- ईडी ने आजम खान से जुड़े रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में 10 ठिकानों पर छापेमारी की है.
- यूनिवर्सिटी पहले से ही कानूनी संकट में है. 38 इमारतों को गिराने के आदेश पर अंतरिम रोक लगी है.
- जौहर अली यूनिवर्सिटी को इनकम टैक्स सहित कई विभागों से नोटिस मिल चुके हैं.
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी नेता आजम खान के ठिकानों पर ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय ने छापेमारी की है. रामपुर में आजम खान के कई ठिकानों पर ईडी ने रेड की है. प्रवर्तन निदेशालय ने जौहर यूनिवर्सिटी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई की है. ED के लखनऊ जोनल ऑफिस की टीम ने आज उत्तर प्रदेश के रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में कुल 10 ठिकानों पर छापेमारी की है. यह कार्रवाई PMLA यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की गई है. दरअसल, आजम खान के खिलाफ दर्ज करीब कई दर्जन मामलों की लिस्ट ED से साथ शेयर की गई थी. ईडी का ये एक्शन ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी पर हुआ है.
मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट ने यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने के रामपुर विकास प्राधिकरण यानी RDA के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. इस मामले की अगली कानूनी सुनवाई 25 अगस्त को होनी है.
ईडी ने किन आरोपों के तरत कार्रवाई की है?
ईडी की जांच में आरोप है कि सरकारी ठेकों से मिलने वाले पैसों को कथित तौर पर दूसरे रास्तों से डायवर्ट किया गया और बाद में इन पैसों का इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े ट्रस्ट के लिए संपत्तियां बनाने और दूसरे कामों में किया गया. एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी ठेकों से आया पैसा किन लोगों और कंपनियों के जरिए कहां-कहां भेजा गया.
जांच के दौरान ED को कुछ ऐसे फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के बारे में जानकारी मिली है, जिनमें सरकारी ठेके लेने वाले कुछ ठेकेदारों और जौहर ट्रस्ट के बीच पैसों का लेन-देन सामने आया है. एजेंसी को शक है कि कुछ ऐसे ठेकेदार, जिन्हें सरकारी कामों से आर्थिक फायदा हुआ, उन्होंने कथित तौर पर उस पैसे का एक हिस्सा ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी तक पहुंचाया.
कई पहलुओं पर हो रही जांच...
ईडी के मुताबिक, इन लेन-देन में बड़ी रकम के डोनेशन और यूनिवर्सिटी में कराए गए निर्माण कार्य भी जांच के दायरे में हैं. यानी जांच सिर्फ बैंक खातों में पैसे के ट्रांसफर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि सरकारी ठेकों से जुड़े पैसों का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट की संपत्तियां बनाने में किस तरह किया गया.
19 अगस्त की छापेमारी का मुख्य मकसद कथित 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' यानी अपराध से हासिल रकम का पता लगाना है. इसके अलावा, ईडी की टीम वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज, लेन-देन से जुड़े कागजात और डिजिटल सबूत भी जुटा रही है. सर्च के दौरान मिले दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस आगे की जांच में अहम हो सकते हैं.
फिलहाल, ईडी की यह कार्रवाई जांच का हिस्सा है. एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोपों और बरामद किए जाने वाले दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी. सर्च ऑपरेशन के दौरान मिले फाइनेंशियल और डिजिटल सबूतों की जांच के बाद इस मामले में और लोगों या संस्थाओं की भूमिका सामने आने की संभावना है.
कई विभागों से यूनिवर्सिटी को मिल चुकी है नोटिस
17 जून को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से 'कारण बताओ नोटिस' मिलने के बाद से यूनिवर्सिटी को कई एजेंसियों से नोटिस मिले हैं, जिनमें रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (RDA), फायर डिपार्टमेंट, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट और जल निगम शामिल हैं. और अब ईडी ने छापेमारी की है.
सबसे पहली कार्रवाई टैक्स अधिकारियों की ओर से हुई. 17 जून के नोटिस के बाद, टैक्स डिपार्टमेंट ने 23 जून को एक और नोटिस भेजा, जिसमें यूनिवर्सिटी चलाने वाले 'मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट' का रजिस्ट्रेशन कई नियमों के उल्लंघन की वजह से रद्द कर दिया गया. इसके साथ ही, यह आदेश भी दिया गया कि ट्रस्ट अपना स्टेटस बदलकर 'एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स' कर ले.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं