'सही समय पर किए गए प्रयास से बड़ी से बड़ी मुसीबत टल जाती है', रविवार को भारतीय सेना ने इस कहावत को सच कर दिखाया. सेना ने राजौरी में उफनती बाढ़ के बीच फंसे पांच बच्चे समेत 11 आम नागरिकों को बाढ़ की चपेट में आने से पहले बचा लिया. लगातार बारिश के कारण जिले में अचानक बाढ़ आ गई. इसके बाद 'व्हाइट नाइट कॉर्प्स' के जवानों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस, SDRF और सिविल प्रशासन के साथ मिलकर सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाकों, थानामंडी और नौशेरा में तेजी से बचाव अभियान चलाया.
बढ़ते जलस्तर के बीच चुनौती
थानामंडी के दक्षिण में चुरुंग गांव के पास पहले मिशन में, सेना के जवानों ने कुछ ही मिनटों में तेजी से कार्रवाई की. उन्हें खबर मिली थी कि पांच बच्चों समेत नौ नागरिक एक उफनते नाले की दूसरी तरफ फंस गए हैं. तेज बहाव और खराब मौसम की परवाह किए बिना, टीम उफनते पानी के बीच से गुज़री और सभी नौ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला.

इसी दौरान, एक इंजीनियर रेजिमेंट की टीम ने राजौरी से लगभग 12 किमी दूर धनगरी के पास नौशेरा तवी नदी में एक साहसी बचाव अभियान चलाया. 17 और 20 साल के दो युवक नदी के बीच बने एक टापू पर फंस गए थे, जबकि उनके चारों ओर पानी का तेज़ बहाव था.
असाधारण कौशल और साहस दिखाते हुए, सैनिकों ने तेज़ बहाव का सामना किया और दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला. बाद में ज़िला अधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें उनके परिवारों से मिलाया गया.
संकट के समय प्रतिबद्धता
समय पर किए गए ये ऑपरेशन प्राकृतिक आपदाओं के दौरान नागरिकों के साथ खड़े रहने के भारतीय सेना के अटूट संकल्प को दर्शाते हैं. सेना, पुलिस, SDRF और नागरिक प्रशासन के बीच बेहतरीन तालमेल की वजह से दोनों मिशन बिना किसी जान-माल के नुकसान के पूरे किए गए.

जब राजौरी बाढ़ की मार झेल रहा है, तो सेना एक बार फिर मज़बूती के स्तंभ के तौर पर सामने आई है और यह साबित किया है कि संकट के समय में वह जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहती है.
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