तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोचा भी नहीं होगा कि महज एक महीने के भीतर सरकार से लेकर संगठन तक उनकी पार्टी हाशिये पर आ जाएगी. बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार हुई और ममता की पार्टी 80 सीटों पर सिमट गई, जबकि बीजेपी 208 सीटों के साथ पहली बार प्रचंड बहुमत से बंगाल की सत्ता में आई.परिणाम के 10 दिनों के भीतर टीएमसी के 80 में से करीब 58 विधायकों ने अलग राह अपना ली और ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता विपक्ष घोषित कर दिया. वहीं 8 जून को तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों ने अलग गुट बनाकर एनडीए को समर्थन देने का ऐलान कर दिया. यह घोषणा ऐसे वक्त हुई, जब सत्ता गंवाने के बाद वापसी की कोशिश में जुटीं ममता बनर्जी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल हो रही थीं.
ममता बनर्जी क्या पार्टी पर पकड़ खो देंगी
ममता बनर्जी पर अब पार्टी पर भी पकड़ गंवाने का खतरा मंडरा रहा है. बागी विधायकों और सांसदों की ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नाराजगी भी साफ देखी जा रही है. ऐसे में ममता ने आखिरी दांव चल दिया है. एक तरफ पार्टी के बचे-खुचे सांसद बागी साथियों को वफादारी की नसीहत दे रहे हैं तो दूसरी ओर शीर्ष स्तर पर बागी सांसदों को मनाने की भी कोशिशें हो रही हैं. सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि अलग गुट बनाने के बाद पार्टी अब बागी सांसदों से संपर्क साधने की कोशिश कर रही है. अभिषेक बनर्जी बगावत की राह पर निकल पड़े सांसदों को पाले में बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं. वे बागियों को मनाने में जुटे हैं. वहीं ममता बनर्जी आज शाम 4 बजे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करने वाली हैं.
सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा- हमें फालतू लोग समझा गया
पार्टी असंतुष्ट धड़े को यह बता रही है कि तृणमूल ने उन्हें सब कुछ दिया और कैसे ममता बनर्जी की उनके साथ क्लोज बॉन्डिंग थीं. हालांकि बागी सांसद अपने रुख पर अड़े हैं. इन सांसदों ने अपने पहले से तय रुख की ओर कदम बढ़ा दिए हैं. तृणमूल सांसदों में सबसे पहले बगावत करने वाले सुखेंदु शेखर रॉय ने एनडीटीवी से कहा कि टीएमसी में बहुत भ्रष्टाचार है. हम पार्टी में थे, कमेटी में थे, लेकिन उन्हें लगता है कि हम फालतू लोग हैं. कोई समीक्षा बैठक नहीं होती थी.ममता दीदी ने विधानसभा चुनाव में हार मानी ही नहीं. ममता दीदी शिष्टाचार मानने के लिए तैयार नहीं थीं.
एक हफ्ते तक हमारे साथ बैठे थे बागी सांसद: कल्याण बनर्जी
वहीं टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने कहा, अभी हम कोई कानूनी कदम नहीं उठा रहे हैं. अमित शाह हमारी पार्टी को तोड़ने का काम कर रहे हैं. अभी हम स्पीकर के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. ये सब लोग 7 दिन पहले तक हमारे साथ बैठे थे और बोल रहे थे कि हम दीदी को छोड़ कर नहीं जाएंगे. मीडिया में खबर आने के बाद हमे सांसदों के जाने का पता चला. उन्होंने कहा, हमें बहुत खुशी है कि दोहरे चरित्र वाले लोग चले गए हैं। जो जाना चाहता है, जा सकता है. हमें आपके जाने से कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन आप तृणमूल और ममता बनर्जी का नाम नहीं ले सकते. जनता सच्चाई जानती है और वह हमारे साथ खड़ी है. उन्होंने दावा किया कि भाजपा इनमें से किसी को भी अपने साथ नहीं लेगी. उनके पास किसी अन्य पार्टी में विलय करने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है.
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टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने बागियों को गद्दार कहा
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा, हमारे कार्यकर्ताओं को जब बीजेपी के लोग मारेंगे तो क्या उनको देखोगे. बीजेपी में जाना है तो इस्तीफा देकर जाओ.शुभेंदु अधिकारी को तो ऑन कैमरा पैसा लेते हुए देखा गया. हम बंगाल में हारे नहीं हैं, हमें मिलकर हराया गया है. भागने वाले भगोड़ों, गद्दारों ये समझ लेना कि अगले चुनाव में बंगाल में बीजेपी साफ हो जाएगी. काकोली घोष को पांच चुनाव हारने के बाद दीदी ने सांसद बनाया. काकोली को व्हिप पद से हटाया गया था क्योंकि ये संसद में आती नहीं थीं. संघर्ष के साथ TMC खड़ी हुई है. ममता बनर्जी के खून पसीने से ये पार्टी खड़ी हुई है. आने वाले दिनों में देखना कि तृणमूल फिर से खड़ी होगी. घायल शेर ज्यादा खतरनाक होता है.
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