नई दिल्ली:
राष्ट्रपति चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का नहीं, मतपत्रों का उपयोग होगा क्योंकि यही एक ऐसा चुनाव है, जिसमें प्रत्येक निर्वाचक को अपनी पहली और दूसरी प्राथमिकता दर्ज करनी होती है।
राष्ट्रपति चुनाव में उपयोग किए जाने वाले मतपत्र में कोई चुनाव चिह्न् नहीं होता। केवल दो कॉलम होते हैं, पहले कॉलम में उम्मीदवारों के नाम होते हैं और दूसरा कॉलम खाली रहता है, जिसमें निर्वाचक को अपनी प्राथमिकताएं लिखनी होती है।
दूसरे चुनावों में मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार के लिए केवल एक वोट डालता है मगर राष्ट्रपति चुनाव में निर्वाचक को अपनी प्राथमिकता बताने के लिए उम्मीदवारों के नाम के आगे 1 या 2 लिखना होता है।
राष्ट्रपति चुनाव में मतदान और परिणाम की घोषणा के बीच चार दिन का फासला रखना पड़ता है। इसलिए कि मतपेटियों को विभिन्न राज्यों से दिल्ली लाया जाता है। राज्यों में विधानसभा के सदस्य मतदान करते हैं।
ज्ञात हो कि राष्ट्रपति चुनाव गुरुवार को होगा और मतगणना रविवार को होगी। संसद सदस्य या तो दिल्ली में मतदान कर सकते हैं या उस राज्य की विधानसभा में, जहां से वे निर्वाचित हुए हैं। इसके लिए लेकिन उन्हें पूर्वानुमति लेनी पड़ती है।
पहले दौर की मतगणना में केवल पहली प्राथमिकता वाले मतों की गिनती होती है। जो उम्मीदवार 50 फीसदी से अधिक मत हासिल कर लेता है, उसे विजयी घोषित किया जाता है।
पहले दौर की मतगणना से यदि स्पष्ट नहीं हो पाता कि विजेता कौन है, तब दूसरे दौर में दूसरी प्राथमिकता वाले मतों की गिनती होती है और दोनों दौर के मतों को जोड़कर विजेता की घोषणा की जाती है।
राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने का अधिकार उन्हें प्राप्त है जो लोकसभा, राज्यसभा या राज्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्य हैं। मनोनीत सदस्यों को राष्ट्रपति चुनने का हक नहीं होता।
राष्ट्रपति चुनने वालों की कुल संख्या 4,896 है, जिनमें 776 सांसद और 4,120 विधायक शामिल हैं। इन सभी के मत 10,97,000 मतों के बराबर हैं।
राष्ट्रपति चुनाव में उपयोग किए जाने वाले मतपत्र में कोई चुनाव चिह्न् नहीं होता। केवल दो कॉलम होते हैं, पहले कॉलम में उम्मीदवारों के नाम होते हैं और दूसरा कॉलम खाली रहता है, जिसमें निर्वाचक को अपनी प्राथमिकताएं लिखनी होती है।
दूसरे चुनावों में मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार के लिए केवल एक वोट डालता है मगर राष्ट्रपति चुनाव में निर्वाचक को अपनी प्राथमिकता बताने के लिए उम्मीदवारों के नाम के आगे 1 या 2 लिखना होता है।
राष्ट्रपति चुनाव में मतदान और परिणाम की घोषणा के बीच चार दिन का फासला रखना पड़ता है। इसलिए कि मतपेटियों को विभिन्न राज्यों से दिल्ली लाया जाता है। राज्यों में विधानसभा के सदस्य मतदान करते हैं।
ज्ञात हो कि राष्ट्रपति चुनाव गुरुवार को होगा और मतगणना रविवार को होगी। संसद सदस्य या तो दिल्ली में मतदान कर सकते हैं या उस राज्य की विधानसभा में, जहां से वे निर्वाचित हुए हैं। इसके लिए लेकिन उन्हें पूर्वानुमति लेनी पड़ती है।
पहले दौर की मतगणना में केवल पहली प्राथमिकता वाले मतों की गिनती होती है। जो उम्मीदवार 50 फीसदी से अधिक मत हासिल कर लेता है, उसे विजयी घोषित किया जाता है।
पहले दौर की मतगणना से यदि स्पष्ट नहीं हो पाता कि विजेता कौन है, तब दूसरे दौर में दूसरी प्राथमिकता वाले मतों की गिनती होती है और दोनों दौर के मतों को जोड़कर विजेता की घोषणा की जाती है।
राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने का अधिकार उन्हें प्राप्त है जो लोकसभा, राज्यसभा या राज्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्य हैं। मनोनीत सदस्यों को राष्ट्रपति चुनने का हक नहीं होता।
राष्ट्रपति चुनने वालों की कुल संख्या 4,896 है, जिनमें 776 सांसद और 4,120 विधायक शामिल हैं। इन सभी के मत 10,97,000 मतों के बराबर हैं।
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