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This Article is From Sep 19, 2025

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का कितना काम हुआ पूरा? जमीन के नीचे बन रहा स्टेशन, जानें क्यों है खास

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के अंतर्गत कुल 12 स्टेशन का निर्माण होना है, जिसमें से बीकेसी एकमात्र अंडरग्राउंड स्टेशन होगा. स्टेशन बनाने के लिए जमीन को लगभग 32.5 मीटर (106 फीट) गहराई तक खोदा जा रहा है, जो 10 मंजिला इमारत के बराबर है.

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का कितना काम हुआ पूरा? जमीन के नीचे बन रहा स्टेशन, जानें क्यों है खास
  • बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में अंडरग्राउंड स्टेशन निर्माण कार्य तेजी पर है.
  • स्टेशन की खुदाई 83 प्रतिशत पूरी हो चुकी है तथा बेस स्लैब कास्टिंग का कार्य वर्तमान में जारी है.
  • स्टेशन में तीन फ्लोर होंगे जिनमें बेसमेंट वन में तकनीकी कार्य और बेसमेंट तीन में प्लेटफॉर्म स्थित होंगे.
नई दिल्ली:

Bullet Train Project : मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन, बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) के निर्माण का काम तेजी से चल रहा है. स्टेशन की खुदाई  83 प्रतिशत से ज्यादा पूरी हो चुकी है और अब बेस स्लैब कास्टिंग का काम चल रहा है. 

जमीन के नीचे 106 मीटर खुदाई 
जानकारी के अनुसार, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के अंतर्गत कुल 12 स्टेशन का निर्माण होना है, जिसमें से बीकेसी एकमात्र अंडरग्राउंड स्टेशन होगा. स्टेशन बनाने के लिए जमीन को लगभग 32.5 मीटर (106 फीट) गहराई तक खोदा जा रहा है, जो 10 मंजिला इमारत के बराबर है.

कैसा होगा बांद्रा कुर्ला कंपलेक्स का स्टेशन?

प्लेटफ़ॉर्म को जमीन से लगभग 26 मीटर की गहराई पर बनाने की योजना है. इसमें स्टेशन को तीन फ्लोर का बनाने का काम चल रहा है. बेसमेंट वन सर्विस फ्लोर कह लाएगा, जो टेक्निकल और ऑपरेशनल कार्यों के लिए होगा. इसमें सिक्योरिटी रूम, स्टाफ रूम, लॉकर रूम और बैक ऑफिस होगा. बेसमेंट टू कॉन्कोर्स कहलायेगा जिसमें यात्रियों के लिए हाल,  बिजनेस क्लास लाउंज, टिकटिंग एरिया और रिटेल शॉप्स होंगी जबकि बेसमेंट तीन में प्लेटफार्म होगा. कुल 6 टर्मिनल प्लेटफॉर्म होंगे और हर प्लेटफॉर्म की लंबाई लगभग 495 मीटर होगी. 

मेट्रो और रोड से होगी कनेक्टिविटी

स्टेशन में एक एंट्री और एक एग्जिट पॉइंट होंगे. एक मेट्रो लाइन 2बी स्टेशन (आईएलएफएस)से कनेक्ट रहेगा तो दूसरा एमटीएनएल बिल्डिंग की ओर सड़क मार्ग से जुड़ा रहेगा. स्टेशन की योजना इस प्रकार बनाई गई है कि यात्रियों की आवाजाही और सुविधाओं के लिए कॉनकोर्स और प्लेटफार्म स्तर पर पर्याप्त जगह उपलब्ध हो सके. स्टेशन के अंदर प्राकृतिक रोशनी के लिए स्काईलाइट (रोशनदान) भी लगाया जाएगा. कुल मिलाकर स्टेशन का निर्माण मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटीकी तर्ज पर किया जा रहा है.

मुंबई के प्रधान मुख्य परियोजना प्रबंधक यूपी सिंह ने कहा, "बुलेट ट्रेन परियोजना के 11 स्टेशन एलिवेटेड हैं. ये एकमात्र अंडरग्राउंड स्टेशन है, और इसके निर्माण में बहुत कठिनाई आई है लेकिन तकनीक का इस्तेमाल करके हम इसे बहुत ही मजबूत और सुरक्षित ढंग से बना रहें हैं. "

उन्होंने बताया कि पूरा सेक्शन 1.08 किलोमीटर लंबा होगा. "यह स्टेशन इंटरनेशनल फाइनेंस सर्विस सेंटर से जुड़ा होगा और जमीन के नीचे बनाया जाएगा. इसकी लंबाई लगभग 495 मीटर होगी. इसके साथ 467 मीटर लंबी एक सुरंग भी बनेगी. इसके अलावा, 68 मीटर लंबा एक शाफ्ट (खड़ा रास्ता) बनाया जाएगा."

अरब सागर की थीम पर स्टेशन का निर्माण 

स्टेशन का निर्माण यात्रियों के सुविधा के हिसाब से किया जा रहा है. हर स्टेशन की बनावट लोकल थीम के आधार पर की जा रही है. बांद्रा कुर्ला कंपलेक्स की बनावट अरब सागर (Arabian Sea) के तर्ज पर की जाएगी क्योंकि यह पूरा इलाका कोस्टल प्लेन में आता है. स्टेशन की यात्री क्षमता प्रतिदिन 30000 यात्रियों की है. खास बात यह है कि प्लेटफार्म एरिया पर बिना टिकट के किसी भी यात्रियों को आने की अनुमति नहीं होगी. फिलहाल 10 कोच की बुलेट ट्रेन चलाने का तैयारी है लेकिन प्लेटफार्म का निर्माण 16 कोच के हिसाब से किया गया है.  स्टेशन के निर्माण में 3600 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है.

स्टेशन में लगेगा टीवीएस 

स्टेशन के निर्माण में यात्री सुविधाओं के साथ सुरक्षा का भी विशेष ख्याल रखा गया है. यूपी सिंह ने कहा, " यह एक अंडरग्राउंड स्टेशन है. ऐसे में यात्रियों को सांस लेने में कोई असुविधा न हो इसके लिए टनल वेंटीलेशन सिस्टम (TVS) लगाया गया है.  ये हवा की गुणवत्ता बनाए रखने, प्रदूषकों को दूर करने और आग लगने की स्थिति में धुआँ नियंत्रित करने में काम आएगा. यहां ऐसी सीढ़ियों का निर्माण किया जा रहा है कि अगर कभी आग लग जाए तो 6 मिनट के भीतर लोगों को बाहर निकाल लिया जाएगा."

उन्होंने बताया कि स्टेशन का निर्माण इस प्रकार किया जा रहा है कि जरुरत पड़ने पर जमीन के ऊपर 95 मीटर तक ऊँची बिल्डिंग भी बनाई जा सकती है.

लेखक के बारे में
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पल्लव मिश्रा
Correspondent
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