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मुंबई लोकल यानी खतरों का सफर: पत्नी कहती है- सावधानी से जाना सुरक्षित आना

रेलवे पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में मुंबई लोकल नेटवर्क पर 2287 यात्रियों की मौत हुई, जबकि 2,554 लोग घायल हुए. 2024 में यह आंकड़ा 2,468 मौतों और 2,697 घायलों का था. यानी हर दिन छह से अधिक लोगों की जान मुंबई की रेल पटरियों और लोकल ट्रेनों पर जाती रही है.

मुंबई लोकल यानी खतरों का सफर: पत्नी कहती है- सावधानी से जाना सुरक्षित आना
Mumbai Local Train: मुंबई लोकल का सफर क्यों इतना खतरनाक है, समझें.
NDTV
  • मुंबई लोकल का सफर ऐसा है, जिसमें हर दिन मौत को मात देने वाली जद्दोजदत होती है.
  • 2025 में 2287 यात्रियों की मौत हुई, जिनमें चलती ट्रेन से गिरने और ट्रैक पार करने के मामले मेन थे.
  • ठाणे–डोंबिवली–कल्याण सेक्शन में ट्रेन से गिरने के कारण होने वाली मौतों का लगभग 58 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया
मुंबई:

सुबह के आठ बजे हैं. स्टेशन पर पैर रखने की भी जगह नहीं. प्लेटफॉर्म पर खड़े हजारों लोगों की निगाहें सिर्फ एक आती हुई लोकल पर टिकी हैं. जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुकती है, उतरने और चढ़ने वालों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो जाती है. कुछ सेकंड में फैसला हो जाता है कि आज सीट मिलेगी या फिर दरवाजे पर लटककर सफर करना पड़ेगा. मैं भी इन्हीं लाखों लोगों में से एक हूं. मुंबई लोकल मेरे लिए सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि रोज़ी-रोटी तक पहुंचने का जरिया है. लेकिन हर दिन इस "लाइफलाइन" में सफर करना अब जिंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है.

लोकल में चढ़ना किसी युद्ध से कम नहीं. कई बार तो ट्रेन में घुसने के लिए दौड़ना पड़ता है, किसी का बैग चेहरे पर लगता है, किसी की कोहनी पसलियों में. अंदर पहुंच भी गए तो सांस लेने की जगह नहीं. और अगर जगह नहीं मिली तो दरवाजे पर खड़े होकर सफर करना मजबूरी बन जाता है.

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2025 में मुंबई लोकल में 2287 यात्रियों की मौत

यही मजबूरी हर साल सैकड़ों लोगों की जान ले लेती है. सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के अनुसार वर्ष 2025 में मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क पर 2,287 यात्रियों की मौत हुई, यानी औसतन हर दिन छह से अधिक लोगों की जान गई. इनमें बड़ी संख्या चलती ट्रेन से गिरने, ट्रैक पार करने और अन्य रेल हादसों की थी. हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में मौतों में कुछ कमी दर्ज हुई, लेकिन आंकड़े आज भी बेहद चिंताजनक हैं.

मुंबई लोकल को देश की सबसे व्यस्त उपनगरीय रेल सेवा कहा जाता है. रोज़ाना 70 लाख से अधिक यात्री इस नेटवर्क पर सफर करते हैं. लेकिन इसी लाइफलाइन पर हर साल हजारों परिवार अपनों को खो देते हैं.

मुंबई लोकल में यात्री और किन्नर में मारपीट

मुंबई के उपनगरीय रेलवे नेटवर्क (लोकल ट्रेन) से हिंसा का एक नया मामला सामने आया है. देर रात एक चलती ट्रेन के भीतर एक रेल यात्री और किन्नर (ट्रांसजेंडर) समुदाय के सदस्यों के बीच जमकर फ्री-स्टाइल मारपीट हुई. इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है.

2024 में मुंबई लोकल 2468 यात्रियों की मौत

सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क पर 2,287 यात्रियों की मौत हुई, जबकि 2,554 लोग घायल हुए. वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 2,468 मौतों और 2,697 घायलों का था. यानी एक साल में मौतों में करीब 7 प्रतिशत और घायलों की संख्या में 5 प्रतिशत की कमी जरूर आई, लेकिन इसके बावजूद औसतन हर दिन छह से अधिक लोगों की जान मुंबई की रेल पटरियों और लोकल ट्रेनों पर जाती रही.

इन मौतों में बड़ी संख्या उन यात्रियों की होती है जो भीषण भीड़ के कारण ट्रेन के दरवाजे पर लटककर सफर करते हैं, चलती ट्रेन से गिर जाते हैं या ट्रैक पार करते समय हादसे का शिकार हो जाते हैं.

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मुंबई लोकल का सबसे डेंजर जोन- ठाणे–डोंबिवली–कल्याण सेक्शन

मध्य रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि ट्रेन से गिरकर होने वाली मौतों का सबसे बड़ा "डेंजर ज़ोन" ठाणे–डोंबिवली–कल्याण सेक्शन है. वर्ष 2024 में केवल इसी सेक्शन में ट्रेन से गिरने से हुई मौतों का लगभग 58 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया. इस रूट पर अत्यधिक भीड़, फुटबोर्ड पर सफर और तेज़ रफ्तार लोकल ट्रेनें हादसों की बड़ी वजह हैं.

