Transformer Success Story: तेजी से बदलती तकनीक के दौर में जहां अधिकांश विद्युत उपकरण कुछ दशकों बाद बदल दिए जाते हैं, वहीं मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के सारंगपुर स्थित एक ट्रांसफार्मर ने अपनी अनोखी कार्यक्षमता से सबको चौंका दिया है. वर्ष 1976 में स्थापित यह 20 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर पिछले 50 वर्षों से लगातार बिजली आपूर्ति कर रहा है. खास बात यह है कि किसी पावर ट्रांसफार्मर की सामान्य उपयोगी आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है, लेकिन यह उपकरण उससे दोगुनी अवधि पूरी कर चुका है. यह केवल एक मशीन नहीं, बल्कि स्वदेशी तकनीक, उत्कृष्ट इंजीनियरिंग और दशकों से किए गए समर्पित रखरखाव की ऐसी सफलता की कहानी है, जो आज पूरे ऊर्जा क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है.
आधी सदी से ऊर्जा का भरोसेमंद साथी
मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के सारंगपुर सब-स्टेशन में स्थापित यह ट्रांसफार्मर पहली बार वर्ष 1976 में ऊर्जीकृत किया गया था. उस समय मालवा क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां विस्तार के दौर में थीं और बिजली की मांग लगातार बढ़ रही थी. ऐसे समय में स्थापित यह ट्रांसफार्मर आज भी उसी भरोसे के साथ कृषि, घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने का काम कर रहा है. पांच दशकों में इसने मौसम, तकनीक और बिजली नेटवर्क के अनेक बदलाव देखे, लेकिन इसकी कार्यक्षमता पर इसका खास असर नहीं पड़ा.

Transformer Success Story: ये भी पुराने ट्रांसफार्मर में शामिल
जब 25 साल की मशीन ने पूरे किए 50 साल
विद्युत क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार किसी बड़े पावर ट्रांसफार्मर की सामान्य सेवा अवधि लगभग 25 वर्ष मानी जाती है. ऐसे में सारंगपुर का यह ट्रांसफार्मर अपनी तय उम्र से दोगुना जीवन पूरा कर चुका है. लगातार 50 वर्षों तक सफल संचालन अपने आप में एक दुर्लभ उपलब्धि मानी जा रही है. ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल मजबूत निर्माण के कारण नहीं, बल्कि वर्षों तक अपनाई गई अनुशासित रखरखाव प्रणाली का भी परिणाम है.
स्वदेशी तकनीक की ताकत का प्रतीक
इस ट्रांसफार्मर का निर्माण एनजीईएफ (न्यू गवर्नमेंट इलेक्ट्रिकल फैक्ट्री) ने किया था. कर्नाटक सरकार द्वारा 1956 में स्थापित यह प्रतिष्ठित सरकारी उपक्रम कभी देश के प्रमुख विद्युत उपकरण निर्माताओं में शामिल था. जर्मनी की एईजी कंपनी के तकनीकी सहयोग से शुरू हुए इस संस्थान ने देशभर में बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मरों की आपूर्ति की. हालांकि वर्ष 2002 में यह कंपनी बंद हो गई, लेकिन उसके बनाए उपकरण आज भी अपनी गुणवत्ता का प्रमाण दे रहे हैं.
रखरखाव बना लंबी उम्र का राज
एमपी ट्रांसको के अधिकारियों के अनुसार इस ट्रांसफार्मर की लंबी उम्र के पीछे नियमित परीक्षण, समयबद्ध मेंटेनेंस और संतुलित लोड प्रबंधन सबसे बड़ी वजह है. दशकों तक अभियंताओं और तकनीकी कर्मचारियों ने इसकी लगातार निगरानी की. छोटी से छोटी तकनीकी खामी को समय रहते दूर किया गया. बाहरी फॉल्ट और नेटवर्क व्यवधानों को कम रखने के प्रयासों ने भी ट्रांसफार्मर पर पड़ने वाले दबाव को घटाया, जिससे इसकी विश्वसनीयता बरकरार रही.

Transformer Success Story: एमपी के ट्रांसफार्मर
ऊर्जा मंत्री ने बताया प्रेरणादायक उदाहरण
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस ट्रांसफार्मर को संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग का उदाहरण बताया है. उनका कहना है कि यह केवल लोहे, तांबे और तेल से बनी मशीन नहीं, बल्कि उन हजारों इंजीनियरों, तकनीशियनों और कर्मचारियों की मेहनत का प्रतीक है जिन्होंने पांच दशक तक इसे पूरी क्षमता के साथ चलाए रखा.
आज भी सक्रिय हैं एनजीईएफ के 20 ट्रांसफार्मर
दिलचस्प बात यह है कि एमपी ट्रांसको नेटवर्क में आज भी एनजीईएफ द्वारा निर्मित 20 ट्रांसफार्मर काम कर रहे हैं. इनमें 1 ट्रांसफार्मर 160 एमवीए क्षमता का है. 5 ट्रांसफार्मर 40 एमवीए क्षमता के हैं और 14 ट्रांसफार्मर 20 एमवीए क्षमता के हैं. इनमें से कई ट्रांसफार्मर 30 से 50 वर्ष तक की सेवा पूरी कर चुके हैं और अभी भी प्रदेश की बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाए हुए हैं.
मालवा की ऊर्जा यात्रा का सुनहरा अध्याय
सारंगपुर का यह ट्रांसफार्मर केवल बिजली आपूर्ति का उपकरण नहीं, बल्कि मालवा क्षेत्र के विकास की कहानी का हिस्सा बन चुका है. इसने औद्योगिक विस्तार, कृषि विकास और लाखों उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. यह साबित करता है कि बेहतर तकनीक और समर्पित रखरखाव के बल पर किसी संसाधन की उपयोगिता को कई दशकों तक बनाए रखा जा सकता है.
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