- काशी के मणिकर्णिका घाट पर विकास के नाम पर तोड़-फोड़ को लेकर साधु-संत और विपक्षी नेता विरोध जताते रहे हैं.
- कांग्रेस नेता सतनाम सिंह ने कहा कि अहिल्याबाई की मूर्ति सहित कई मूर्तियां और शिवलिंग भी तोड़े गए हैं.
- स्थानीय पुरोहितों ने तोड़-फोड़ को अनर्गल बताया और कहा कि नया सामग्री लगाने से घाट सुरक्षित नहीं रहेगा.
Varanasi Manikarnika Ghat: काशी के मणिकर्णिका घाट पर हुई तोड़-फोड़ को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक बहस छिड़ गई है. बहस का केंद्र है विकास के नाम पर विरासत से छेड़छाड़ क्यों? कई साधु-संत सहित विपक्षी नेताओं का कहना है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर मणिकर्णिका घाट पर हो रही तोड़फोड़ में महारानी अहिल्याबाई की मूर्ति को भी नहीं छोड़ा गया. मालवा की महारानी अहिल्याबाई ने मणिकर्णिका घाट का निर्माण करवाया था. इस घाट पर उनका प्रतिमा लगी थी. दूसरी ओर प्रशासन और यूपी सरकार का कहना है कि अहिल्याबाई की मूर्ति संरक्षित है. सरकार ने कांग्रेस सहित विपक्षी नेताओं पर AI जेनरेटेड तस्वीरों और वीडियो के जरिए माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया है. वाराणसी प्रशासन ने आप सांसद संजय सिंह, कांग्रेस नेता पप्पू यादव सहित 8 लोगों के खिलाफ मुकदमा तक दर्ज किया है.
NDTV ने ग्राउंड रिपोर्ट में समझी कहानी
रविवार को मणिकर्णिका घाट पर एनडीटीवी ने विभिन्न लोगों से बात कर पूरी स्थिति समझी. इसमें कांग्रेस के स्थानीय नेता के साथ-साथ स्थानीय तीर्थ-पुरोहित, वैदिक विद्वान सहित अन्य लोग शामिल हैं. इन लोगों ने क्या कुछ आइए जानते हैं इस रिपोर्ट में.
कांग्रेस नेता सतनाम सिंह बोले- विकास के नाम पर धार्मिक धरोहर को नष्ट किया जा रहा है
मणिकर्णिका घाट पर कांग्रेस नेता सतनाम सिंह कुछ लोगों के साथ मिले. जब एनडीटीवी ने सतनाम सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि जो तोड़-फोड़ हुई, उसमें अहिल्या बाई की मूर्ति भी तोड़ी गई है. साथ ही कई मूर्ति और शिवलिंग भी तोड़ दिए गए. विकास के नाम पर धार्मिक, सांस्कृतिक धरोहर को नष्ट किया जा रहा है. एआई तस्वीरें-वीडियो के बारे में उन्होंने कहा कि ये लोग प्रशासन और सरकार के लोग कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर तोड़-फोड़ के आरोप गलत हैं तो योगी जी सफाई क्यों दे रहे हैं?
स्थानीय पुरोहित बोले- ये सब अनर्गल हो रहा है, एक बाढ़ नहीं सह पाएगा
एक स्थानीय तीर्थ पुरोहित ने कहा, "ये सब अनर्गल हो रहा है. पुराना सामान सब तोड़ कर नया आर्टिफिशियल सामान लगाएंगे. एक बाढ़ नहीं सह पाएगा ये सब. एक बाढ़ में सब 62 हो जाएगा." हालांकि मौके पर मिट्टी के ढेर के अतिरिक्त कुछ भी नहीं दिख रहा था. लेकिन इस बात से इनकार करना मुश्किल है कि कोई तोड़फोड़ नहीं हुई है. अहिल्या बाई की मढ़ी तोड़ दी गयी है, प्रशासन का कहना है कि अहिल्या बाई की मूर्ति सुरक्षित और संरक्षित है.
रविवार को कुछ ऐसा दिखा मणिकर्णिका घाट, देखें तस्वीरें



स्थानीय सुरेंद्र सिंह बोले- किसकी मूर्ति टूटी ये तो पता नहीं चल रहा है
स्थानीय सुरेंद्र सिंह ने कहा कि दो महीने पहले हम यहां आए थे, यहां पक्का घाट था. यही आकर हम लोगों बैठे थे. यहां छोटे-छोटे कई मंदिर थे. सैकड़ों साल पुरानी मोटे-मोटे पत्थरों से बना था. सब तोड़ दिया गया. वहीं यह पूछने पर कि किसकी मूर्ति टूटी है तो सुरेंद्र सिंह ने ये तो पता नहीं चल रहा है कि कौन भगवान थे. उन्होंने यह भी कहा कि ये तोड़फोड़ एआई जेनरेटेड तो हैं नहीं.
चक्र पुष्करिणी कुंड सुरक्षित, कांग्रेस का आरोप- वो भी टूटा
मणिकर्णिका घाट पर मौजूद कुछ दूसरे तीर्थ पुरोहितों और घाट पर रहने वालों ने इस बात से इनकार किया कि घाट पर कोई मंदिर टूटा है या कोई भी स्थापित देवता की मूर्ति. हालांकि वहां स्थित मढ़ी के दीवारों मे उकेरी गई मूर्ति और कुछ अन्य मूर्ति के टूटने की बात लोगों ने की. मणिकर्णिका घाट स्थित चक्र पुष्करिणी कुंड, जो भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से बनाया गया था, वो सुरक्षित निकला. उससे कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है. हालांकि कांग्रेस ने इसे तोड़ने का आरोप लगाया है.
माता सती के कान के कुंडल यही गिरे थे
मणिकर्णिका घाट के सांस्कृतिक-धार्मिक मान्यता के बारे में वैदिक विद्वान श्रीधर पाण्डेय ने कहा कि यहाँ माता सती के कान के कुंडल गिरे थे. इसीलिए इसका नाम मनिकर्णिका पड़ा. यहां अंतिम संस्कार करने से भगवान विश्वनाथ शव के कान मे तर्क मंत्र देते है और फिर उसको मोक्ष मिल जाता है. ढाई सौ साल पहले होल्कर वंश की लोकमाता अहिल्या बाई ने मणिकर्णिका घाट का जीर्णोद्धार करवाया था.
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