- मणिपुर में दो महिलाओं के साथ गैंगरेप और निर्वस्त्र घुमाने के मामले में CBI ने जमानत को चुनौती दी है.
- CBI ने आरोपियों को दी गई जमानत को कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण बताया.
- सुप्रीम कोर्ट ने CBI की याचिका स्वीकार करते हुए आरोपी अरुण खुंडोंगबाम नानाओ को नोटिस जारी किया और जवाब मांगा.
मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने और गैंगरेप के भयावह मामले में एक अहम कानूनी मोड़ आया है. CBI ने मामले के एक आरोपी अरुण खुंडोंगबाम नानाओ को दी गई जमानत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने CBI की याचिका स्वीकार करते हुए आरोपी को नोटिस जारी किया और कहा कि अदालत इस मामले की विस्तृत जांच/परीक्षण के लिए तैयार है.
CBI ने क्या तर्क दिए?
CBI ने अदालत को बताया कि आरोपी पर बेहद गंभीर आरोप हैं- पहले पीड़ित महिलाओं के साथ गैंगरेप और उसके बाद उन्हें निर्वस्त्र करके भीड़ के बीच घुमाया गया. एजेंसी ने कहा कि ऐसे जघन्य अपराध में राहत न्याय के हित में उचित नहीं है. CBI ने जमानत आदेश को कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण और पीड़ितों के लिए हानिकारक बताया.
पीड़ितों की ओर से क्या कहा गया?
पीड़ित पक्ष के वकील ने कहा कि यदि आवश्यकता हो तो पीड़ितों को लीगल एड काउंसल उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे अदालत में अपनी बात सक्षम रूप से रख सकें.
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सुप्रीम कोर्ट में अभी क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत जमानत आदेश की वैधता की न्यायिक परीक्षा करेगी. आरोपी को नोटिस जारी किया गया है. कोर्ट ने कहा, 'प्रतिवादी अपना जवाब दाखिल करें.' सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल जमानत रद्द नहीं की है, लेकिन संकेत दिए कि मामला गंभीर है और पूरी समीक्षा के बाद फैसला लिया जाएगा.
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