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This Article is From Dec 27, 2025

'राजा बेटा' को बचाने वाली महिला को सजा देने के लिए कोई कानून नहीं: रेप मामले में हाईकोर्ट

फैसला सुनाते हुए जस्टिस अनूप चितकारा और सुखविंदर कौर की पीठ ने यह भी कहा कि परिवार के सदस्यों, विशेषकर माताओं को अक्सर अपने "अनमोल" बेटों के प्रति इतना अंधा प्यार होता है कि, चाहे वे कितने भी अपूर्ण या खलनायक क्यों न हों, उन्हें अभी भी 'राजा बेटा' माना जाता है.

'राजा बेटा' को बचाने वाली महिला को सजा देने के लिए कोई कानून नहीं: रेप मामले में हाईकोर्ट
  • पंजाब और हरियाणा HC ने पांच साल की बच्ची के बलात्कार और हत्या के दोषी की मौत की सजा आजीवन कारावास में बदली है
  • कोर्ट ने दोषी को तीस साल की जेल और भारी जुर्माने की सजा सुनाई तथा उसकी मां को सभी आरोपों से बरी किया है
  • अदालत ने कहा कि दोषी की मां ने अपने बेटे की रक्षा की कोशिश की जो आईपीसी के तहत दंडनीय नहीं माना जा सकता
चंडीगढ़:

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले की इन दिनों खूब चर्चा हो रही है. इस फैसले के तहत हाईकोर्ट ने साढ़े पांच साल की बच्ची के बलात्कार और हत्या के लिए दोषी की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है. साथ ही उसकी मां को बरी कर दिया है. कोर्ट ने आदेश सुनाते हुए कहा कि "अपने राजा बेटे की रक्षा करने की कोशिश" के लिए उसे दंडित करने के लिए आईपीसी की कोई धारा नहीं है. अदालत ने कहा कि यह हत्या, रेप के सबूत नष्ट करने की दहशत के कारण की गई थी, न कि पूर्व नियोजित योजना के कारण. अदालत ने दोषी को बिना किसी छूट के 30 साल की जेल के साथ आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही जुर्माने की रकम भी बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी गई.

फैसला सुनाते हुए जस्टिस अनूप चितकारा और सुखविंदर कौर की पीठ ने यह भी कहा कि परिवार के सदस्यों, विशेषकर माताओं को अक्सर अपने "अनमोल" बेटों के प्रति इतना अंधा प्यार होता है कि, चाहे वे कितने भी अपूर्ण या खलनायक क्यों न हों, उन्हें अभी भी 'राजा बेटा' माना जाता है. यह पता चलने के बाद कि उसका राजा-बेटा उतना भोला नहीं था जितना उसके नाम से पता चलता है. और उसने पांच साल की एक बच्ची के साथ मारपीट की और बेरहमी से हत्या कर दी, महिला ने पुलिस को सूचित करने और बच्ची को न्याय दिलाने के बजाय अपने बेटे को बचाने को प्राथमिकता दी.अदालत ने मां को उसके खिलाफ सभी आरोपों से बरी करते हुए कहा।

अदालत ने कहा कि यह सामाजिक रवैया, हालांकि भयावह है, नया नहीं है; यह क्षेत्र की पितृसत्तात्मक मानसिकता और संस्कृति में गहराई से अंतर्निहित है. वह अपने राजा-बेटे द्वारा लड़की की हत्या को देखकर सदमे में आ गई होगी, फिर भी उसकी रूढ़िवादी कंडीशनिंग ने उसके राजा-बेटे की रक्षा करने का प्रयास किया.

आपको बता दें कि 2020 में एक ट्रायल कोर्ट ने वीरेंद्र उर्फ ​​भोलू को मौत की सजा सुनाई और उसकी मां कमला देवी को 2018 बलात्कार और हत्या मामले में साजिश और सबूतों को नष्ट करने के लिए कठोर कारावास की सजा सुनाई. कोर्ट ने आगे कहा कि कमला देवी का एकमात्र गलती ये है कि वह अपने राजा-बेटे की रक्षा करने की कोशिश कर रही थी, जिसके लिए उसे भारतीय दंड संहिता के तहत दंडित नहीं किया जा सकता. चाहे उसका आचरण कितना भी निंदनीय क्यों न हो. इस प्रकार, आपराधिक साजिश का मामला बनाने के लिए कोई कानूनी रूप से स्वीकार्य सबूत नहीं है
या कमला देवी के ख़िलाफ़ सबूत मिटाने के लिए. 

अदालत ने कहा कि सबूतों का विश्लेषण पूरी तरह से स्थापित करता है कि परिस्थितियों की श्रृंखला पूर्ण, अटूट है, और किसी भी उचित संदेह से परे वीरेंद्र के अपराध का एकमात्र निष्कर्ष निकालती है.लड़की के शव की खोज, जिसकी हत्या से पहले रेप किया गया था, और परिसर से वीरेंद्र के घर के परिसर से उसकी लाश मिलने को लेकर वीरेंद्र के खिलाफ मामला दर्ज किया था. 

हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर के अपने फैसले में कहा कि हालांकि जानलेवा अपराध के कुछ भयावह क्षेत्रों में मौत की धमकी के माध्यम से रोकथाम अभी भी एक आशाजनक रणनीति हो सकती है, लेकिन इसकी निवारक प्रभावकारिता के एक अखंड सिद्धांत का समर्थन करना अवैज्ञानिक है.यह भी देखा गया कि इस बात को साबित करने के लिए कोई आरोप नहीं था कि मौत की सजा पाने वाले दोषी के सुधार की कोई संभावना नहीं थी, जो एक वैकल्पिक दृष्टिकोण बनाता है जो मृत्युदंड को मान्य नहीं करेगा.

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