- ED ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में त्रिपुरा, बंगाल और मिजोरम में छापेमारी की.
- जांच में पता चला कि म्यांमार से मेथामफेटामाइन की मिजोरम बॉर्डर के जरिए भारत में तस्करी की जाती थी.
- ड्रग से कमाए पैसे को बैंक खातों, फर्जी कंपनियों, कैश और हवाला नेटवर्क के जरिए छिपाने का प्रयास किया गया था.
अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने PMLA एक्ट के तहत त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और मिजोरम में चार ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई एक बड़े क्रॉस-बॉर्डर ड्रग सिंडिकेट से जुड़े मामले में की गई है. ED ने यह जांच नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी NCB की अगार्टला जोनल यूनिट में दर्ज केस के आधार पर शुरू की थी.
NCB ने NDPS एक्ट के तहत यह मामला दर्ज किया था. जांच उस वक्त शुरू हुई थी जब 21 अगस्त 2025 को मिजोरम में NH-06A पर एक गाड़ियों के काफिले को रोककर तलाशी ली गई थी.

भारी मात्रा में नशीला पदार्थ बरामद
तलाशी के दौरान NCB ने भारी मात्रा में नशीला पदार्थ बरामद किया था. इसमें करीब 49.101 किलो मेथामफेटामाइन की गोलियां और 40 ग्राम हेरोइन शामिल थी. इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था.
NDPS एक्ट की धाराएं PMLA के तहत शेड्यूल अपराध में आती हैं, इसलिए ED ने मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच शुरू की.
ED की जांच में सामने आया कि यह कोई सामान्य तस्करी का मामला नहीं था, बल्कि एक संगठित अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क चल रहा था. जांच के मुताबिक, यह सिंडिकेट म्यांमार से मेथामफेटामाइन मंगाता था, फिर मिजोरम के चम्फाई और जोखावथर बॉर्डर सेक्टर के जरिए भारत में इसकी तस्करी की जाती थी.
ड्रग से कमाए पैसों को ऐसे छिपाया जाता था
इसके बाद ड्रग की खेप को त्रिपुरा में मौजूद रिसीवर्स तक पहुंचाया जाता था. ED का आरोप है कि ड्रग से कमाए गए पैसों को छिपाने के लिए बैंक अकाउंट्स, फर्जी कंपनियों, कैश और हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया.
जांच एजेंसी ने अब तक इस नेटवर्क में 142 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेन-देन की पहचान की है. ED के मुताबिक, यह पैसा अलग-अलग खातों और शेल कंपनियों के जरिए घुमाकर इसके असली सोर्स और लाभार्थियों को छिपाने की कोशिश की गई.

मुख्य आरोपी पहले ही NCB की गिरफ्त में
इस मामले में म्यांमार से ड्रग सप्लाई करने वाले मुख्य आरोपी चिंतुआंग उर्फ त्लुआंगा और ड्रग ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के मुख्य सहयोगी जब्रुल हक को पहले ही NCB गिरफ्तार कर चुकी है.
ED की टीम ने जिन चार ठिकानों पर छापेमारी की, उनमें त्रिपुरा के सोनामुरा इलाके के रहने वाले अनवर हुसैन उर्फ सुमन मियां उर्फ करोड़पति सुमन और जाशिम मियां के ठिकाने शामिल हैं. ED के मुताबिक, दोनों जब्त की गई ड्रग खेप के अंतिम रिसीवर बताए जा रहे हैं.
इसके अलावा मिजोरम के जोखावथर में रहने वाली ह्मिंगथानसांगी के ठिकाने पर भी कार्रवाई की गई. जांच में उसके बैंक खाते में 33 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध क्रेडिट मिले हैं.
पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना में रिजू एंटरप्राइजेज की प्रोपराइटर चैताली दास के ठिकाने पर भी छापेमारी हुई. ED को शक है कि इस फर्म का इस्तेमाल अपराध से कमाए गए पैसे को आगे भेजने के लिए किया गया.

पेड़ों पर लगाए गए थे 25 से ज्यादा CCTV कैमरे
छापेमारी के दौरान ED को कई चौंकाने वाली चीजें मिलीं. अधिकारियों को 25 से ज्यादा CCTV कैमरे मिले, जो पेड़ों पर लगाए गए थे. ये कैमरे जंगल वाले इलाकों और भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास की निगरानी के लिए लगाए गए थे.
जांच एजेंसी के मुताबिक, सुमन मियां और जाशिम मियां के घर भारत-बांग्लादेश सीमा से बिल्कुल सटे हुए थे, जबकि जोखावथर में जिस जगह कार्रवाई हुई वह म्यांमार बॉर्डर से 500 मीटर से भी कम दूरी पर थी.
तलाशी के दौरान CRPF और BSF की मदद भी ली गई. संदिग्ध ठिकानों से ED ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और जांच से जुड़े दूसरे सबूत जब्त किए हैं.
ED अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों, पैसों के लेन-देन और ड्रग तस्करी से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कर रही है. मामले में आगे की कार्रवाई जारी है.
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