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5 स्टार होटल से इंदिरा कैंटीन तक जांच दायरे में; कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री बोले- लोगों का स्वास्थ्य सबसे अहम

कर्नाटक में खाद्य सुरक्षा विभाग ने फाइव स्टार होटलों, रेस्तरां, पब और क्विक-कॉमर्स वेयरहाउसों में व्यापक जांच अभियान चलाया है. स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने NDTV से खास बातचीत इस पूरे मुद्दे पर विस्तार से क्या कुछ कहा जानिए.

5 स्टार होटल से इंदिरा कैंटीन तक जांच दायरे में; कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री बोले- लोगों का स्वास्थ्य सबसे अहम
कर्नाटक में फूड सेफ्टी अभियान; स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर बोले- लोगों का स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण
बेंगलुरु:

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में पिछले कुछ दिनों से खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है. कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम फाइव स्टार होटलों, प्रीमियम रेस्तरां, पब, क्विक-कॉमर्स वेयरहाउस और बड़े फूड सप्लाई नेटवर्क की लगातार जांच कर रही है. इन छापों के दौरान कई जगहों पर एक्सपायर्ड दूध, सड़ा हुआ मांस, फफूंद लगे फल और सब्जियां तथा अस्वच्छ भंडारण जैसी गंभीर खामियां सामने आई हैं. होस्कोटे स्थित एक जेप्टो वेयरहाउस में भी साफ-सफाई से जुड़े मुद्दे पाए गए. इसी बीच कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने NDTV से विशेष बातचीत में अभियान का उद्देश्य, जांच में सामने आए तथ्य और आगे की कार्रवाई के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी अभियान की वजह

यू.टी. खादर ने कहा कि यह अभियान लोगों की बदलती खानपान की आदतों और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए शुरू किया गया है. उन्होंने कहा, "एक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में जब हम स्थिति की समीक्षा करते हैं तो हमें कई तरह की बीमारियां दिखाई देती हैं. खानपान की आदतें एक बड़ी चिंता हैं. हमारा उद्देश्य स्वास्थ्य के आधार पर इस समस्या का समाधान करना और कर्नाटक को फिर से स्वस्थ बनाना है."

"हमने शुरुआत सबसे ऊपर से की"

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि विभाग ने सबसे पहले फाइव स्टार और प्रीमियम होटलों की जांच इसलिए शुरू की ताकि पूरे फूड इंडस्ट्री सेक्टर को स्पष्ट संदेश दिया जा सके. उन्होंने कहा, "हमने सोचा कि शुरुआत सबसे ऊपर से करनी चाहिए. इसलिए हम अच्छे कॉर्पोरेट होटलों और उन प्रतिष्ठानों तक पहुंचे जिन्हें प्रीमियम होटल माना जाता है." उन्होंने प्रोसेस्ड और लंबे समय तक स्टोर किए जाने वाले खाद्य पदार्थों पर भी सवाल उठाए. "अगर कोई बन एक या दो महीने तक सुरक्षित रह सकता है तो लोगों को यह पता होना चाहिए कि उसमें कौन से प्रिजर्वेटिव इस्तेमाल हो रहे हैं. अगर चिकन कई महीनों तक कोल्ड स्टोरेज में रखा जाता है तो उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि उसे किस तरह संरक्षित किया जा रहा है."

जांच में क्या मिला?

खादर ने कहा कि कुछ प्रतिष्ठित जगहों पर मिली गड़बड़ियां बेहद चिंताजनक थीं. उन्होंने बताया, "अधिकारियों को सड़ा हुआ मटन, एक्सपायर्ड चिकन, एक्सपायर्ड दूध और फफूंद लगे फल मिले." उन्होंने आरोप लगाया कि एक होटल में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला तेल बार-बार उपयोग किया जा रहा था. "तेल को कई बार दोबारा इस्तेमाल किया गया था. उसका रंग इतना काला हो चुका था कि शायद कोई सड़क किनारे का विक्रेता भी उस हालत का तेल इस्तेमाल न करे."

NDTV Exclusive Interview UT Khader: NDTV से बात करते हुए कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री

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"सजा देना मकसद नहीं, व्यवस्था सुधारना है"

स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं है. उन्होंने कहा, "हम उन्हें सजा नहीं देना चाहते. हमारी जिम्मेदारी यह पता लगाना है कि वे क्या गलत कर रहे हैं और यह सुनिश्चित करना है कि वे सफाई बनाए रखने और स्वस्थ भोजन देने के लिए बेहतर व्यवस्था विकसित करें."

