Neemuch Mandi: मध्यप्रदेश का नीमच जिला केवल अफीम उत्पादन या मसाला फसलों के लिए ही नहीं, बल्कि देश की अनोखी हर्बल मंडी के लिए भी जाना जाता है. यह ऐसी मंडी है जहां केवल अनाज या सब्जियां ही नहीं, बल्कि औषधीय पौधों के फूल, पत्तियां, जड़ें, छाल, बीज, कांटे और छिलके तक खरीदे-बेचे जाते हैं. किसानों के लिए यह मंडी किसी वरदान से कम नहीं मानी जाती, क्योंकि यहां औषधीय फसलों के ₹500 से लेकर ₹2 लाख प्रति क्विंटल तक भाव मिल जाते हैं. नतीजा यह है कि अब सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों के किसान अपनी उपज लेकर नीमच पहुंच रहे हैं.
देश की इकलौती पहचान बनी नीमच हर्बल मंडी
नीमच की हर्बल मंडी को देश की सबसे विशेष कृषि मंडियों में गिना जाता है. यहां औषधीय और मसाला फसलों की बड़ी मात्रा में खरीद-फरोख्त होती है. मंडी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पौधों के लगभग हर हिस्से की बिक्री होती है. फूल, पत्ती, जड़, छाल, बीज, कांटे और छिलकों तक के खरीदार आसानी से मिल जाते हैं. यही वजह है कि जड़ी-बूटी की खेती करने वाले किसानों के लिए यह मंडी सबसे भरोसेमंद बाजार बन चुकी है.

Neemuch Mandi: नीमच मंडी में किसान अपनी उपज के साथ
40 से 50 प्रकार की औषधीय फसलों की नीलामी
मुख्य मंडी परिसर में 16 बड़े शेड हैं, जहां नियमित रूप से औषधीय और मसाला फसलों की नीलामी होती है. यहां इसबगोल, अश्वगंधा, अकरकरा, चियासीड, किनोवा, तुलसी बीज, सर्पगंधा, सफेद मूसली, कलौंजी, सतावरी और चिरायता जैसी दर्जनों फसलों की खुली बोली लगती है. फसल की गुणवत्ता के अनुसार किसानों को कई बार प्रति क्विंटल लाखों रुपये तक का मूल्य भी मिल जाता है.
दूसरे राज्यों के किसान भी पहुंच रहे हैं
नीमच मंडी की पहचान अब केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रही. गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान भी अपनी औषधीय फसलें लेकर यहां पहुंच रहे हैं. किसानों का कहना है कि यहां अच्छी तुलाई, पारदर्शी नीलामी और समय पर भुगतान मिलता है, जिससे उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती.

Neemuch Mandi Bhav: नीमच मंडी में मिलते हैं अच्छे दाम
किसानों को मिल रहा बेहतर लाभ
नीमच के किसान नीलेश पाटीदार बताते हैं कि वे पिछले कुछ वर्षों से मसाला और औषधीय फसलों की खेती कर रहे हैं. उनके अनुसार इसबगोल, इरानी अकरकरा, तुलसी बीज, किनोवा और चियासीड जैसी फसलों के बेहतरीन दाम मिल रहे हैं. उनका मानना है कि यदि किसानों को जड़ी-बूटी की खेती का बेहतर प्रशिक्षण मिले तो आय और अधिक बढ़ सकती है. रतलाम जिले के किसान प्रहलाद सिंह और पंचम सिंह का भी कहना है कि मंडी में समय पर नीलामी और तत्काल भुगतान के कारण उनकी आय में सुधार हुआ है.
रिकॉर्ड आवक और बेहतर सुविधाएं
मंडी सचिव उमेश बसेडिया शर्मा के अनुसार मंडी में किसानों की सुविधा को लगातार बढ़ाया जा रहा है. वर्ष 2024-25 में मंडी में 64.16 लाख क्विंटल उपज की आवक हुई थी, जबकि 2025-26 में यह बढ़कर 72.40 लाख क्विंटल तक पहुंच गई. करीब 1100 लाइसेंस प्राप्त व्यापारी और 150 से अधिक तुलावटी इस मंडी से जुड़े हुए हैं.

Neemuch Mandi Bhav: नीमच मंडी की तस्वीर
आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित मंडी
करीब 10.9 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इस मंडी में इलेक्ट्रॉनिक तौल व्यवस्था, सुगम नीलामी प्रक्रिया और सीधे व्यापारियों के गोदाम तक माल पहुंचाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड द्वारा भी अधोसंरचना विकास के लिए करोड़ों रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है.
औषधीय खेती को दे रही नई पहचान
विशेषज्ञों का मानना है कि नीमच हर्बल मंडी ने किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर औषधीय और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर प्रेरित किया है. इससे किसानों की आय बढ़ रही है और औषधीय कृषि को नए बाजार भी मिल रहे हैं.
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