गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड़ के निर्देश पर चलाए जा रहे ऑपरेशन प्रहार के तहत क्राइम ब्रांच और स्वाट टीम ने नशे के कारोबार से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने विजयनगर क्षेत्र से कौस्तुभ मिश्रा उर्फ कार्तिक को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार उसके कब्जे से महंगा इंपोर्टेड ओजी गांजा और करीब दो ग्राम कोकीन बरामद हुई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है.
पूर्व आईएएस अधिकारी का पोता निकला आरोपी
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी कौस्तुभ मिश्रा बिहार का रहने वाला है और वह एक पूर्व आईएएस अधिकारी बीएन मिश्रा का पोता बताया जा रहा है. साथ ही इनके पिता राहुल मिश्रा है पटना हाई कोर्ट में एडवोकेट है. कार्तिक ने ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी से बीटेक और एमबीए की पढ़ाई की थी. पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने क्लाउड किचन से जुड़ा कारोबार शुरू किया, लेकिन बाद में गलत संगति में पड़कर मादक पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़ गया.
सोशल मीडिया और ऑनलाइन ऑर्डर से चलता था धंधा
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने ऑनलाइन माध्यम से ड्रग्स सप्लाई का पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया था. वह सोशल मीडिया, मोबाइल नंबर और अन्य डिजिटल माध्यमों से ग्राहकों के संपर्क में रहता था. ऑर्डर मिलने पर भुगतान यूपीआई के जरिए लिया जाता था और नशे की खेप ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए पोर्टर जैसे डिलीवरी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था.

महिला पुलिस अधिकारी ने कार्रवाई की है.
कॉलेज छात्रों को बनाया गया निशाना
पुलिस को जानकारी मिली है कि यह नेटवर्क गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली-एनसीआर तक फैला हुआ था. खास तौर पर इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ने वाले युवाओं तक ओजी गांजा, मैंगो गांजा, शिलांग गांजा, कोकीन, एमडीएमए, चरस और स्मैक जैसे मादक पदार्थ पहुंचाए जा रहे थे. इससे बड़ी संख्या में युवा इस नेटवर्क की गिरफ्त में आ सकते थे.
कई राज्यों से मंगाई जाती थी खेप
पूछताछ में कौस्तुभ ने स्वीकार किया कि वह बिहार से विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थ लाकर अपने साथियों के साथ एनसीआर में बेचता था. पुलिस के अनुसार इस गिरोह में शिवम मिश्रा, दीपक, सूरज, अभिषेक, तनिष्क, इमरान, बोबी समेत कई लोग शामिल हैं. सभी मिलकर ऑनलाइन ऑर्डर लेते थे और फिर तय स्थानों पर सप्लाई कराते थे.
पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं गिरोह के सदस्य
कौस्तुभ ने पुलिस को बताया कि उसके कई साथी पहले ही अलग-अलग मामलों में गाजियाबाद और नोएडा पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं. इन गिरफ्तारियों से नेटवर्क को आर्थिक नुकसान हुआ था और बड़ी संख्या में ऑर्डर लंबित थे. इन्हीं ऑर्डरों की डिलीवरी के लिए वह दोबारा बिहार से माल लेकर एनसीआर पहुंचा था.
नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने में जुटी पुलिस
पुलिस का कहना है कि यह केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं बल्कि एक संगठित ड्रग्स सिंडिकेट का खुलासा है. अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान, वित्तीय लेनदेन और सप्लाई चैन की गहराई से जांच की जा रही है. पुलिस को उम्मीद है कि आगे की कार्रवाई में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
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