Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का त्योहार देशभर में मनाया जा रहा है, हर साल 14 जनवरी को लोग ये त्योहार मनाते हैं. हालांकि इस बार की ज्योतिषीय गणना के हिसाब से 15 जनवरी को इस त्योहार को मनाने की बात कही जा रही है. यही वजह है कि यूपी सरकार ने 14 जनवरी की सरकारी छुट्टी को 15 जनवरी कर दिया. मकर संक्रांति सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक खगोलीय घटना है. यानी इसके पीछे साइंस भी काम करती है और इस त्योहार का अपना वैज्ञानिक आधार है. आज हम आपको मकर संक्रांति के पीछे के पूरे साइंस के बारे में बताएंगे.
क्या होती है मकर संक्रांति?
सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करता है तो उस दिन को मकर संक्रांति के तौर पर मनाया जाता है. राशि, नक्षत्र और सूर्य की स्थिति पर निर्भर करता है कि कब मकर संक्रांति का मुहूर्त होगा. सूरज इस दिन अपनी चाल बदलता है और दक्षिण से उत्तर की तरफ बढ़ने लगता है. यही वजह कि इसे उत्तरायण भी कहा जाता है. इसके बाद दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं और सर्द हवाएं थोड़ी कम हो जाती हैं. इसी वजह से लोग अक्सर कहते हैं कि मकर संक्रांति के बाद ठंड कम होने लगेगी.

क्या है इसके पीछे का साइंस?
खगोल विज्ञान में Capricorn को ही भारतीय ज्योतिषशास्त्र में मकर राशि कहा जाता है. तारों से बनने वाले एक समूह को हर सभ्यता में एक नाम दिया गया है. ये नाम उनके आकार पर आधारित होते हैं, जैसे- मकर, मेष, कर्क और बाकी राशियों के नाम रखे गए हैं. धरती को सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में करीब एक साल का वक्त लगता है. जब सूर्य किसी तारा समूह यानी राशि के सामने आता है तो उसे इसमें प्रवेश करना कहा जाता है. जैसे मकर राशि (Capricorn) में प्रवेश होने पर मकर संक्रांति मनाई जाती है.

क्यों बड़े होते हैं दिन?
हमारी पृथ्वी अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री एंगल पर झुकी हुई है, जिससे सूरज की रोशनी हर जगह पर अलग-अलग पड़ती है. इसी वजह से हमारे अलग-अलग मौसम होते हैं, जैसे- सर्दी और गर्मी... धरती जैसे-जैसे सूरज के चक्कर लगाती है, वैसे ही सूर्यास्त और सूर्योदय का समय भी बदलता रहता है. मकर संक्रांति के बाद दिन लंबे इसलिए होने लगते हैं, क्योंकि 15 जनवरी के बाद सूर्यास्त का वक्त बदलने लगता है. हालांकि 21 दिसंबर के बाद से ही सूरज उत्तर दिशा की तरफ बढ़ना शुरू कर देता है, जिसे Winter Solstice कहते हैं.
क्यों बदलती है तारीख?
अंग्रेजी कैलेंडर यानी ग्रेगोरियन कैलेंडर सूर्य पर आधारित है, ऐसे में खगोलीय घटनाओं की तारीख नहीं बदलती है. वहीं भारत में ज्योतिषीय कैलेंडर या हिंदू कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित है. यही वजह है कि भारत में कई हिंदू त्योहारों की तारीख बदलती रहती है, जैसा मकर संक्रांति के साथ होता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं