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मेघालय: जहां कभी था मेघों का घर, वहां भी टूटा अल नीनो का कहर

सीएम कॉनराड के. संगमा ने मेघालय की क्लाइमेट की अनिश्चितताओं के खिलाफ मजबूती के लिए तुरंत और मिलकर काम करने की अपील की है, क्योंकि राज्य ने अल नीनो के असर से लड़ने के लिए एक एक्शन प्लान शुरू किया है.

मेघालय: जहां कभी था मेघों का घर, वहां भी टूटा अल नीनो का कहर
सीएम संगमा ने कहा कि बारिश की समस्या से सबको मिलकर निपटना होगा.
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मेघालय में भारत में सबसे ज्यादा बारिश होती है. इसके अलावा मेघालय के चेरापूंजी और मौसिनराम गांव दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश वाली जगह है. लेकिन आज वही मेघालय बारिश की कमी से जुझ रहा है. 

कुदरत का मिजाज कुछ ऐसा बदला है कि जून के महीने में मेघालय में उम्मीद से 80 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. इसे देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने एक बड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने साफ लफ्जों में कहा है कि क्लाइमेट चेंज अब कल की बात नहीं, आज की खौफनाक हकीकत बन चुका है.

अल-नीनो से निपटने पर जोर

राजधानी शिलांग में 'अल नीनो की तैयारियों के लिए राज्य की प्रतिक्रिया: खाद्य और जल सुरक्षा को मजबूत करना' विषय पर एक बेहद अहम वर्कशॉप का आयोजन किया गया. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने जो आंकड़े सामने रखे, उसने हर किसी को हैरान कर दिया.

मुख्यमंत्री संगमा ने कहा, "मौसम का मिजाज और उसके पूर्वानुमान भले ही बदलते रहें, लेकिन हमारी तैयारियां नहीं रुकनी चाहिए. हम किसी मुकम्मल प्लान के इंतजार में हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठ सकते. हमें आज और इसी वक्त कदम उठाने होंगे. आज हमारा उठाया हुआ हर एक कदम हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेगा."

सीएम संगमा ने इस बात पर जोर दिया कि इस मौसमी संकट से निपटने के लिए सरकार के अलग-अलग विभाग, स्थानीय समुदायों और संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा. जब तक सब मिलकर कोशिश नहीं करेंगे, तब तक अल नीनो के इस असर को कम करना नामुमकिन होगा.

कुदरती खेती पर जोर

मुख्यमंत्री ने इस बात का भी जिक्र किया कि इस बदलते दौर में 'नेचुरल फार्मिंग' यानी कुदरती खेती एक बड़ा सहारा बन सकती है. इससे सूखे जैसे हालात में भी किसानों को हिम्मत मिलेगी.

हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि कोई भी योजना बनाने से पहले मेघालय के खास भौगोलिक हालातों और यहां की जमीनी जरूरतों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है.

अफसरों कर रहे माथापच्ची

इस वर्कशॉप में सूबे के आला सरकारी अफसर, तमाम जिलों के डिप्टी कमिश्नर (DC), कृषि मामलों के विशेषज्ञ और कई बड़े हितधारक शामिल हुए.

इस महामंथन में मुख्य रूप से दो मोर्चों पर रणनीति तैयार करने की बात कही गई. 

अव्व्ल तो पानी की हिफाजत किया जाए, ताकि कम बारिश के मद्देनजर पीने के पानी और सिंचाई के संकट से कैसे निपटा जाए. दूसरा,  अनाज का संकट से बचने के उपाय, ताकि बारिश न होने की सूरत में फसलों को बर्बाद होने से कैसे बचाया जाए और अनाज का स्टॉक कैसे दुरुस्त रखा जाए.

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