- महाराष्ट्र की सियासत में एनसीपी अजित पवार गुट के बड़े नेताओं ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है.
- इस बैठक में महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय दोबारा एनसीपी को सौंपने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई.
- वर्तमान में वित्त मंत्रालय का प्रभार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास है.
महाराष्ट्र की सियासत से जुड़ी खबर सामने आई है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-अजित पवार गुट) बडे़ नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है. इस मुलाकात में वित्त मंत्रालय पर चर्चा हुई है, सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय का पोर्टफोलियो दोबारा एनसीपी को सौंपने की मांग हुई है. अजित पवार के निधन के उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार सरकार में डिप्टी सीएम बनी थी. हालांकि वित्त मंत्रालय का प्रभार सीएम देवेंद्र फडणवीस के पास ही है. इन नेताओं की अमित शाह से मुलाकात के बाद महाराष्ट्र में भी राजनीतिक हलचल चल रही है.
अमित शाह से मिले यह नेता
सोमवार को दिल्ली में NCP अजित पवार गुट के छह नेता, धनंजय मुंडे, सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, हसन मुश्रीफ, छगन भुजबल और दिलीप वाल्से पाटिल ने मुलाकात की है. बताया जा रहा है कि इस बैठक में वित्त मंत्रालय दोबारा NCP को दिए जाने और NCP के दोनों गुट फिर से एक साथ नहीं आने चाहिए वाले मुद्दे पर चर्चा हुई है. सूत्रों के मुताबिक NCP नेताओं ने बैठक के दौरान पार्टी के कुछ युवा नेताओं के खिलाफ अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की है.
सुनेत्रा पवार की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल
दिल्ली में हुई इस मुलाकात की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार की गैर-मौजूदगी की चर्चा ज्यादा हो रही है. क्योंकि यह पार्टी के दोनों प्रमुख नेता हैं, लेकिन इस मुलाकात में दोनों नेता मौजूद नहीं थे.
बताया जा रहा है कि आज मुंबई में शाम 4 बजे दिवंगत अजित पवार के आवास पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की बड़ी बैठक होनी हैु. इस बैठक में आज अमित शाह से मुलाकात करने वाले सभी नेताओं के उपलब्ध रहने की भी संभावना है. ऐसे में इस बैठक से पहले 6 नेताओं की बिना डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार के अमित शाह से मुलाकात के बाद राजनीतिक हलचल तेज है.
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वहीं अमित शाह के साथ हुई एनसीपी की बैठक के संदर्भ में बीजेपी प्रवक्ता नवनाथ बन ने कहा है की वित्त मंत्रालय किसे सौंपना है, यह पूरी तरह से मुख्यमंत्री का अधिकार है. वे यह निर्णय लेने में सक्षम हैं और सही समय आने पर मुख्यमंत्री द्वारा वित्त मंत्रालय का आवंटन कर दिया जाएग.
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