- मध्य प्रदेश में पांच ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड, विंध्य और महाकौशल क्षेत्रों को आपस में जोड़ेंगे.
- भोपाल से मंदसौर का नया 258 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे मालवा और निमाड़ को भोपाल से जोड़ देगा.
- जबलपुर से आशापुर तक 358 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे महाकौशल को नर्मदापुरम बेल्ट से जोड़ेगा.
भोपाल से ग्वालियर की दूरी अब 3 घंटे में पूरी होने वाली है, जबकि मंदसौर, जबलपुर, सागर और सतना के बीच भी सुफरफास्ट कनेक्टिविटी बनने वाली है. क्योंकि पांच ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे एमपी में बुंदेलखंड से विंध्य और महाकौशल को आपस में जोड़ने वाले हैं. ये सभी कॉरिडोर फोर-लेन, एक्सेस-कंट्रोल्ड और पेव्ड शोल्डर के साथ होंगे, जिससे गाड़ियां सुपरफास्ट रफ्तार से चलेगी. सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में हाल ही में मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) की 49वीं बैठक हुई थी. इसी बैठक में इन पांचों परियोजनाओं की डीपीआर तैयार करने की अनुमति दी गई है. इसी बैठक में एक और बड़ा फैसला हुआ, जिसमें MPRDC की प्रस्तावित राजमार्ग निधि का नया नामकरण किया गया. अब यह निधि 'विकसित मध्यप्रदेश संकल्प पथ' के नाम से जानी जाएगी.
भोपाल-मंदसौर एक्सप्रेसवे
भोपाल से मंदसौर के बीच 258 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जाएगा, जो मालवा को निमाड़ क्षेत्र को सीधे राजधानी भोपाल से जोड़ देगा. अभी भोपाल से मंदसौर जाने के लिए लोगों को सीहोर, देवास, उज्जैन, रतलाम होते हुए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, लेकिन नया कॉरिडोर बनने के बाद न सिर्फ दूरी घटेगी, बल्कि सीहोर, शाजापुर, आगर-मालवा, रतलाम और मंदसौर के किसानों को अपनी फसल मंडी तक पहुंचाने में भी आसानी होगी. अफीम, सोयाबीन और लहसुन जैसे उत्पादों के ट्रांसपोर्ट में बड़ी राहत मिलेगी. दोनों शहरों के बीच की दूरी 3.30 घंटे में पूरी हो जाएगी, क्योंकि इस ग्रीनफील्ड हाईवे पर गाड़ियों की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रतिघंटे तक भी होगी. इसे उज्जैन में 2028 सिंहस्थ पूरा करने की तैयारी है.

जबलपुर-आशापुर एक्सप्रेसवे
358 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश का अहम प्रोजेक्ट है, जो पांचों में सबसे लंबा कॉरिडोर जबलपुर से आशापुर के बीच होगा. यह महाकौशल को नर्मदापुरम बेल्ट से जोड़ेगा. जबलपुर प्रदेश का बड़ा औद्योगिक और रक्षा हब है, यहां से आशापुर तक का नया कॉरिडोर नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और बैतूल जैसे जिलों को सीधी कनेक्टिविटी देगा. इससे नागपुर और महाराष्ट्र की ओर जाने वाला ट्रैफिक भी तेज होगा. जबलपुर से नागपुर का सफर भी 7 घंटे में पूरा हो जाएगा. जबकि जबलपुर से छिंदवाड़ा की दूरी महज 4 घंटे में पूरी होगी. इस प्रोजेक्ट पर भी तेजी से काम चल रहा है.
मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की 49वीं बैठक 🔹₹63,296 करोड़ की लागत से 5 ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण 🔹कुल लंबाई 1,398 किमी 🔹मध्यप्रदेश में आधुनिक सड़क नेटवर्क और कनेक्टिविटी को मिलेगा विस्तार #LokNirmanSeLokKalyan #JansamparkMP https://t.co/CEFi8N1xAT
— PWD, MP (@pwdminmp) November 6, 2026
सागर-सतना कॉरिडोर
सागर से सतना के बीच 227 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है. सागर से सतना के बीच यह नया रूट दमोह, पन्ना और मैहर जैसे जिलों को भी फायदा देगा. जिससे बुंदेलखंड को विंध्य से जोड़ने से यह सीधा उत्तर प्रदेश तक जाने में यात्रियों को कनेक्टिविटी देगा. अभी भारी वाहनों को सिंगल और टू-लेन से गुजरना पड़ात है. लेकिन फोर लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर बनने से औद्योगिक माल की ढुलाई तेज होगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि पन्ना टाइगर रिजर्व और मैहर देवी मंदिर इसी बेल्ट में आते हैं. जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सागर से सतना की दूरी भी अब 6 घंटे की जगह 4 घंटे में पूरी होगी.

भोपाल-ग्वालियर एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे बनने के बाद भोपाल से ग्वालियर जाने में महज 4 से 5 घंटे का समय लगेगा. अभी दोनों शहरों की बीच की दूरी तय करने में 7 ले 8 घंटे का समय लग जाता है. लेकिन राजधानी भोपाल को ग्वालियर से जोड़ने वाला यह कॉरिडोर 320 किलोमीटर लंबा होगा, यह मध्य प्रदेश के दो सबसे बड़े शहरों को सीधे जोड़ेगा. विदिशा, गुना, शिवपुरी होते हुए जाने वाला यह सफर नए कॉरिडोर के बाद करीब 4.5 से 5 घंटे में पूरा हो सकेगा. इससे चंबल-ग्वालियर बेल्ट का औद्योगिक विकास तेज होगा और पर्यटन को भी फायदा मिलेगा, ग्वालियर किला, ओरछा और दतिया जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी. वहीं भोपाल को यह सीधे आगरा, नोएडा से होते हुए दिल्ली तक जोड़ देगा.
कटनी-सिंगरौली कॉरिडोर
सिंगरौली को कटनी से जोड़ने वाला यह कॉरिडोर 235 किलोमीटर लंबा होगा, जहां कटनी से सिंगरौली की दूरी भी महज 3 से 4 घंटे में पूरी हो जाएगी. सिंगरौली में देश के बड़े थर्मल पावर प्लांट और कोयला खदानें हैं. यह कॉरिडोर पूरा होने से भोपाल की कटनी से होते हुए भोपाल तक सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी. नया कॉरिडोर बनने से कोयला ट्रांसपोर्ट, बिजली परियोजनाओं और सीधी-रीवा बेल्ट के विकास को नई गति मिलेगी। यह रूट उत्तर प्रदेश की सीमा तक कनेक्टिविटी भी मजबूत करेगा.
पांचों एक्सप्रेसवे का यह पूरा कॉरिडोर 1398 किलोमीटर का होगा. अगर फीजिबिलिटी और डीपीआर समय पर पूरी हुईं तो जल्द ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी. इससे एमपी की कनेक्टिविटी पूरी तरह से बदलने वाली है.
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