"आपकी रसोई और स्टोर रूम दिखाइए"

कुछ संस्थानों ने यह दावा किया कि उनके यहां कोई एक्सपायर्ड या असुरक्षित खाद्य सामग्री नहीं मिली. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए खादर ने कहा कि सभी प्रतिष्ठानों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा. उन्होंने कहा, "यदि वे कहते हैं कि सब कुछ बिल्कुल ठीक है, तो लोगों को अपनी रसोई और स्टोर रूम दिखाइए. उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाइए." उन्होंने सुझाव दिया कि रेस्तरां चाहें तो स्क्रीन के माध्यम से ग्राहकों को रसोई की गतिविधियां भी दिखा सकते हैं. "उन्हें अपनी रसोई दिखानी चाहिए, अपना स्टोर रूम दिखाना चाहिए. यदि छिपाने जैसा कुछ नहीं है तो लोगों को भरोसा दिलाइए."

लेबलिंग में भी मिली गड़बड़ी

खादर ने एक पब में मिली कथित अनियमितता का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि "एक पब में अधिकारियों को चिकन का एक पैकेट मिला, जिसकी निर्माण तिथि अगले दिन की थी. उत्पाद पहले से मौजूद था लेकिन उसके पैकेट पर मैन्युफैक्चरिंग डेट कल की थी. इससे यह आशंका पैदा होती है कि स्टिकर बदला गया हो." उन्होंने कहा कि विभाग यह जांच करेगा कि जिम्मेदार कौन है और सामान कहां से आया था?

क्विक-कॉमर्स वेयरहाउस भी अब जांच के दायरे में

अभियान अब क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े वेयरहाउस तक पहुंच गया है. खादर ने कहा, "हमें जड़ तक जाना होगा, जहां से उत्पाद आते हैं. अगर स्रोत साफ होगा, तो ग्राहकों तक पहुंचने वाला खाद्य पदार्थ भी सुरक्षित होगा." जेप्टो और जोमैटो से जुड़े वेयरहाउसों में हुई जांच पर उन्होंने कहा, "हमारे अधिकारियों को कुछ गड़बड़ियां मिली हैं. लेबलिंग और स्वच्छता से जुड़े मुद्दे पाए गए हैं और नोटिस जारी किए गए हैं." हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि "मुझे होटल या वेयरहाउस की चिंता नहीं है. मुझे लोगों की चिंता है. लोगों का स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है."

इंदिरा कैंटीन भी जांच से बाहर नहीं

कर्नाटक सरकार की लोकप्रिय इंदिरा कैंटीन योजना की भी जांच की गई. खादर ने बताया कि "जब सरकार सारी सुविधाएं देती है, तब संचालन करने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी भी है कि वह सही भोजन उपलब्ध कराए. जहां भी कमियां मिलेंगी, सरकार उचित निर्णय लेगी."

अब हॉस्टल, पीजी और कैटरिंग कंपनियों की बारी

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अभियान केवल होटल और रेस्तरां तक सीमित नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि अब पेइंग गेस्ट (PG) आवास, सरकारी और निजी हॉस्टल तथा शादियों और अन्य आयोजनों के लिए भोजन तैयार करने वाली कैटरिंग कंपनियों की भी जांच होगी. "यदि हम लगातार निरीक्षण करते रहेंगे तो वे कम से कम एक प्रणाली के भीतर आएंगे. उस प्रणाली को मजबूत करना जरूरी है."

जुर्माना, बंदी और लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई

निरीक्षण के बाद कार्रवाई को लेकर खादर ने बताया, "जुर्माना लगाने, प्रतिष्ठान बंद कराने और लाइसेंस रद्द करने जैसे विकल्प हमारे पास हैं. फूड सेफ्टी एक्ट और कानूनी अधिकार हमारे पास मौजूद हैं." सरकार ने नियमों को आसान भाषा में समझाने के लिए एक विशेष एडवाइजरी भी जारी की है.

आम नागरिकों की भी होगी भागीदारी

खादर का मानना है कि सरकार हर दिन हर प्रतिष्ठान की जांच नहीं कर सकती. उन्होंने कहा, "हम कितनी बार छापेमारी कर सकते हैं? समाज के नागरिकों को भी आगे आना होगा." उन्होंने बताया कि सरकार तालुका स्तर पर निगरानी समूह बनाने पर विचार कर रही है. "लोगों में जागरूकता भी जरूरी है. लोगों को पता होना चाहिए कि वे क्या खा रहे हैं."

केंद्र से नियमों में बदलाव की मांग

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कर्नाटक केंद्र सरकार से खाद्य सुरक्षा नियमों में बदलाव और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की मांग करेगा. उन्होंने कहा कि देशभर के फूड सेफ्टी अधिकारियों का सम्मेलन आयोजित करने पर भी विचार किया जा रहा है. "केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर अच्छी नीति तैयार करनी चाहिए." खादर ने कहा कि यह पूरा अभियान खाद्य उद्योग में बेहतर व्यवस्था विकसित करने और उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत करने के लिए चलाया जा रहा है.

"हमें जनता का सहयोग भी चाहिए"

खादर ने कहा कि मजबूत निगरानी, उपभोक्ताओं की जागरूकता और नागरिकों की भागीदारी के बिना खाद्य सुरक्षा मानकों को प्रभावी तरीके से लागू करना संभव नहीं होगा. ऐसे में हमें पब्लिक का सपोर्ट भी चाहिए.

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