सरकार ने बताया है कि असंगठित क्षेत्र के दो लाख 48 हजार 657 मजदूर पलायन कर उत्तर प्रदेश से दूसरे राज्यों में चले गए हैं. उत्तर प्रदेश में मजदूरों का सबसे अधिक पलायन पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से हुआ है तो सबसे कम पलायन पश्चिम उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से हुआ है. जौनपुर से 15 हजार 463 मजदूरों ने और हापुड़ से मात्र 293 मजदूरों ने ही पलायन किया है. मजदूरों के पलायन के मामले में पश्चिम उत्तर प्रदेश की तुलना में पूर्वी उत्तर प्रदेश आगे है. सरकार ने यह जानकारी लोकसभा में एक सवाल के जवाब में दी है. सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक मजदूर महाराष्ट्र जाते हैं. वहीं सबसे कम मजदूर केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप गए हैं.
सरकार ने यह जानकारी समाजवादी पार्टी की सांसद पुष्पेंद्र सरोज, प्रिया सरोज और इकरा चौधरी की ओर से पूछे गए अतारांकित सवालों के जवाब में दी है.इन सांसदों ने जानना चाहा था कि पिछले पांच सालों में किस राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में उत्तर प्रदेश के कितने प्रवासी कामगार काम कर रहे हैं. उन्होंने मजदूरों के पलायन का जिला वार आंकड़ा मांगा था. इसके साथ ही इन सांसदों ने यह भी जानने की कोशिश की थी कि प्रवासी कामगारों के कल्याण के लिए सरकार कौन सी योजनाएं चला रही है. इन सवालों का जवाब श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा कारान्दलाजे ने दिया.

सरकार ने किस आधार पर दी है जानकारी
सरकार ने बताया है कि श्रम और रोजगार मंत्रालय ने अगस्त 2021 में असंगठित कामगारों का राष्ट्रीय डाटा बेस बनाने के लिए ई श्रम पोर्टल शुरू किया था. यह असंगठित क्षेत्र के कामगारों को खुद ही पोर्टल पर रजिस्टर करने की सुविधा देता है. इस साल 27 जनवरी तक इस पोर्टल पर असंगठित क्षेत्र के 31.49 करोड़ से अधिक कामगारों ने अपनी रजिस्ट्रेशन कराया था.
आइए हम आपको बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के उन पांच जिलों के बारे में जहां से मजदूरों का सबसे अधिक और सबसे कम पलायन होता है. सबसे पहले बात सबसे अधिक पलायन वाले जिलों के बारे में. इस सूची में जौनपुर पहले नंबर पर हैं. वहां से 15 हजार 463 कामगार काम की तलाश में दूसरे राज्य में गए हैं. दूसरे नंबर पर आजमगढ़ है, जहां से 11 हजार 247 लोग काम की तलाश में निकले हैं. तीसरे स्थान पर बलिया का नाम है, वहां से आठ हजार 116 कामगार काम की तलाश में गए हैं. सात हजार 840 कामगारों के साथ गोरखपुर चौथे और सात हजार 767 कामगारों के साथ देवरिया पांचवें नंबर पर हैं. इस तरह हम पाते हैं कि असंगठित क्षेत्र के कामगारों के काम की तलाश में दूसरे राज्यों में सबसे अधिक पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग जाते हैं.
सबसे कम पलायन यूपी के किस जिले से हुआ है
वहीं अगर उत्तर प्रदेश से काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने वाले मजदूरों की सबसे कम संख्या वाले जिलों की बात करें तो इस सूची में 293 लोगों के साथ हापुड़ जिला पहले नंबर पर है. वहीं 687 लोगों के साथ ललितपुर दूसरे, 755 के साथ शामली तीसरे, 845 के साथ सोनभद्र चौथे और 849 लोगों के पलायन के साथ अमरोहा जिला पांचवें नंबर पर है.

असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के काम की तलाश में दूसरे राज्य में जाने के मामले में पश्चिम की तुलना में पूर्वी उत्तर प्रदेश काफी आगे है.
सरकार ने जानकारी दी है कि उत्तर प्रदेश से असंगठित क्षेत्र के सबसे अधिक कामगार महाराष्ट्र जाते हैं. सरकार के मुताबिक पिछले पांच सालों में उत्तर प्रदेश से असंगठित क्षेत्र के 57 हजार 577 कामगार काम की तलाश में महाराष्ट्र गए हैं. इस सूची में दूसरा स्थान हरियाणा का है, जहां काम की तलाश में उत्तर प्रदेश से 48 हजार 49 लोग गए हैं. वहीं 40 हजार 15 मजदूरों के साथ दिल्ली तीसरे और 34 हजार 167 कामगारों के साथ गुजरात चौथे स्थान पर है. उत्तर प्रदेश से 19 हजार 588 कामगार काम की तलाश में पंजाब गए हैं. इस सूची में पंजाब पांचवें नंबर पर है.
अगर हम उन राज्यों की बात करें, जहां उत्तर प्रदेश से सबसे कम मजदूर गए हैं, तो इस सूची में लक्षद्वीप पहले नंबर पर हैं. इस केंद्र शासित राज्य में उत्तर प्रदेश से चार मजदूर गए हुए हैं. इसके बाद छह मजदूर मिजोरम, आठ मजदूर पुदुचेरी, नौ मजदूर केंद्र शासित लद्दाख और 16 मजदूर काम की तलाश में त्रिपुरा गए हैं.
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