- मानसून ने पूरे भारत को कवर किया है. लेकिन कई राज्यों में बारिश सामान्य से कम रही.
- बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में जून से जुलाई तक क्रमशः 47%, 41% और 16% कम बारिश दर्ज की गई है.
- कृषि मंत्रालय ने खरीफ फसलों की बुवाई में कमी के कारण किसानों को कम पानी वाली फसलों की बुआई करने की सलाह दी है.
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 09 जुलाई 2026 को निर्धारित समय से एक दिन की देरी के साथ पूरे देश को कवर कर लिया. लेकिन इसके बावजूद कई राज्यों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है. 1 जून से 12 जुलाई 2026 के बीच हुई कम वर्षा ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खरीफ फसलों की बुवाई और कृषि गतिविधियों पर इसके असर की आशंका जताई जा रही है, जिससे कई कृषि प्रधान राज्यों में किसान मौसम की बेरुखी को लेकर परेशान हैं. बिहार में सामान्य से 47% (-47%) कम, झारखंड में 41% (-41%) कम और उत्तर प्रदेश में 16% (-16%) कम बारिश हुई है.
भारत मौसम विभाग के मुताबिक 1 जून 2026 से 1 जुलाई के बीच देश में बारिश की कमी 38% रिकॉर्ड की गयी थी. जुलाई के पहले 9 दिनों के दौरान औसत से ज़्यादा बारिश होने की वजह से ये कमी घटकर 14% रह गयी थी. लेकिन पिछले 2 दिनों के दौरान, मानसून की तीव्रता फिर घट गयी है, जिस वजह से बारिश की कमी 11 जुलाई को फिर बढ़कर 16% हो गयी.
कृषि मंत्रालय विशेषकर बिहार, झारखण्ड, असम, पंजाब, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात जैसे राज्यों पर बारिश की स्थिति पर विशेष निगरानी रख रहा है, क्योंकि यहाँ मानसून सीजन के दौरान बारिश की कमी 20% या उससे भी ज़्यादा दर्ज़ की गयी है.

मध्य भारत में औसत से 2% कम बारिश
अगर क्षेत्रवार आंकड़े देखें, तो बारिश की सबसे ज़्यादा पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में रिकॉर्ड की गयी है जहाँ बारिश की कमी 11 जुलाई, 2026 तक 36% रही है. दूसरी सबसे ज़्यादा कमी दक्षिण-प्रायद्वीपीय भारत में है जहां अबतक औसत से 17% कम बारिश हुई है. इस दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में औसत से 07% और मध्य भारत में औसत से 2% कम बारिश हुई है.
मानसून की रफ़्तार ऐसे समय पर कमज़ोर हुई है जब खरीफ सीजन पीक पर है, और देश के कई हिस्सों में औसत से कम बारिश की वजह से महत्वपूर्ण खरीफ फसलों की बुआई को लेकर चिंता बढ़ रही है. कृषि मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आकंड़ों के अनुसार, 03 जुलाई, 2026 तक देशभर में खरीफ सीजन के दौरान कुल 350.85 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 91.96 लाख हेक्टेयर (- 20.77%) कम है.

कम पानी वाली फसलों की बुवाई की सलाह
इस दौरान चावल की बुआई करीब 09.06 लाख हेक्टेयर (-13.08%), अहम दलहन फसलों की बुआई 10.35 लाख हेक्टेयर (- 21.79%) और तिलहन की फसलों की बुआई सबसे ज़्यादा 42.96 लाख हेक्टेयर (- 39.32%) इलाके में घट गयी है. मानसून में देरी का असर सोयाबीन और कपास की फसल पर भी पड़ा है. इसे देखते हुए कृषि मंत्रालय ने किसानों को मक्का, बाजरा और मूंग जैसी कम अवधि और कम पानी वाली फसलों की बुवाई की सलाह दी गई है.

भारत मौसम विभाग ने रविवार को जारी अपने पूर्वानुमान रिपोर्ट में कहा, अगले 6-7 दिनों में उत्तर-पश्चिम, पश्चिम-मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के मैदानी इलाकों में बारिश कम होने की संभावना है. हालांकि अगले 2-3 दिनों में पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है और अगले 4-5 दिनों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है.
बिहार-झारखंड में कब होगी बारिश
मौसम विभाग ने सोमवार बिहार और झारखंड समेत पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है. अगले 2-3 दिनों में पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. इसके अलावा बंगाल में 16 जुलाई तक, ओडिशा में 15 जुलाई तक भारी बारिश होने की संभावना है.
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