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पॉल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं मिला तो कोर्ट पहुंचा कार मालिक, CJI बोले- प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई का समर्थन करो

PUCC नहीं होने की वजह से दिल्ली सरकार के नियमों के तहत पेट्रोल पंपों ने वाहन मालिकों को फ्यूल देना बंद कर दिया है.

पॉल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं मिला तो कोर्ट पहुंचा कार मालिक, CJI बोले- प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई का समर्थन करो
पिछले साल कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से बचने के लिए खास श्रेणी के वाहनों पर बैन लगाया था. (File Photo)
नई दिल्ली:

दिल्ली-एनसीआर में बीएस-IV स्टैंडर्ड वाले 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के सड़क पर चलने पर बैन का मुद्दा एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट में दस साल पुरानी वोल्वो कार का मुद्दा उठाया गया. सीनियर एडवोकेट राकेश खन्ना ने अर्जी पर सुनवाई की मांग की तो मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट इस मामले की सुनवाई के लिए तारीख तय करेगी.  इसके साथ ही, सीजेआई ने यह भी कहा कि यह एक बड़े उद्देश्य के लिए है, प्रदूषण कम करने के लिए. हम आपकी बात सुनेंगे, लेकिन हमारा मानना है कि आपको इस मकसद का समर्थन करना चाहिए.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, वाई.एन. भारद्वाज ने कोर्ट में आवेदन देकर कहा है कि उनके बेटे की बीएस-IV (BS-IV) डीजल वोल्वो XC-60 का पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) को रिन्यू नहीं किया जा रहा है. PUCC की वैधता 25 फरवरी को खत्म हो गई थी लेकिन PUCC केंद्रों ने यह कहते हुए नया प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार कर दिया कि वाहन 15 साल से ज्यादा पुराना हो चुका है.

PUCC नहीं होने की वजह से दिल्ली सरकार के नियमों के तहत पेट्रोल पंपों ने भी वाहन में ईंधन देना बंद कर दिया, जिससे कार का उपयोग पूरी तरह नामुमकिन हो गया. 

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सीनियर एडवोकेट राकेश खन्ना ने अदालत को बताया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए आदेश के विपरीत है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले अपने आदेश में संशोधन करते हुए कहा गया था कि बीएस-IV और उससे नए उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों के खिलाफ केवल इस आधार पर कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी कि वे डीजल होने पर 10 वर्ष या पेट्रोल होने पर 15 वर्ष से ज्यादा पुराने हैं.

कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त और दिसंबर में दिए गए दो अलग-अलग आदेशों के जरिए अपने अक्टूबर 2018 के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें पेट्रोल और डीजल वाहनों पर उनकी उम्र के आधार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था.

कोर्ट ने अपने संशोधित आदेशों में स्पष्ट किया था कि बीएस-IV और उससे नए उत्सर्जन मानकों वाले 10 साल पुराने डीजल, 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी. यानी ऐसे वाहनों को सड़क पर चलने से नहीं रोका जाएगा. 

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