पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में पेश हुईं. वो विधानसभा चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा और पार्टी दफ्तरों पर हमलों के मामले में दलीलें पेश करने के लिए आई थीं. वो वकील का गाउन पहनकर हाई कोर्ट पहुंची थी. यह मामला तृणमूल कांग्रेस की ओर से वकील शीर्षन्या बंद्योपाध्याय की ओर से दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है. इस याचिका में 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद पार्टी कार्यालयों पर हमलों और उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा का आरोप लगाया गया है. इसके बाद से बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को एक नोटिस जारी कर ममता बनर्जी के वकील के रूप में पंजीकरण को लेकर सफाई मांगी है. आइए हम आपको बताते हैं कि अदालत में पेश होते समय पुरुष और महिला वकील को किस तरह की ड्रेस पहननी होती है.
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने क्या जानकारी मांगी है
बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को भेजे नोटिस में ममता बनर्जी के वकील के रूप में पंजीकरण और वकालत के संबंध में रिपोर्ट मांगी है. बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार एसोसिएशन से दो दिन में रिपोर्ट तलब की है. बीसीआई ने यह बताने को कहा है कि क्या ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री रहते हुए बार लाइसेंस निलंबित करने की मांग की थी.
पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के सचिव को लिखे पत्र में, बीसीआई ने कहा है कि उसे मीडिया रिपोर्टों से ममता बनर्जी के हाई कोर्ट के समक्ष वकील की ड्रेस, जिनमें सफेद पट्टियां भी शामिल थीं, पहने हुए उपस्थित होने की जानकारी मिली है. ममता बनर्जी के 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में काम करने का उल्लेख करते हुए बीसीआई ने कहा है कि उक्त अवधि के दौरान उनके द्वारा धारित संवैधानिक सार्वजनिक पद को ध्यान में रखते हुए और इस स्तर पर उनकी उपस्थिति पर कोई राय व्यक्त किए बिना, बार काउंसिल ऑफ इंडिया को आपके अभिलेखों से उनके रजिस्ट्रेशन, प्रैक्टिस, सस्पेंशन (यदि कोई हो) और फिर से प्रैक्टिस करने (यदि कोई हो) की वास्तविक स्थिति सत्यापित करने की जरूरत है."
कहां लिखा गया है वकीलों के लिए ड्रेस कोड
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की बेवसाइट पर वकीलों के आचरण के लिए तैयार नियमों में अन्य बातों के अलावा वकीलों पर लागू होने वाले पेशेवर आचरण और शिष्टाचार के मानक निर्धारित हैं. बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के भाग छह के अध्याय चार, जिसका शीर्षक 'अधिवक्ताओं द्वारा पहने जाने वाले कपड़ों का स्वरूप'है, इसमें सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, जिला अदालतों, न्यायाधिकरणों या प्राधिकरणों में पेश होने वाले वकीलों की ओर से पहने जाने वाले वस्त्रों का प्रावधान है.इसमें निर्धारित तरीके से बैंड और अधिवक्ताओं के गाउन पहनना शामिल है. इसके के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, अधीनस्थ अदालतों, ट्रिब्यूनल या अन्य प्राधिकरणों में पेश होने वाले वकीलों का पहनावा सादा, गरिमापूर्ण और शालीन होना चाहिए.
पुरुष वकीलों की ड्रेस क्या है
1-काला बंद कोट, चपकन, अचकन या काली शेरवानी
सफेद बैंड
वकीलों का गाउन
2-काला खुला कोट ट
सफेद शर्ट
सफेद कॉलर (कड़ा या मुलायम)
सफेद बैंड
वकीलों का गाउन
इन दोनों स्थितियों में नीचे इनमें से कोई पहना जा सकता है- लंबी पैंट (सफेद, काली धारियों वाली या ग्रे रंग की) या धोती. लेकिन जींस पहनना मान्य नहीं है. इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, जिला अदालत, सेशन कोर्ट या सिटी सिविल कोर्ट के अलावा अन्य अदालतों में सफेद बैंड की जगह काली टाई भी पहनी जा सकती है.
महिला वकीलों के लिए ड्रेस कोड क्या है
1-काली फुल स्लीव जैकेट या ब्लाउज
सफेद कॉलर (कड़ा या मुलायम)
सफेद बैंड
वकीलों का गाउन
या
सफेद ब्लाउज (कॉलर हो या न हो)
सफेद बैंड
काला खुला कोट
2- महिला वकील इनमें से कोई भी पहन सकती हैं: साड़ी (साड़ी का रंग सफेद, काला, ग्रे या हल्के साधारण होना चाहिए और उन पर कोई छपाई या डिजाइन नहीं होना चाहिए ) या लंबी स्कर्ट या फ्लेयर या पंजाबी ड्रेस चूड़ीदार-कुर्ता या सलवार-कुर्ता (काला या सफेद दुपट्टे के साथ या बिना). इसके साथ काला कोट और सफेद बैंड पहनना जरूरी है.
गाउन पहनने का नियम
वकीलों के लिए गाउन पहनना वैकल्पिक है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में पेश होते समय गाउन पहनना जरूरी है.
काला कोट कहां पहनना है और कब और कहां नहीं पहन सकते हैं
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को छोड़कर बाकी की अदालतों या प्राधिकरणों में गर्मियों में काला कोट पहनना जरूरी नहीं है. ऐसी स्थिति में वकील सफेद शर्ट, काली या काली धारियों वाली या ग्रे पैंट और काली टाई या सफेद बैंड और कॉलर पहनकर अदालत में पेश हो सकते हैं.
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