सुप्रीम कोर्ट ने 'थर्ड पार्टी' बीमा कवर को लेकर एक अहम फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की अवधि को भी बढ़ा दिया है. अब टू-व्हीलर खरीदते समय 6 साल और फोर-व्हीलर का 4 साल का थर्ड पार्टी बीमा लेना जरूरी होगा. अभी तक टू-व्हीलर का 5 साल और फोर-व्हीलर का 3 साल का थर्ड पार्टी बीमा होता था. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कानून होने के बावजूद थर्ड पार्टी बीमा नहीं लिया जा रहा है. बेंच ने कहा कि 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार सड़कों पर चल रही लगभग 56% गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के हैं.
अदालत ने केंद्र सरकार से कहा है कि बीमा न होने पर पेट्रोल न देने पर विचार करे. कोर्ट ने कहा कि पेट्रोल-डीजल न देने से दोहरे लाभ होंगे. पहला तो ये कि इससे बिना बीमा वाली गाड़ियों की पहचान करने में मदद मिलेगी और दूसरा कि लोगों को बीमा कराने के लिए भी प्रेरित किया जा सकेगा.
लेकिन पता कैसे चलेगा कि बीमा नहीं है?
लेकिन सवाल ये है कि कैसे पता चलेगा कि किस गाड़ी का बीमा है और किसका नहीं? तो इसका जवाब है- ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 146 के तहत बीमा करवाना जरूरी है. कोर्ट ने कहा कि जमीनी स्तर पर इसके पालन के लिए ANPR कैमरों का उपयोग किया जा सकता है.
अदालत ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDA) और सड़क-परिवहन मंत्रालय को निर्देश दिया कि वे कुछ राज्यों में इंश्योरेंस इन्फोर्मेशन ब्यूरो (IIB) और 'VAHAN' पोर्टल के आंकड़ों से जुड़े ANPR कैमरे लगाएं, ताकि बिना बीमा वाली गाड़ियों के ई-चालान जारी किए जा सकें.

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ये ANPR कैमरा क्या है?
ANPR लाइसेंस प्लेट यानी नंबर प्लेट पढ़ने वाला एक स्मार्ट सिस्टम है. इसे आसान शब्दों में 'स्मार्ट कैमरा तकनीक' भी कहा जा सकता है, क्योंकि ये नंबर प्लेट को देखते ही उस गाड़ी की पूरी कुंडली निकाल लेता है.
ये एक तरह से 'डिजिटल जासूस' की तरह काम करता है. ये किसी भी गाड़ी की नंबर प्लेट देखने में ज्यादा तेज और सटीक है. इसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कारें कितनी तेजी से चल रही हैं या मौसम कैसा है. तेज धूप हो या बारिश, ANPR हर हाल में अपना काम करता रहता है. इनका काम सड़क से गुजरने वाली हर गाड़ी की तस्वीरें लेना है और ये खासतौर से उनकी नंबर प्लेट पर ध्यान देते हैं.
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ये कैमरा काम कैसे करता है?
हर ANPR कैमरे के अंदर एक छोटा कंप्यूटर काम करता है. यह कंप्यूटर कैमरे से मिलने वाले लाइव फीड को प्रोसेस करता है और उसे ANPR सॉफ्टवेयर को भेजता है. यह सॉफ्टवेयर इस पूरे सिस्टम के दिमाग की तरह काम करता है और एक कमाल का काम करता है. यह नंबर प्लेट की तस्वीर को पढ़ने लायक टेक्स्ट में बदल देता है और उसमें से नंबर और अक्षरों को अलग कर लेता है.
अब, इस टेक्स्ट को ANPR सॉफ्टवेयर एक डेटाबेस से मिलाता है और पहले से मौजूद डेटा से मैच ढूंढता है, जैसे कि चोरी हुई गाड़ियों की नंबर प्लेट या ऐसी गाड़ियां जिन पर पुलिस या कानून लागू करने वाली एजेंसियों की नजर है. जब कोई मैच मिलता है, तो सिस्टम अलर्ट भेज सकता है और अधिकारियों को स्थिति के बारे में बता सकता है.
डेटाबेस असल में सरकारी डेटाबेस होता है, जैसे- VAHAN पोर्टल या पुलिस रिकॉर्ड. इस डेटा से ANPR नंबर प्लेट को मैच करता है. मात्र कुछ सेकंड में ही गाड़ी के मालिक का नाम, चालान की हिस्ट्री, इंश्योरेंस की जानकारी जैसी सारी जानकारी पता चल जाती है.
ANPR टेक्नोलॉजी, जिसमें खास हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का मेल होता है, सुरक्षा और अपराध रोकने से लेकर पार्किंग मैनेजमेंट तक कई कामों में अहम भूमिका निभाती है.

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कितना तेज होता है ANPR कैमरा?
ANPR नंबर प्लेट की जानकारी बहुत तेजी से कैप्चर करता है. इसकी काम करने की रफ्तार एक बड़ा फायदा है. ANPR कैमरे कुछ ही मिलीसेकंड में लाइसेंस प्लेट की जानकारी कैप्चर और प्रोसेस कर सकते हैं.
यह तेज रफ्तार तब बहुत जरूरी होती है जब गाड़ियां तेजी से चल रही हों, जैसे हाईवे या टोल बूथ पर. यह टेक्नोलॉजी तेज रफ्तार से गुजरती गाड़ियों की लाइसेंस प्लेट भी पढ़ सकती है, जिससे सही और समय पर डेटा मिल जाता है. नंबर प्लेट की जानकारी तेजी से कैप्चर करने की क्षमता एक अहम फीचर है जो ANPR को कई तरह के इस्तेमाल के लिए उपयोगी बनाता है.
कहां-कहां इस्तेमाल होते हैं ये कैमरे?
शुरुआत में ANPR कैमरों का इस्तेमाल सिर्फ मेट्रो सिटीज में होता था. लेकिन 2015 के बाद से इनका इस्तेमाल लगभग हर शहर में हो रहा है. हाईवे, एक्सप्रेसवे और शहर की सड़कों पर बड़े पैमाने पर ANPR कैमरे लगाए गए हैं. इन्हीं कैमरों की मदद से सड़क पर ट्रैफिक नियम तोड़ने पर ई-चालान आ जाता है.
सरकार बिना बैरियर वाले टोल प्लाजा पर भी काम कर रही है. इसके तहत कुछ हाईवे और एक्सप्रेसवे पर भी ANPR कैमरे लगाए गए हैं. ये कैमरे किसी गाड़ी की एंट्री और एग्जिट का रिकॉर्ड रखते हैं और उसके आधार पर यूजर फीस FasTag से काट ली जाती है.
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