- अस्पताल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई और पुलिस ने हर प्रवेश द्वार और गलियारों पर कड़ा पहरा रखा था
- अस्पताल के अंदर सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ा दी गई थी जिससे वार्ड का माहौल तनावपूर्ण और प्रतिबंधित हो गया था
- सोनम वांगचुक के साथ डॉक्टर्स की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही थी और कई मेडिकल टेस्ट किए गए थे
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल का माहौल उस समय बदल गया जब सोनम वांगचुक को वहां लाया गया. आम तौर पर रहने वाली मेडिकल आपाधापी की जगह अस्पताल एक हाई-सिक्योरिटी वाले किले जैसा लगने लगा. जाने-माने वैज्ञानिक और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर 21 दिनों की लंबी और कठिन भूख हड़ताल पर थे, लेकिन तबीयत बिगड़ने के कारण दिल्ली पुलिस ने उन्हें अचानक इमरजेंसी आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया.

NDTV टीम के अस्पताल में घुसते ही ऐसा लगा मानो किसी प्रतिबंधित इलाके में आ गए हों. हवा में तनाव महसूस हो रहा था. हर प्रवेश द्वार, कॉरिडोर और निकास द्वार पर दिल्ली पुलिस के जवानों का कड़ा पहरा था. गलियारों में लोहे के बैरिकेड्स लगे हुए थे, जिससे अस्पताल की आम आवाजाही बाधित हो रही थी. सुरक्षाकर्मी लगभग हर किसी को रोक रहे थे—विजिटर्स, तीमारदारों और यहां तक कि मरीजों से भी पूछताछ करने के बाद ही उन्हें आगे जाने दे रहे थे.
इमरजेंसी वार्ड के अंदर
जब तक एनडीटीवी टीम इमरजेंसी वार्ड के अंदर पहुंची, वहां सुरक्षा बल दोगुने हो चुके थे. अफसर कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे और उनकी नजरें भीड़ पर टिकी थीं. इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती ने आम लोगों के लिए बने मेडिकल वार्ड को कड़ी निगरानी वाले इलाके में बदल दिया था. अस्पताल के स्टाफ, नर्स और दूसरे मरीजों के रिश्तेदार अपनी जगह पर ही रुक गए और उत्सुकता और घबराहट के मिले-जुले भाव के साथ इधर-उधर देखने लगे. गलियारों में फुसफुसाहट गूंज रही थी क्योंकि लोग यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि क्या हो रहा है. "अंदर कौन है? इतनी पुलिस क्यों है?" - हर किसी के चेहरे पर यही अनकहा सवाल था.
सुबह 7:30 बजे एक शांत लड़ाई
ठीक सुबह 7:30 बजे, सोनम वांगचुक को चुपचाप इमरजेंसी आइसोलेशन वार्ड में ले जाया गया. कड़ी सुरक्षा के बीच, अंदर की असलियत की एक झलक मिली. डॉक्टरों की एक समर्पित टीम पहले से ही उनके पास मौजूद थी और उनके कमजोर शरीर को स्थिर करने के लिए कई तरह के मेडिकल टेस्ट कर रही थी. ठीक उनके बगल में, पुलिस के भारी जूतों की आवाज और मेडिकल उपकरणों की हलचल के बीच उनकी पत्नी खड़ी थीं—उस बेरंग अस्पताल के कमरे में हिम्मत और सहारे का एक शांत, मजबूत स्तंभ.

जो इंसान पर्यावरण के लिए लड़ रहा था, उसे अब पुलिस सुरक्षा के घेरे में अपनी सेहत के लिए लड़ते देखना एक अजीब और गंभीर अनुभव था. जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल भले ही रोक दी गई हो, लेकिन सफदरजंग की कड़ी सुरक्षा वाली दीवारों के अंदर एक अलग, शांत लड़ाई अभी शुरू ही हुई थी. बाद में पत्रकारों से गीतांजलि ने कहा कि 20 जुलाई को संसद तक होने वाला मार्च तय कार्यक्रम के मुताबिक ही होगा, भले ही दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया हो. उन्होंने बताया कि वांगचुक की भूख हड़ताल जारी है.
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