मुंब्रा के पास दो भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेनों के यात्रियों के टकराने और कई यात्रियों के गिरने की घटना ने भी पूरे देश को झकझोर दिया था. इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया कि क्या मुंबई की लाइफलाइन अब अपनी क्षमता से कहीं अधिक बोझ ढो रही है.

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मुंबई लोकल का सबसे बड़ा खतरा यात्रियों की भारी भीड़

मुंबई की लोकल में सबसे बड़ा खतरा भीड़ है. पीक आवर्स में कई यात्री दरवाजे पर लटककर सफर करते हैं. हल्का-सा झटका, सामने से गुजरती ट्रेन का दबाव, या पीछे से आया धक्का... और जिंदगी पटरी पर खत्म हो जाती है. हाल के वर्षों में ऐसे कई हादसे सामने आए हैं, जिनमें भीड़ के कारण यात्री चलती ट्रेन से नीचे गिर गए. 

  • रेलवे ने ऑटोमैटिक डोर वाले नए लोकल रेक शुरू करने और पुराने रेक में भी बदलाव की योजना बनाई है, लेकिन करोड़ों यात्रियों के लिए यह बदलाव अभी भी पर्याप्त नहीं माना जा रहा.
  • लेकिन अब डर सिर्फ हादसों का नहीं रहा. लोकल के डिब्बों में अपराध भी बढ़ती चिंता बन चुके हैं. पहले लोकल में सबसे बड़ा डर दुर्घटनाओं का था, लेकिन अब अपराध भी यात्रियों के लिए गंभीर चिंता बनते जा रहे हैं.
  • मोबाइल और चेन स्नैचिंग, जेबकतरी, महिलाओं से छेड़छाड़, नशे में यात्रियों द्वारा उत्पात, सीट को लेकर मारपीट और मामूली विवाद में हिंसा जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं.

मामूली विवाद में मंयक लोहार की हत्या

हाल ही में पश्चिम रेलवे की एक लोकल ट्रेन में 22 वर्षीय मयंक लोहार की चाकू मारकर हत्या ने पूरे शहर को झकझोर दिया. दरवाजे के पास खड़े होने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद कुछ ही मिनटों में खूनी संघर्ष में बदल गया. जांच के दौरान वायरल वीडियो की मदद से जीआरपी ने हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद किया.

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इसके बाद मध्य रेलवे की अंबरनाथ जाने वाली लोकल में सीट को लेकर हुए विवाद में तीन यात्रियों ने एक युवक पर हमला कर दिया. घायल यात्री को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. यह घटना इस बात का संकेत है कि भीड़, तनाव और असहिष्णुता अब लोकल ट्रेनों में हिंसा का रूप लेने लगी है.

इसी बीच, कलवा कारशेड के पास खाली लोकल में अनधिकृत तरीके से चढ़ने की कोशिश करने वाले यात्रियों की लगातार घटनाओं के बाद मध्य रेलवे को संबंधित प्रवेश द्वार स्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लेना पड़ा. रेलवे का कहना है कि ऐसे खतरनाक प्रयास किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं.

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परिजन कहते हैं- सावधानी से जाना और सुरक्षित लौटना

मैं जब रोज़ इन खबरों को पढ़ता हूं तो अहसास होता है कि मुंबई लोकल में अब सिर्फ भीड़ से लड़ना ही नहीं, बल्कि असुरक्षा के बढ़ते माहौल से भी जूझना पड़ रहा है. सुबह घर से निकलते समय परिवार सिर्फ इतना कहता है— "सावधानी से जाना... और सुरक्षित लौटना."
लेकिन सच यही है कि मुंबई की लाइफलाइन में सफर करने वाला हर यात्री हर दिन एक अदृश्य जोखिम के साथ यात्रा करता है.

मोबाइल और चेन स्नैचिंग, जेबकतरी, महिलाओं से छेड़छाड़, सीट को लेकर मारपीट और नशे में यात्रियों द्वारा उत्पात जैसी घटनाएं रोजमर्रा की खबरें बन गई हैं. कई बार मामूली कहासुनी हिंसा में बदल जाती है.

पत्नी रोज पूछती है- आज सफर ठीक रहा ना

मैं जब शाम को घर लौटता हूं तो परिवार का पहला सवाल होता है—"आज सफर ठीक रहा ना?" यह सवाल अब सामान्य नहीं रहा. क्योंकि मुंबई में रोज़ कहीं न कहीं कोई यात्री गिरता है, कोई धक्का लगने से घायल होता है, कोई चोरी का शिकार बनता है और कोई मामूली विवाद में अपनी जान गंवा देता है.

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मुंबई की पहचान उसकी लोकल ट्रेन है. यही शहर को चलाती है, यही लाखों सपनों को रोज़ मंजिल तक पहुंचाती है. लेकिन इस लाइफलाइन में सफर करने वाले यात्रियों की जिंदगी भी उतनी ही कीमती है.

हर सुबह मैं फिर उसी प्लेटफॉर्म पर खड़ा होता हूं. ट्रेन आती है... भीड़ दौड़ती है... मैं भी दौड़ पड़ता हूं. क्योंकि नौकरी पर पहुंचना जरूरी है. लेकिन दिल के किसी कोने में हर दिन सिर्फ एक ही दुआ होती है—"आज का सफर सुरक्षित रहे... और शाम को मैं अपने घर वापस लौट आऊं."

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