विज्ञापन
3 hours ago

सनातन परंपरा में प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है क्योंकि यह जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान श्री विष्णु के जप-तप और व्रत के लिए अत्यंत ही पुण्यदायी मानी गई है. इस पावन एकादशी तिथि का महत्व तब और ज्यादा बढ़ जाता है, जब यह माघ मास के कृष्णपक्ष में पड़ती है और ​षटतिला एकादशी कहलाती है. पंचांग के अनुसार जीवन से जुड़े सभी दोष और पाप को दूर करके अक्षय पुण्य दिलाने वाली षटतिला एकादशी का पावन व्रत आज रखा जा रहा है. आज षटतिला एकादशी के साथ मकर संक्रांति का भी शुभ संयोग बन रहा है. ऐसे में भगवान लक्ष्मी नारायण और सूर्य नारायण दोनों की कृपा पाने के लिए आज किस विधि से करें भगवान विष्णु का पूजन? पुण्य की प्राप्ति और दोष से बचने के लिए क्या करें और क्या न करें? षटतिला एकादशी व्रत से जुड़ी सभी अहम जानकारी को पाने के लिए देखें विस्तृत कवरेज.

Shattila Ekadashi Vrat  LIVE UPDATES:

सारे तीरथ बार-बार, गंगा सागर एक बार

मकर संक्रांति के पावन पर्व पर तमाम जलतीर्थों में गंगासागर स्नान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार सारे तीर्थ स्थान स्नान-दान का जो पुण्यफल है, वह आप गंगासागर में जाकर एक बार स्नान-दान करके प्राप्त कर सकते हैं. हिंदू धर्म में गंगासागर को एक पवित्र तीर्थ के रूप में माना गया है क्योंकि इसी पावन स्थान पर गंगा जी सागर में मिलती हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार इसी पावन स्थान पर कभी राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को मुक्ति मिली थी. कुछ ऐसी ही कामना लिए लोग बड़ी संख्या में गंगा सागर पहुंचे हुए हैं. यहां पर हर साल की भांति आस्था का महामेला लगा हुआ है और लोग सुबह से ही बड़ी संख्या में पुण्य की चाह में स्नान-दान करने के लिए पहुंच रहे हैं. 

लक्ष्मीनारायण और सूर्य नारायण की पूजा का अजब संयोग

सनातन परंपरा में षटतिला एकादशी तिथि को जहां भगवान श्री विष्णु की पूजा के लिए अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है, वहीं मकर संक्रांति के पावन पर्व श्री हरि का ही स्वरूप माने जाने वाले सूर्य नारायण की पूजा का अत्यधिक पुण्यफल माना जाता है. शायद यही कारण है कि षटतिला एकादशी के पावन पर्व पर श्रद्धालु प्रयागराज के संगम तट पर अपने स्वयं के साथ लड्डू गोपाल को भी त्रिवेणी संगम में डुबकी लगवाकर उनकी साधना-आराधना करके विशेष पुण्यफल प्राप्त कर रहे हैं. 

15 जनवरी को मकर संक्रांति के स्नान-दान का मिलेगा पुण्यफल

जाने माने भागवताचार्य पं. हृदेश शास्त्री के अनुसार भले ही आज सूर्य देवता मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे लेकिन आज षटतिला एकादशी पर्व होने के कारण खिचड़ी का दान संभव नहीं हो पाएगा. ऐसे में मकर संक्रांति का स्नान और दान कल अत्यधिक शुभ माना जाएगा. कल 15 जनवरी 2026 को ही मकर संक्रांति का स्नान और दान का पूर्ण पुण्यफल प्राप्त होगा. पं. हृदेश शास्त्री के अनुसार माघ मेला क्षेत्र में खिचड़ी के दान और खिचड़ी प्रसाद का वितरण भी लोग कल ही करेंगे. 

प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर लाखों लोग लगा रहे हैं आस्था की डुबकी

प्रयागराज माघ मेले में षटतिला एकादशी पर्व के मौके सुबह 8 बजे तक लगभग 15 लाख श्रद्धालु कर चुके हैं. वहीं मकर संक्रांति का मुहूर्त आज दोपहर 3.30 बजे से प्रारंभ होगा. एक साथ दो पर्व के संयोग के कारण प्रयागराज के त्रिवेणी संगम यानि मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती के पावन संगम स्थल पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं. अनुमान है कि कल संगम पर स्नान करने वालों का आंकड़ा एक करोड़ से ज़्यादा पहुंच जाएगा. 

सूर्य के संक्रमण काल से जुड़ा है मकर संक्रांति का महापर्व

मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपनी स्थिति बदल कर दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाता है. महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी बाणों की शैय्या पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था. सनातन परंपरा में मकर संक्रांति के पर्व को सूर्य के संक्रमण काल का पर्व भी माना जाता है. सनानत परंपरा में मकर संक्रांति का पर्व  प्रतिदिन प्रत्यक्ष दर्शन देने वाले भगवान भास्कर यान सूर्य देव की विशेष साधना और स्नान-दान के लिए अत्यंत ही पुण्यदायी माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा जैसे पवित्र जल तीर्थ पर स्नान करके सूर्यदेव को तांबे के पात्र या फिर अंजुलि से तिल मिश्रित जल देने पर अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.

Track Latest News Live on NDTV.com and get news updates from India and around the world

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com