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गर्मी से डर नहीं लगता साहब, उमस से लगता है... हवा में ये नमी कितनी है खतरनाक?

बारिश हो नहीं रही है और दिल्ली में अब उमस भरी गर्मी सता रही है. गर्मी से ज्यादा उमस वाली स्थिति कितनी खतरनाक होती है. 

गर्मी से डर नहीं लगता साहब, उमस से लगता है... हवा में ये नमी कितनी है खतरनाक?
दिल्ली में उमस वाली गर्मी पड़ रही है. (सांकेतिक तस्वीर)
IANS
नई दिल्ली:

दिल्ली-एनसीआर में अच्छी बारिश हुई हफ्तेभर से ज्यादा हो गया है. नतीजा ये हो रहा है कि तापमान बढ़ रहा है. लेकिन चिंता की बात ये है कि हवा में उमस भी बढ़ रही है. इसी कारण तापमान से ज्यादा गर्मी महसूस हो रही है. आज भी दिल्ली में तापमान 33 डिग्री सेल्सियस है लेकिन गर्मी 39 डिग्री वाली महसूस हो रही है, क्योंकि उमस है. 

16 जुलाई को दिल्ली में इतनी ज्यादा गर्मी थी कि ये दो साल बाद जुलाई का सबसे गर्म दिन बन गया. मौसम विभाग के मुताबिक, इस दिन 48 डिग्री वाली गर्मी महसूस हुई. तकनीकी भाषा में इसे 'हीट इंडेक्स' कहा जाता है.

यह हीट इंडेक्स क्या है?

हीट इंडेक्स असल में एक ऐसा पैमाना है जो हवा के असल तापमान और ह्यूमिडिटी (नमी) को मिलाकर यह बताता है कि इंसानी शरीर को असल में कितनी गर्मी महसूस हो रही है.

और इसे मापा कैसे जाता है?

हीट इंडेक्स को तापमान और नमी को मिलाकर मापा जाता है. अमेरिका की कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. रॉबर्ट जी. स्टीडमैन ने इसका कॉन्सेप्ट दिया था. उन्होंने एक टेबल के जरिए समझाया था कि हीट इंडेक्स को कैसे मापा जा सकता है. 

इसी टेबल के जरिए हीट इंडेक्स निकाला जाता है. उदाहरण के लिए, अगर तापमान 34 डिग्री सेल्सियस है और नमी 75% है तो हीट इंडेक्स में तापमान 49 डिग्री सेल्सियस होगा. 31 डिग्री सेल्सियस तापमान और 100% नमी होने पर भी इतनी ही गर्मी महसूस होगी. अगर 40 डिग्री तापमान है और हवा में 50% नमी है तो हमें 55 डिग्री वाली गर्मी महसूस होगी.

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ये क्यों है खतरनाक?

तापमान और उमस का कॉम्बिनेशन बहुत खतरनाक माना जाता है. ये खतरनाक क्यों होता है? इसे समझने से पहले इतना समझ लीजिए कि दुनियाभर में दो तरह के थर्मामीटर तापमान मापने के लिए इस्तेमाल होते हैं. एक- ड्राई बल्ब और दूसरा- वेट बल्ब. ड्राई बल्ब से वह तापमान दर्ज होता है जो मौसम विभाग बताता है. वहीं, वेट बल्ब में नमी और तापमान को ध्यान में रखकर मापा जाता है.

वेट बल्ब से ही पता चलता है कि हमें कितनी गर्मी महसूस हो रही है. इसमें एक थर्मामीटर को कपड़े में लपेटकर तापमान लिया जाता है. इसलिए वेट बल्ब को 'फील्स लाइक टेंपरेचर' भी कहा जाता है.

अगर तापमान 37 डिग्री सेल्सियस रहता है तो इंसानी शरीर को कोई नुकसान नहीं होगा. क्योंकि हमारे शरीर का औसत तापमान भी 37 डिग्री सेल्सियस होता है. लेकिन जब तापमान बढ़ता है तो हमारा शरीर पसीना निकालकर शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है. पसीना भाप बनकर उड़ता है और अपने साथ गर्मी को भी उड़ा लेता है.

लेकिन जब उमस होती है तो पसीना तो आता है लेकिन भाप बनकर उड़ नहीं पाता. ऐसी स्थिति में अगर नमी ज्यादा है तो तापमान 37 या 38 डिग्री होने पर भी व्यक्ति को लू से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं.

इसका असर क्या होता है?

काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायर्मेंट एंड वॉटर (CEEW) की रिपोर्ट बताती है कि ज्यादा उमस होने पर पसीना भाप बनकर उड़ नहीं पाता तो 'हीट स्ट्रेस' पैदा होता है. 

CEEW की रिपोर्ट कहती है कि हीट स्ट्रेस होने पर बेचैनी, हीट क्रैम्प्स और थकान होती है. जब तापमान 40 डिग्री से ऊपर चला जाता है तो 'हीट स्ट्रोक' हो सकता है.

तापमान और उमस का डेडली कॉम्बिनेशन हजारों लोगों की जान ले सकता है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में हीट स्ट्रोक से 1,832 मौतें हुई थीं. ये एक दशक में सबसे बड़ा आंकड़ा था. इससे पहले 2015 में 1,908 लोगों की मौत हुई थी.

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