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जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले कश्मीर की राजनीति गरमाई, महबूबा मुफ्ती ने रखी शर्त

महबूबा ने आगे लिखा, "कश्मीर के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक होने के नाते मुझे विश्वास है कि आप हमारे लोगों के लिए अनुच्छेद 370 के केवल भावनात्मक ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक महत्व को भी समझते हैं. यही कारण है कि कश्मीर की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों, जिनमें पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस शामिल हैं, ने 2024 के चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 की बहाली को प्रमुख एजेंडा बनाया था."

जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले कश्मीर की राजनीति गरमाई, महबूबा मुफ्ती ने रखी शर्त
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती
श्रीनगर:

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से जंतर-मंतर पर प्रस्तावित राज्य का दर्जा बहाली संबंधी विरोध प्रदर्शन के मौजूदा स्वरूप से दूरी बना ली है. उनका कहना है कि यदि प्रदर्शन के एजेंडे में अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई को प्रमुखता दी जाए, तभी पीडीपी उसमें शामिल होगी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में महबूबा मुफ्ती ने लिखा, "गहन विचार-विमर्श के बाद पीडीपी ने जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का फैसला किया है, लेकिन शर्त यह है कि अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई एजेंडे का मुख्य हिस्सा हो."

उन्होंने कहा, "सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अनुच्छेद 370 की बहाली के हमारे व्यापक संवैधानिक संघर्ष के ताबूत में आखिरी कील ठोकने जैसा होगा. इससे भाजपा के 5 अगस्त, 2019 के गैर-कानूनी कदमों को वैधता मिलने का संदेश जाएगा. हमारी लड़ाई संवैधानिक अधिकारों के लिए है, न कि प्रतीकात्मक कदमों के लिए."

'विरोध प्रदर्शन में शामिल होना हमारे लिए उचित नहीं होगा'

महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को लिखे पत्र में कहा, "सबसे पहले, मैं आपको धन्यवाद देना चाहती हूं कि आपने पीडीपी को जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिलाने के लिए जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण दिया. अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंची हूं कि ऐसे विरोध प्रदर्शन में शामिल होना हमारे लिए उचित नहीं होगा, जिसका उद्देश्य केवल राज्य का दर्जा बहाल करना हो."

यह आधी-अधूरी मांग : महबूबा मुफ्ती

उन्होंने पत्र में लिखा, "यह आधी-अधूरी मांग न केवल भाजपा द्वारा अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने के कदम को सही ठहराती है, बल्कि 5 अगस्त, 2019 को किए गए गैर-कानूनी और असंवैधानिक कदम को भी पीछे छोड़ देने का खतरा पैदा करती है. जम्मू-कश्मीर के लोगों ने जिस सामूहिक अपमान और पीड़ा का सामना किया, वह आज भी उनकी सामूहिक स्मृति में मौजूद है."

उन्होंने कहा, "आपने राज्य के लोगों को भरोसा दिलाया था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा और उसकी शेष संवैधानिक शक्तियां बहाल करने के लिए संघर्ष करेगी. लोगों ने आपकी बात पर विश्वास किया और आपकी पार्टी के घोषणापत्र तथा अनुच्छेद 370 की बहाली के शांतिपूर्ण संघर्ष के वादे का समर्थन किया. आपकी पार्टी को मिला जनसमर्थन लोगों की आपसे जुड़ी अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है."

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी लगातार जम्मू-कश्मीर के "छीने गए अधिकारों" को बहाल करने की वकालत करती रही है."Omar Abdullah's खेरा ने कहा, "यह विरोध राज्य का दर्जा पाने के लिए है. कांग्रेस पिछले दो साल से 'स्टेटहुड प्लस' की बात कर रही है. 'स्टेटहुड प्लस' का मतलब सिर्फ़ राज्य का दर्जा नहीं, बल्कि ज़मीन और नौकरी के अधिकारों के लिए संवैधानिक गारंटी भी है. सिर्फ़ राज्य का दर्जा काफ़ी नहीं है."

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Mehbooba Mufti, Jantar Mantar Protest, Article-370
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