FAQ: मकर संक्रांति 15 जनवरी को कब तक रहेगी? 23 साल वाला संयोग क्या? आपके हर सवाल का जवाब
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान के साथ पूजा पाठ और दान का विशेष महत्व है. हरिद्वार, कानपुर, प्रयागराज से लेकर बंगाल में गंगा सागर पर लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा है. आइए जानते हैं मकर संक्रांति के बारे में खास बातें
देशभर में आज मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जा रहा है. कानपुर, प्रयागराज, हरिद्वार से लेकर बंगाल में गंगा सागर तक हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ गंगा स्नान को उमड़ी है. मकर संक्रांति स्नान पर्व पर हरिद्वार के हर की पैड़ी, प्रयागराज में संगम तट पर सुबह 3-4 बजे से गंगा किनारे श्रद्धालु डुबकी लगाने पहुंचे. घने कोहरे और भयंकर ठंड पर श्रद्धालुओं का जोश भारी पड़ता दिखा. हरिद्वार में ढोल और दमाऊं की थाप के बीच देव डोलियों को लाया गया और गंगा स्नान कराया गया. गंगा के सभी घाटों पर लोग स्नान दान और पूजा करते देखे गए. गंगा घाट पर आरती की गई. उत्तर प्रदेश में भी कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज जैसे शहरों में गंगा किनारे सुबह के वक्त लोग स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पण के साथ पूजा अर्चना करते देखे गए. (माघ मेले की दिव्य तस्वीरें ). लेकिन मकर संक्रांति इस बार थोड़ा हटकर है. इसमें 23 साल वाला एकादशी का संयोग है, तो दो दिन का फेर भी है. जानिए मकर संक्रांति से जुड़े हर सवाल का जवाब...
मकर संक्राति के चार शुभ मुहूर्त
अमृत मुहूर्तः सुबह 7.59 बजे से 9.19 बजे तक शुभ मुहूर्तः सुबह 10.39 बजे से 11.59 बजे तक अभिजित मुहूर्तः दोपहर 11.37 बजे से 12.20 बजे तक चर-लाभ मुहूर्तः दोपहर 2.38 बजे से शआम 5.18 बजे तक
23 साल वाला संयोग क्या है?
षटतिला और मकर संक्राति का दुर्लभ मिलन हो रहा है. 23 साल बाद ऐसा संयोग बना है. आज सूर्य रात 9.29 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे.
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मकर संक्रांति कब मनाई जाती है, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है. वर्ष 2026 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 9 बजकर 29 मिनट पर हो रहा है. मकर संक्रांति पंचांग चंद्र तिथि के बजाय सौर पंचांग के अनुसार निर्धारित होता है, जिसका अर्थ है कि यह चंद्र चरण के बजाय सूर्य के गोचर द्वारा निर्धारित होता है. 2026 में मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी के दिन पड़ रही है.
सूर्य का संक्रांति यानी प्रवेश दोपहर बाद हो रहा है और उदया तिथि 15 जनवरी को है. लिहाजा ज्योतिषी और विद्वान 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति को स्नान-दान और पूजा के शुभ मान रहे हैं. हालांकि हरिद्वार, प्रयागराज, गंगा सागर में स्नान की भारी भीड़ 14 जनवरी को उमड़ी है. कुछ श्रद्धालु 14 जनवरी को खिचड़ी और 15 को संक्रांति मना रहे हैं.
मकर संक्रांति पर स्नान-दान का विशेष महत्व है. इस दिन तिल-गुड़, खिचड़ी, फल, कंबल आदि का दान करते हैं. भक्तगण पवित्र स्नान करते हैं, सूर्य देव को जल, फूल, तिल और भोजन दान करते हैं ताकि उन्हें स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त हो सके.
आचार्य रोहित गुरु बताते हैं कि जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, तो उसे उत्तरायण कहा गया है. इस साल यह तिथि 14 जनवरी को पड़ रही है. रात में 9 बजकर 29 मिनट पर मकर राशि में सूर्य का प्रवेश हो रहा है. इसका पुण्यकाल दोपहर 15 जनवरी 2.25 मिनट तक रहेगा.
मकर संक्रांति से सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण हो जाते हैं. सूर्य उत्तर की ओर झुकने लगता है. इससे दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं और कड़ाके की ठंड कम होने लगती है. इसे सुख समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात और राजस्थान में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी भी खूब देखने को मिलती है. यह खुशी और नई उमंग का प्रतीक है.
उत्तर भारत में मकर संक्रांति या खिचड़ी मनाते हैं. तमिलनाडु में पोंगल, असम में माघ बिहू और गुजरात में उत्तरायण नाम से त्योहार मनाते हैं.
सर्दियों में शरीर को गर्मी देने के लिए तिल और गुड़ के लड्डू खाए जाते हैं. महाराष्ट्र में लोग "तिलगुल घ्या, गोड-गोड बोला" (तिल-गुड़ खाओ और मीठा बोलो) कहकर प्रेम बांटते हैं.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि देव से मिलने उनके घर (मकर राशि) में जाते हैं. वैसे सूर्य और शनि में अनबन मानी जाती है. इस दिन सूर्य देव स्वयं पहल कर रिश्तों में सुधार का संदेश देते हैं.
महाभारत काल में भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था. उन्होंने मृत्यु के लिए उत्तरायण (मकर संक्रांति का समय) चुना था. मान्यता है कि इस काल में प्राण त्यागने वाले को मोक्ष मिलता है और उसे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिल जाती है.
मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को दोपहर 2.25 तक रहेगा.
तिल के पांच नियम बताए गए हैं. 1-तिल से स्नान करें. 2- तिल का सेवन करें, 3-तिल का तेल लगाएं, 4-तिल का दान करें, 5- दिल का होम (हवन) करें.