- प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को स्वदेशी उत्पाद मेलोडी टॉफ़ी का उपहार दिया था
- पारले कंपनी की शुरुआत 1939 में 12 कर्मचारियों और साठ हजार रुपए से मुंबई के विले पारले में हुई थी
- 1983 में पारले ने भारतीय बाजार में मेलोडी नामक टॉफ़ी को लॉन्च कर चॉकलेट का स्वाद बाजार में उतारा था
मेलॉडी खाओ खुद जान जाओ…ये उस टॉफ़ी की टैग लाइन है जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को दिया था. महज 12 कर्मचारियों और 60 हजार की लागत से विले पारले से शुरु हुई कंपनी देखते ही देखते 16 हजार करोड़ रुपए की कंपनी बन गई. पारले कंपनी 1939 में शुरु हुई थी लेकिन 1983 में मेलोडी नाम की मशहूर टॉफ़ी को कंपनी ने भारतीय बाज़ार में उतारा. ताकतवर मार्केटिंग और विदेशी मंहगे चॉकलेट के बीच इसका स्वाद और सस्ता होने के चलते भारतीय बाज़ार में ये छा गई. ये जानकारी CTI के चेयरमैन ब्रजेश गोयल ने दी.
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री में PM के स्वदेशी उपहार तारीफ
अब प्रधानमंत्री के इस गिफ़्ट की देश-विदेश में चर्चा है. अब व्यापारी संगठन CTI यानि चैंबर आफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री में प्रधानमंत्री के स्वदेशी उपहार की जमकर तारीफ़ की है. CTI के चेयरमैन ब्रजेश गोयल ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के लिए प्रधानमंत्री का ये मास्टर स्ट्रोक बताया.
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— NDTV India (@ndtvindia) May 20, 2026
12 कर्मचारियों और 60000 रुपए से शुरू हुआ बिजनेस
ब्रजेश गोयल ने बताया कि मुंबई के विले पारले इलाके के चौहान परिवार ने 12 कर्मचारियों और 60000 रुपए की मशीनरी से इस कंपनी की शुरुआत की थी. कंपनी ने 1939 में पारले बिस्किट बनाना शुरू किया जो बाद में मशहूर पारले जी बिस्किट के नाम से मशहूर हो गया.इसके बाद पारले ने 1983 में मेलोडी को बाजार में उतारा था.
मेलोडी टॉफ़ी के पीछे साधारण परिवार का संघर्ष
CTI महासचिव रमेश आहूजा और उपाध्यक्ष राहुल अदलखा के अनुसार मेलोडी टॉफ़ी के पीछे एक साधारण से परिवार के भारतीय व्यापारी का संघर्ष छिपा हुआ है, इसीलिए भारत के लोगों को स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए ही पीएम मोदी ने मेलोडी का उपहार मेलोनी को दिया होगा.
पीएम मोदी ने मेलोनी को इसलिए गिफ्ट की मेलोडी
जिस तरह से डॉलर के मुकाबले रूपया गिरता जा रहा है, इसलिए प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि भारत में ज्यादा से ज्यादा लोग विदेशी उत्पादों का उपयोग बंद करके स्वदेशी उत्पादों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें. जिससे कि ना केवल देश का पैसा देश में ही रहेगा बल्कि भारत में कारोबार और रोजगार बढ़कर देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.
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