राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स समिट चल रहा है. इस समिट में हिस्सा लेने पहुंचे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई. वैसे तो ये मुलाकात कूटनीतिक थी, लेकिन दोनों नेताओं की बॉडी लैंग्वेज ने इसे और चर्चा में ला दिया. दोनों नेताओं के बीच आपसी भरोसे और व्यक्तिगत केमिस्ट्री की झलक दिखाई. यह मुलाकात भारत और रूस के संबंधों की गहराई दर्शाती है. मुलाकात के दौरान कई ऐसे पल देखने को मिले जिन्होंने दोनों देशों के खास रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत संदेश दिया.
मुस्कान के साथ हाथ मिलाया, फिर गले लगे
भारत मंडपम में जैसे ही पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन आमने-सामने आए दोनों ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया. इसके बाद उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया. यह सिर्फ औपचारिक अभिवादन नहीं बल्कि व्यक्तिगत आत्मीयता का भी संकेत माना गया. इस पूरी मीटिंग के दौरान दोनों नेताओं के चेहरे के हावभाव बेहद सहज रहे. बातचीत में किसी तरह की औपचारिक दूरी नजर नहीं आई.

पीएम मोदी ने खास तोहफा भी दिया
मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को एक खास तोहफा भी दिया. यह एक तमिल 'तिरुक्कुरल' किताब थी. पीएम मोदी ने इसका रूसी अनुवाद पुतिन को गिफ्ट किया. यह किताब देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पीपल टू पीपल कनेक्ट के लिए इस किताब का पढ़ा जाना बहुत जरूरी है, इसकी अपनी अहमियत है.

बैठक में क्या-क्या हुआ?
एनडीटीवी को सूत्रों से पता चला है कि इस द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार को 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने पर जोर दिया गया. इसके अलावा सिविल न्यूक्लियर कॉरपोरेशन पर भारत रूस के साथ व्यापार बढ़ाना चाहता है. इंडियन स्कील्ड वर्कर्स को भी रूस भेजने में भारत इच्छा जता रहा है. इस वार्ता में मुख्य रूप से वर्ष 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने तथा रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर फोकस रहा.
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा था कि दोनों पक्ष ब्रह्मोस मिसाइल के अपग्रेड पर विचार कर रहे हैं. इसके साथ ही मॉस्को अपनी बाकी S-400 मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और प्रस्तावित सुखोई-57 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति पर भी चर्चा कर रहा है. रूसी अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंध काफी मजबूत बने हुए हैं और दोनों पक्ष भारत में नए असैन्य परमाणु रिएक्टर स्थापित करने की योजना को लेकर बातचीत करने पर विचार कर रहे हैं.
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