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BJP मुंबई का किंग, शिंदे किंग मेकर, उद्धव, अजित, सपा, कांग्रेस-किसने क्या खोया-क्या पाया?

पहली बार देश के सबसे अमीर नगर निकाय बीएमसी में बीजेपी का महापौर होगा. बीजेपी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन में चुनाव में उतरी थी.

  • बीएमसी चुनाव में बीजेपी अविभाजित शिवसेना के तीन दशक के वर्चस्व को तोड़कर सबसे बड़ी पार्टी बन गई है
  • एकनाथ शिंदे की शिवसेना गठबंधन में किंग मेकर बनी है, जिसके बिना बीजेपी का मेयर नहीं बन सकता है
  • उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन पिछली बार के मुकाबले कमजोर रहा
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मुंबई:

अविभाजित शिवसेना के लगभग तीन दशक के वर्चस्व को तोड़ते हुए, बीजेपी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव नतीजे में किंग बनकर उभरी है. वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना बीजेपी के साथ गठबंधन में किंग मेकर की भूमिका में आ गई है. मुंबई की सत्ता के लिए हुए इस मुकाबले में ठाकरे बंधु (उद्धव और राज ठाकरे) दो दशकों बाद फिर से एकजुट हुए थे, लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया. इधर कांग्रेस बीएमसी में अस्तित्व बचाने में कामयाब रही.

बीजेपी के 'मिशन मुंबई' की सफलता ने अब उसे आर्थिक राजधानी में प्रमुख राजनीतिक शक्ति के रूप में मजबूती से स्थापित कर दिया है. इस परिणाम से मुंबई की सत्ता संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है. सालों से, बीएमसी को ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना का अजेय गढ़ माना जाता था, लेकिन अब बीजेपी ने राज्य की सत्ता के साथ ही बीएमसी की सत्ता भी हासिल कर ली.

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  • BJP (88): सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन अपना पहला मेयर बनाने के लिए अब भी पूरी तरह बैसाखियों पर निर्भर है.
  • UBT (64): पिछले चुनाव (84) के मुकाबले बड़ी गिरावट, जो मुंबई और बीएमसी पर ठाकरे परिवार की गिरती पकड़ का संकेत है, लेकिन महायुति की लहर में भी अपने प्रभाव वाले हिस्से बचा पायी. 
  • SS शिंदे (29): चाहे तो “खेला” कर सकती है. संख्या कम होने के बावजूद 'किंगमेकर' की भूमिका में, जिनके बिना बीजेपी का मेयर बनना असंभव है, अपना मेयर बनाने का दबाव बना सकती है.
  • INC (24): स्वतंत्र रूप से लड़कर अपनी पारंपरिक पॉकेट्स और अस्तित्व बचाने में कामयाब रही.
  • MIM (8): मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी पैठ मजबूत कर अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है.
  • MNS (6): राज ठाकरे का जादू फिर से बेअसर रहा, पार्टी मुंबई की राजनीति में हाशिए पर सिमटती दिख रही है.
  • NCP अजित पवार (3): ग्रामीण पकड़ के मुकाबले मुंबई महानगर में पार्टी का आधार अब भी बेहद कमजोर साबित हुआ.
  • SP (2): समाजवादी पार्टी अब केवल कुछ खास मोहल्लों और व्यक्तिगत प्रभाव वाली सीटों तक सीमित रह गई है.
  • NCP SP (1): शरद पवार की पार्टी के लिए मुंबई नगर निगम में अपना खाता खोलना ही इस वक्त सबसे बड़ी उपलब्धि है.
बीएमसी चुनाव में बहुकोणीय लड़ाई, विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) खेमे में टकराव और विरोधियों के बीच एक ठोस रणनीति का अभाव बीजेपी को सत्ता की कुर्सी पर काबिज होने में मददगार साबित हुआ. पहली बार देश के सबसे अमीर नगर निकाय में बीजेपी का महापौर होगा. बीजेपी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन में चुनाव में उतरी थी.

कांग्रेस का निराशाजनक प्रदर्शन

उद्धव ठाकरे की शिवसेना(उबाठा) ने राज ठाकरे की मनसे के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था. राज्य स्तर पर कांग्रेस, शिवसेना (उबाठा) और शरद पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन महा विकास अघाडी (एमवीए) का हिस्सा है, लेकिन बीएमसी चुनाव में वह प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) और राष्ट्रीय समाज पक्ष (आरएसपी) के साथ मैदान में उतरी. शिवसेना (उबाठा) और कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन ने एमवीए को करारा झटका दिया है.

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राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक एमवीए के भीतर आंतरिक विरोधाभास, कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बीच वैचारिक मतभेद, व्यक्तिगत टकराव और समन्वित रणनीति की कमी ने चुनावों में गठबंधन की प्रभावशीलता को कमजोर कर दिया है. उन्होंने बताया कि मूल शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा)में विभाजन, साथ ही कांग्रेस के स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के फैसले ने लगभग 200 वार्ड में भाजपा विरोधी वोटों को प्रभावी रूप से कमजोर कर दिया.

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काम न आया ठाकरे ब्रदर्स का साथ आना

मुंबई को कभी कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) का गढ़ माना जाता था. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा) के लिए यह परिणाम एक राजनीतिक दुस्वप्न से कम नहीं है. मुंबई अविभाजित शिवसेना आंदोलन का उद्गम स्थल था और दो दशकों से अधिक समय तक पार्टी के नियंत्रण में रहा. बीएमसी का हाथ से निकल जाना 2022 के विभाजन के बाद से पार्टी के पतन का प्रतीक है.

कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन ने शहरी मतदाताओं, विशेष रूप से मुंबई जैसे महानगर में, उनसे जुड़ने में उसकी लगातार अक्षमता को उजागर किया. केंद्र में विपक्षी गठबंधन का मुख्य आधार होने के बावजूद, पार्टी भाजपा विरोधी दलों के बीच राष्ट्रीय स्तर की एकता को स्थानीय स्तर पर चुनावी लाभ में तब्दील करने में विफल रही है.
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अजित पवार को बड़ा झटका

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को राजनीतिक दृष्टि से एक बड़ा झटका लगा है. पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम चुनावों में एनसीपी के उनके गुट को करारी हार का सामना करना पड़ा है. इस हार ने न केवल भाजपा को उनके गृह क्षेत्र में चुनौती देने की उनकी रणनीति को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि महायुति गठबंधन में दबी हुई भूमिका निभाने के अलावा उनके पास कोई विकल्प भी नहीं बचा है.

एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए अजित पवार ने शरद पवार के एनसीपी गुट के साथ स्थानीय गठबंधन किया. राज्य स्तर पर भाजपा का सहयोगी होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर उनके प्रतिद्वंद्वियों के साथ गठबंधन करने की यह "दोहरी रणनीति" पूरी तरह से विफल रही.

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