- पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को 2000 वर्ष पुराना तमिल दार्शनिक ग्रंथ तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद उपहार में दिया
- तिरुक्कुरल तमिल साहित्य का प्रमुख ग्रंथ है जिसमें मानव जीवन की आचार संहिता और दार्शनिक विचार समाहित हैं
- यह ग्रंथ तीन खंडों में विभाजित है जो नैतिकता, शासन-व्यवस्था और प्रेम से संबंधित अध्यायों पर आधारित हैं
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की आज द्विपक्षीय बातचीत हुई. मगर इस बातचीत से पहले पीएम मोदी ने 2000 साल पुराना एक खास ग्रंथ भेंट किया. इस ग्रंथ का नाम तिरुक्कुरल है. पीएम मोदी ने रूसी भाषा में अनुवादित इस तमिल ग्रंथ को राष्ट्रपति पुतिन को उपहार में दिया. इसके साथ ही इसकी एक-एक खासियत भी बताई. दोनों नेताओं के मिलने के अंदाज ने ही इस मुलाकात के महत्व को उजागर कर दिया है.
तिरुक्कुरल पुस्तक में क्या है
तिरुक्कुरल (Thirukkural) तमिल साहित्य का सबसे प्रतिष्ठित दार्शनिक ग्रंथ है. इसे तमिल संस्कृति में 'जीवन की आचार संहिता' या 'तमिल वेद' माना जाता है. तिरुक्कुरल की रचना महान प्राचीन तमिल कवि और दार्शनिक संत तिरुवल्लुवर ने की थी. इतिहासकारों और भाषाविदों के अनुसार, इसकी रचना ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से लेकर ईसा की पांचवीं शताब्दी के मध्य (संगम काल/उत्तर-संगम काल) मानी जाती है.
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Presented President Putin with a Russian translation of the Thirukkural, which carries the eternal wisdom of the great Thiruvalluvar across languages and borders. pic.twitter.com/rvk3rRDnvg
— Narendra Modi (@narendramodi) September 11, 2026
| खंड | विषय | अध्यायों की संख्या | मुख्य सार |
| अरम | धर्म / नैतिकता | 38 अध्याय (380 दोहे) | सत्य, दया, अहिंसा, आतिथ्य, पारिवारिक कर्तव्य और आत्म-नियंत्रण |
| पोरुल | अर्थ / शासन एवं समाज | 70 अध्याय (700 दोहे) | राज्य संचालन, सुशासन, कूटनीति, न्याय, मित्रता, नागरिक उत्तरदायित्व और पुरुषार्थ |
| इनबम / कामम | काम / प्रेम | 25 अध्याय (250 दोहे) | दांपत्य जीवन, प्रेम का मनोविज्ञान, वियोग और मिलन के मानवीय भाव |
इसमें चौथे पुरुषार्थ 'मोक्ष' (वीडु) के लिए कोई अलग खंड नहीं है, क्योंकि तिरुवल्लुवर का मानना था कि यदि व्यक्ति धर्म, अर्थ और काम का सही पालन करे, तो मोक्ष स्वतः प्राप्त होता है. इसकी सबसे खास बात ये है कि ये किसी जाति, धर्म, पंथ, ईश्वर या संप्रदाय का उल्लेख नहीं करता. यह पूरी तरह मानवीय मूल्यों और व्यावहारिक जीवन दर्शन पर आधारित है, जिस कारण इसे 'उलग पोधुमरै' (सार्वभौमिक संहिता) कहा जाता है.
उससे भी खास बात ये है कि मात्र दो पंक्तियों और सात शब्दों के छोटे से एक छंद में जटिल सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक सिद्धांतों को स्पष्टता से समझाया गया है. तमिल परंपरा में कहा जाता है कि वल्लुवर ने 'सरसों के दाने में छेद करके सातों समुद्रों को भर दिया है'. तिरुक्कुरल का अनुवाद अंग्रेजी, लैटिन, फ्रेंच, जर्मन, रूसी, हिंदी सहित विश्व की 100 से अधिक भाषाओं में हो चुका है.
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