19, 2026
उसने बताया, “मुझे बाद में बताया गया कि अगर मदद 10 मिनट पहले पहुंच जाती, तो उसे बचाया जा सकता था.” प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि इससे पहले स्थानीय लोगों ने उसी गड्ढे से एक ट्रक चालक को बचाया था.
एसीपी ने कहा- लापरवाही से इनकार नहीं किया जा सकता
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्रा ने इन आरोपों का जवाब देते हुए बताया कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है हालांकि उन्होंने लापरवाही से इनकार किया. उन्होंने बताया, “पुलिस और दमकल विभाग की टीमों ने युवक को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया. दमकल विभाग की क्रेन, सीढ़ी, अस्थायी नाव और सर्चलाइट का इस्तेमाल किया गया, लेकिन उस समय कुछ दिखाई नहीं दे रहा था.”
मिश्रा ने बताया कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है. उन्होंने बताया, “कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.” सहायक पुलिस आयुक्त हेमंत उपाध्याय ने बताया कि घटना के संबंध में शिकायत के आधार पर दो रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.

विरोध-प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने घटनास्थल पर लगाए ब्रेकर
सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पिता राज कुमार मेहता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि निवासियों ने नोएडा प्रशासन से नाले के पास अवरोधक और रिफ्लेक्टर लगाने के लिए बार-बार अनुरोध किया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं. इस बीच, रविवार शाम को स्थानीय निवासियों ने मेहता के लिए न्याय की मांग करते हुए कैंडल मार्च निकाला.
उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन और क्षेत्र विकासकर्ताओं की लापरवाही के कारण यह घटना हुई. विरोध प्रदर्शन के बाद, नोएडा प्रशासन ने घटनास्थल पर अवरोधक लगा दिए.
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