ममता बनर्जी के सामने पार्टी बचाने का संकट. (फाइल फोटो)
- बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं
- ममता बनर्जी के विधायक और सांसद एक-एक कर उनका साथ छोड़ने लगे हैं
- सवाल यह है कि ममता बनर्जी अब टीएमसी को बचाने के लिए कौन सा विकल्प अपनाएंगी
ममता बनर्जी के बुरे वक्त में उनके अपने एक-एक कर उनका साथ छोड़ने लगे हैं. बंगाल में 15 साल की सत्ता से हाथ धोने के बाद ममता की पार्टी ताश के पत्तों की तरह ढहती नजर आ रही है. ममता का फोकस दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की मजबूती पर था. इस बीच बड़ा खेला हो गया. टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर राय ने न सिर्फ सांसदी छोड़ी बल्कि टीएमसी से भी किनारा कर लिया. उन्होंने अपना इस्तीफा ममता बनर्जी को ईमेल के जरिए सौंपा. पहले विधायकों और अब सांसदों की टूट टीएमसी के लिए बड़े झटके से कम नहीं है. बंगाल में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से टीएमसी में अब तक क्या-क्या हुआ जानें सबकुछ.
- ममता बनर्जी की टीएमसी तीन हिस्सों में बंटी नजर आ रही है. सांसदों का एक धड़ा लोकसभा सांसद कोकोली घोष के साथ है. दूसरा गुट ममता के साथ खड़ा है. वहीं तीरा गुट न ममता के साथ है और ना हीं बागियों के साथ है. दरअसल 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर एनडीए में शामिल होने की इच्छा जाहिर की है.
- टीएमसी के 60 से ज्यादा विधायकों के बागी होने के बाद 28 में से 20 सांसदों ने ममता से बगावत कर दी है. साथ ही और तो और, नगर निगम में भी ममता को बड़ा झटका लगा है. कोलकाता के मेयर रहे फिरहाद हकीम ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद राज्यपाल आरएन रवि ने कोलकाता नगर निगम (KMC) में एडमिनिस्ट्रेटर को नियुक्त कर दिया है. मतलब यह कि अब कोलकाता नगर निगम (KMC) को स्मिता पांडे हेड करेंगी.
- टीएमसी के 11 सांसदों ने पहले बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के साथ मीटिंग की. बाद में बागी गुट ने दावा किया कि 20 सांसद उनके साथ हैं. इतना ही नहीं बागियों ने काकोली घोष को अपना नेता चुनते हुए एनडीए को समर्थन देने का ऐलान कर दिया. टीएमसी के बागी कह रहे हैं कि उनकी नाराजगी ममता बनर्जी से नहीं बल्कि अभिषेक बनर्जी से हैं.
- सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल, बागी सांसदों की स्पीकर के साथ कोई मुलाक़ात तय नहीं हुई है. हो सकता है कि वे आज उनसे न मिलें. अब ममता के एक और राज्यसभा सांसद के एक-दो दिन में इस्तीफ़ा देने की संभावना है. यूसुफ़ पठान के भी बागी गुट में शामिल होने की चर्चा तेज है. माना जा रहा है कि वह भी जल्द दिल्ली पहुंच सकते हैं.
- ममता बनर्जी ने जिस टीएमसी का गठन कर उसे अपनी मेहनत के बल पर 13 साल में फर्श से अर्श तक पहुंचाया वह अब उनके हाथों से निकलती नजर आ रही है. टीएमसी के 58 विधायक बगावत कर चुके हैं. अब 20 सासंद भी बागी होते दिख रहे हैं.
- सवाल यह है कि अब ममता के पास क्या विकल्प बचा है. बता दें कि दो-तिहाई विधायकों के बगावत करने के बाद टीएमसी सुप्रीमो ने पार्टी की तमाम कमेटियों और संगठनों को भंग कर दिया है. वह चुनावी नतीजों के विश्लेषण की बात कह रही हैं.
- टीएमसी का 16 सालों से यानी कि 2010 से KMC में कब्जा था. 5 जून को मेयर पद से इस्तीफा देने वाले फिरहाद हकीम नवंबर 2018 में कोलकाता के मेयर बने थे. वह आजादी के बाद कोलकाता के पहले मुस्लिम मेयर बने थे. उनके इस्तीफे के साथ ही KMC से टीएमसी का राज खत्म हो गया.
- ममता बनर्जी 8 जून को दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल हुईं. बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने निशाना साधते हुए कहा कि 'इंडिया' गठबंधन में अब कुछ नहीं बचा है, तो इसका क्या फायदा? उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि ममता बनर्जी पहले कभी इसमें शामिल नहीं होती थीं, लेकिन अब मजबूरी में जा रही हैं. जिनके साथ उनकी पार्टी के सांसद, विधायक नहीं हैं, वे दूसरी पार्टी के साथ जा कर क्या करेंगी?
- टीएमसी के एक और गुट बनने पर दिलीप घोष ने कहा कि बैठक में न तो विधायक आए और न ही सांसद. किसी को नहीं पता कि पार्षद कहां हैं, वे गायब हैं, वे दफ्तर नहीं आते. यह ऐसी पार्टी है कि सत्ता से हटते ही पूरी तरह खत्म हो गई है. टीएमसी का विसर्जन होना ही था. अब जनता के जनादेश को मान लेना चाहिए.
- ममता बनर्जी कई मौकों पर कांग्रेस की क्षमता पर सवाल उठाते नजर आ चुकी हैं. अब बंगाल में करारी हाल और पार्टी में फूट जैसे हालातों से जूझ रहीं ममता अब सुलह का रास्ता अपनाती नजर आईं. दिल्ली में बैठक शुरू होने से पहले उनकी सोनियां गांधी को गले लगाते एक तस्वीर सामने आई थी. माना जा रहा है कि दोनों के बीच करीब 10 मिनट की बैठक हुई थी.
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