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1 जुलाई से बंद हो जाएगी मनरेगा योजना? अब 'जी राम जी' कानून के तहत मिलेगा ग्रामीण रोजगार

केंद्र सरकार ने कहा कि 2026-27 के लिए आवंटित 95,692.31 करोड़ रुपये ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट अनुमान आवंटन है. राज्यों के संभावित योगदान को शामिल करते हुए, कार्यक्रम का कुल व्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है.

1 जुलाई से बंद हो जाएगी मनरेगा योजना? अब 'जी राम जी' कानून के तहत मिलेगा ग्रामीण रोजगार

मनरेगा के स्थान पर लाए जा रहे नए "जी राम जी" (VB-G RAM G Act) कानून को लागू करने की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं और इसे 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू किया जाना प्रस्तावित है. जानकारी के अनुसार, अब तक 25 राज्यों ने इस नई योजना के लिए अपने हिस्से का फंड भी तय कर दिया है. ग्रामीण विकास और पंचायती राज से जुड़ी स्थायी समिति की बैठक में इस अधिनियम को देशभर में लागू करने की रूपरेखा और तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई. अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न स्तरों पर समन्वय और संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है, ताकि योजना लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास से जुड़े काम व्यवस्थित तरीके से शुरू किए जा सकें.

ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने समिति के सदस्यों को बताया कि 25 राज्यों ने पहले ही इस कार्यक्रम के लिए धन आवंटित कर दिया है और सभी प्रशासनिक एवं नीतिगत कार्रवाइयां शुरू की जा रही हैं. सभी प्रमुख राज्यों ने एक जुलाई से इस योजना को लागू करने के लिए आवश्यक धनराशि आवंटित कर दी है. लाभार्थी श्रमिकों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) 2005 के तहत जारी ‘जॉब कार्ड' के स्थान पर नये ‘स्मार्ट जॉब कार्ड' दिए जाएंगे.

जी राम जी अधिनियम के ढांचे के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, एक वित्त वर्ष में 125 दिन की गारंटीकृत मजदूरी के हकदार होंगे, जो मनरेगा के तहत 100 दिनों की गारंटी से अधिक है. रोजगार निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराना होगा, ऐसा न करने पर श्रमिक अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार बेरोजगारी भत्ता के पात्र बने रहेंगे.

केंद्र सरकार ने कहा कि 2026-27 के लिए आवंटित 95,692.31 करोड़ रुपये ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट अनुमान आवंटन है. राज्यों के संभावित योगदान को शामिल करते हुए, कार्यक्रम का कुल व्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है.

पश्चिम बंगाल की सरकार भी इस नए कानून को लागू करने की तैयारी कर रही है. सूत्रों के मुताबिक अब तक कर्नाटक सरकार ने "जी राम जी" कानून को लागू करने के लिए कर्नाटक सरकार ने करीब 6000 करोड रुपए आवंटित किए हैं, पंजाब सरकार ने 1500 करोड़ और उत्तर प्रदेश में 14 करोड रुपए आवंटित किए हैं.

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