- इजरायली राजदूत ने कहा कि साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमला ईरान की क्षमताओं को कमजोर करने के लिए किया गया था
- ईरान ने जवाबी हमला किया, लेकिन उसने अपने तथाकथित दोस्तों को निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय संकट खड़ा किया
- इजरायल का मानना है कि ईरान दशकों से उनके लिए अस्तित्वगत खतरा बना हुआ है, इसलिए इसे कमजोर करना जरूरी था
ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र को हमले के लिए क्यों चुना गया? ये सवाल अमेरिका सहित दुनिया के सभी देश इजरायल से पूछ रहे हैं, एनडीटीवी ने ये सवाल सीधे भारत में इजरायली राजदूत रूवेन अजार से पूछा लिया. इस पर राजदूत ने कहा कि साफ किया ये टारगेट उन कई टारगेट्स में से एक था, जिन पर इजरायल ने हमला किया और इसका सिर्फ और सिर्फ मकसद ईरान की क्षमताओं को कमजोर करना था.

इजरायली राजदूत रूवेन अजार कहा कि साउथ पार्स पर सिर्फ अकेले हमला नहीं किया गया था, दुर्भाग्य से, ईरानियों ने काफी आपराधिक तरीके से जवाबी हमला करने का फैसला किया. वे अपने तथाकथित दोस्तों पर हमला कर रहे हैं. वे एक अंतरराष्ट्रीय संकट पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वे जानते हैं कि यह हमला उनके ऊपर उनके तथाकथित दोस्तों ने नहीं किया. ईरान पर हमला हुआ, क्योंकि वे ही हैं, जो दशकों से इजरायल पर हमला करते आ रहे हैं. कुछ ऐसे लोग हैं, जो हमारे देश के लिए अस्तित्वगत खतरे पैदा कर रहे हैं और हम ऐसी स्थिति में होना चाहते हैं, जिसमें वे इतने कमजोर हो जाएं कि वे फिर कभी इजरायल के लिए खतरा न बन सकें. अभी, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ हमारा इस मसले पर जो गैप हुआ है, वह बहुत मामूली है. मुझे लगता है कि यह एक अपवाद है.
अमेरिका क्या हो गया नाराज
रूवेन अजार ने कहा कि इसे गैप इसलिए कहूंगा क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से एक ऐसी प्रतिक्रिया आई है, जिसकी हमें उम्मीद नहीं थी. तो अंततः, मुझे लगता है कि यह एक छोटा सा गैप है, जिसे हम दूर कर सकेंगे. हम संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ तालमेल बनाए हुए हैं. मुझे लगता है कि व्यापक परिप्रेक्ष्य में हम इस अभियान के उद्देश्यों पर सहमत हैं, जो उन बातों पर केंद्रित हैं, जिनका मैंने पहले उल्लेख किया है: बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम दोनों को समाप्त करना और साथ ही, ईरानी लोगों को अपना भविष्य अपनाने का मौका देना. दमनकारी ताकतों, उन ठिकानों और बलों पर प्रहार करके, जिन्होंने कुछ ही सप्ताह पहले हजारों ईरानी नागरिकों की हत्या की थी.
एनडीटीवी ने राजदूत से पूछा कि आप इसे गैप बता रहे हैं, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक ट्वीट किया है, जिसने सभी को चौंका दिया है. उनका कहना है कि अमेरिका को इस हमले के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उन्होंने संदर्भ भी दिया है. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में जो हो रहा है, उसी वजह से इजरायल ने इस टारगेट को चुना. क्या यह किसी बड़े मतभेद का संकेत नहीं देता है, न कि आपके कहे अनुसार एक गैप का?
राजदूत ने कहा कि आप जानते ही हैं, लोग हमेशा, खासकर इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच खाई तलाशते रहते हैं लेकिन मुझे लगता है कि लोग इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं. जैसा कि मैंने आपको बताया, इस अभियान में हमारे साझा लक्ष्य हैं. हम इस टकराव के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति और संपूर्ण अमेरिकी सैन्य तंत्र और शीर्ष अधिकारियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे.
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