बिहार में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा कदम उठाया है. शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास एक अणे मार्ग पर आयोजित NDA समन्वय समिति की पहली बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. बैठक का सबसे अहम निर्णय यह रहा कि राज्य सरकार के मंत्री अब नियमित रूप से गांवों का दौरा करेंगे और वहीं रात्रि प्रवास भी करेंगे. उन्हें सीधे आम लोगों, खासकर बुजुर्गों और दिव्यांगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुननी होंगी. सम्राट चौधरी ने साफ संकेत दिया कि सरकार को जनता के और करीब ले जाने के लिए अब जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाई जाएगी.
पहली NDA समन्वय समिति बैठक में बड़े फैसले
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई NDA समन्वय समिति की पहली बैठक करीब दो घंटे तक चली. बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के वरिष्ठ नेता शामिल हुए. बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकार और सहयोगी दलों के संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा जनता की शिकायतों का तेजी से समाधान सुनिश्चित करना था.

Bihar Politics: बैठक में निर्देश देते हुए सीएम सम्राट चौधरी
मंत्रियों को दी गई नई जिम्मेदारी
बैठक में तय किया गया कि राज्य सरकार के सभी मंत्री नियमित रूप से गांवों का दौरा करेंगे. सिर्फ दौरा ही नहीं, बल्कि उन्हें गांवों में रात्रि प्रवास भी करना होगा. इस दौरान मंत्री स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं को समझेंगे. विशेष रूप से बुजुर्गों, दिव्यांगों और जरूरतमंद लोगों से मिलकर उनकी शिकायतों और जरूरतों की जानकारी लेने पर जोर दिया गया है. सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा और समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा.
हर तीन महीने में होगी जिला स्तर की समीक्षा
बैठक में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अब हर तीन महीने में NDA के सभी घटक दलों के जिला अध्यक्षों के साथ बैठक करेंगे. इन बैठकों में विकास कार्यों, स्थानीय समस्याओं और जनता से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की जाएगी. यदि किसी जिले में कोई गंभीर शिकायत सामने आती है, तो जिला अध्यक्ष सीधे सरकार को इसकी जानकारी देंगे और संबंधित विभागों को कार्रवाई करनी होगी.

Bihar Politics: बैठक में नीतीश कुमार भी थे मौजूद
मंत्री और जिला अध्यक्षों के बीच रहेगा सीधा संपर्क
NDA नेतृत्व ने यह भी तय किया कि किसी भी जिले के दौरे पर जाने वाले मंत्री वहां संबंधित जिला अध्यक्षों के साथ बैठक अवश्य करेंगे. इन बैठकों में स्थानीय विकास योजनाओं, प्रशासनिक समस्याओं और जनता की अपेक्षाओं पर चर्चा होगी. इस व्यवस्था का उद्देश्य संगठन और सरकार के बीच लगातार संवाद बनाए रखना है.
तालमेल बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रभारी मंत्रियों को
बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि NDA के घटक दलों के बीच किसी प्रकार का मतभेद या समन्वय की कमी नहीं होनी चाहिए. इसके लिए हर जिले के प्रभारी मंत्री को विशेष जिम्मेदारी दी गई है. उन्हें सभी सहयोगी दलों के नेताओं के साथ मिलकर काम करना होगा और किसी भी मतभेद को समय रहते सुलझाना होगा.
नीतीश कुमार ने दिया एकजुटता का संदेश
बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिलकर काम करने की अपील की. उन्होंने कहा कि बिहार को पिछड़े हालात से बाहर निकालने में वर्षों की मेहनत लगी है और विकास की रफ्तार बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है. नीतीश कुमार ने नेताओं से जनता के बीच जाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाने को कहा.
राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा फैसला
इस बैठक को सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई यह पहली NDA समन्वय समिति बैठक थी. बैठक में साफ संदेश दिया गया कि सरकार और संगठन साथ मिलकर काम करेंगे. गांवों में रात्रि प्रवास, लोगों से सीधी मुलाकात, जिला स्तर पर नियमित बैठकें और शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई जैसे फैसलों के जरिए एनडीए ने जनता से अपना संपर्क और मजबूत करने की रणनीति बनाई है.
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