EXCLUSIVE : NDTV से बोले CM एकनाथ शिंदे - 'पहली लड़ाई जीती है, आगे भी जीतेंगे'

सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि हमारे पास 166 वोट हैं, सामने वालों के पास सिर्फ 107 हैं. ये जो अंतर है, वो बहुत ज़्यादा है और यह दिन-ब-दिन बढ़ता जाएगा.

मुंबई :

महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने के बाद एकनाथ शिंदे ने NDTV से एक्सक्लूसिव बातचीत की. उन्होंने कहा कि रविवार को जो स्पीकर का चुनाव था, वो हमलोगों ने अच्छे वोटों से जीत लिया है. हमारे पास 166 वोट हैं, सामने वालों के पास सिर्फ 107 हैं. ये जो अंतर है, वो बहुत ज़्यादा है और यह दिन-ब-दिन बढ़ता जाएगा. उन्होंने कहा कि यह पहली लड़ाई स्पीकर की हमलोगों ने आज जीतकर दिखाई है.

हमारे संवाददाता सोहित मिश्रा ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से खास बातचीत की. जिसमें सीएम ने कई मुद्दों पर खुलकर बातचीत की.

सवाल- दोनों गुटों की ओर से व्हिप जारी किए जा रहे हैं. असली शिवसेना और नकली शिवसेना कौन है?
जवाब-
अभी-अभी विधानसभा के स्पीकर ने शिवसेना विधानमण्डल पार्टी के गुटनेता के रूप में मुझे नियुक्त किया है और चीफ व्हिप भरत गोगावले को नियुक्त किया है (इसका पत्र ऊपर मैंने साझा किया है) हमारे पास बहुमत है. इससे पहले जो ग्रुप लीडर अजय चौधरी और सुनील प्रभु व्हिप थे (दोनों उद्धव गुट के हैं) उनके पास बहुमत नहीं है. अल्पमत में उन्होंने यह बदलाव किया था और मुझे बदल दिया था. लेकिन आज जो हम लोगों ने स्पीकर के पास पेटीशन फ़ाइल की है उसका निर्णय दिया है उन्होंने, क्योंकि लीगली जिसके पास बहुमत होता है, उसका ही चयन किया जा सकता है और वो आज कर दिया है, इसका मतलब दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया गया है.

सवाल- क्या उद्धव ठाकरे ने आपको मुख्यमंत्री बनने का ऑफर दिया था?
जवाब-
मेरी कोई ऐसी मांग या अपेक्षा थी ही नहीं कि मुझे मुख्यमंत्री पद चहिए. लेकिन जो एक विचारधारा का विषय था, बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व की विचारधारा वाली बात थी और जो महा विकास अघाड़ी की दूसरी पार्टियां थी, उनसे हमारे पार्टी के कार्यकर्ता नाराज़ थे, चुनाव क्षेत्र में काम नहीं हो पा रहा था, इसलिए विधायक नाराज़ थे, क्योंकि हर एक विधायक की मंशा होती है कि हमारे क्षेत्र में भारी काम हो, डेवलपमेंट हो, लोगों को न्याय मिले, लेकिन ऐसी कोई बात दिखाई नहीं पड़ रही थी और उनके अस्तित्व की लड़ाई वो लड़ रहे थे, उनका अस्तित्व खतरे में पड़ चुका था. इसलिए हमलोगों ने कोशिश भी की, कि इसे दुरुस्त किया जाए, कुछ करेक्शन हो जाए, लेकिन उसमें हम कामयाब नहीं हुए. इसलिए अगर 50 विधायक एक तरफ जाते हैं, तो इसका मतलब क्या है? इसमें गलती किसकी है, यह ढूंढना चाहिए था, ना कि किसी को बदनाम करने की कोशिश करनी चाहिए थी. इसलिए इतनी बड़ी संख्या में विधायक आज हमारे साथ हैं, सरकार में भी हम हैं, वो इसलिए क्योंकि अगर विधानसभा क्षेत्र में अगर 5 साल में काम नहीं करेंगे तो लोग उन्हें चुनकर नहीं देंगे दोबारा, वो डरे हुए थे, यह उनके अस्तित्व की लड़ाई थी, इसलिए हम साथ में आए. किसी को मुख्यमंत्री या मंत्री बनना है, ऐसा नहीं था. हमलोग तो सत्ता में थे, मेरे पास भी नगर विकास मंत्रालय था, कई और भी 7 से 8 विधायक मंत्री थे उन्होंने भी निर्णय लिया. हमलोग किसी पार्टी में नहीं गए, हम शिवसेना के विधायक हैं, बालासाहेब ठाकरे के पार्टी के विधायक हैं. यह जो निर्णय लिया है, वो पार्टी के कार्यकर्ता, शिवसैनिक, विधायक जो बहुत परेशान थे, लेकिन अब वो सरकार में हमें सपोर्ट करेंगे और उनके चुनाव क्षेत्र में काम करेंगे, विकास होगा, उनके लोगों को फायदा होगा और यह काम सरकार करेगी.

सवाल- सरकार बदल रही है यह पता था, लेकिन आपको कब पता चला कि आप मुख्यमंत्री बनेंगे?
जवाब-
पहली बात तो मैंने यह निर्णय मुख्यमंत्री बनने के लिए नहीं लिया था. यह जो अन्याय की भावना लोगों में थी, उसमें बदलाव लाने की कोशिश हमारी थी. लेकिन बीजेपी ने भी सोचा होगा कि यह 50 लोग जो हक और अन्याय के विरुद्ध और हिंदुत्व के मुद्दे  पर, विकास के मुद्दे पर अलग हो गए हैं, मतलब एक निर्णय ले रहे हैं, लोग भी यही आंकलन कर रहे थे, उनमें भी यही धारणा थी कि भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री पद के लिए यह सब कर रही है, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर जो लोगों के मन में बात थी, उसे झुठला दिया और हमारे पास केवल 50 थे, उनके पास 115 से भी ज़्यादा हैं, इसके बावजूद उन्होंने यह बहुत बड़ा फैसला किया और मेरे जैसे बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे के कार्यकर्ता एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनने का मौका दिया, यह बहुत बड़ी बात है.

सवाल- क्या यह चर्चा आप जिस दिन मुंबई पहुंचे तब हुई थी या उससे पहले?
जवाब-
ऐसा कुछ तय नहीं था. प्रधानमंत्री मोदी जी ने, गृहमंत्री अमित शाह, नड्डा जी और देवेंद्र जी ने तय किया कि ऐसे लोग जो अन्याय के खिलाफ लड़ते हैं, उन्हें सपोर्ट करना चाहिए और उन्होंने किया.

सवाल- देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि वो मंत्रिमंडल में नहीं रहेंगे, लेकिन बाद में केंद्रीय बीजेपी की ओर से ट्वीट और संदेश के बाद वो डिप्टी सीएम की शपथ लेते हैं, ऐसा क्यों?
जवाब-
देवेंद्र फडणवीस ने मेरे लिए भी कोशिश की, उनका योगदान है, मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं, लेकिन जब पार्टी ने उन्हें आदेश दिया कि सरकार में आपको रहना है और डिप्टी सीएम की ज़िम्मेदारी लेनी है, तब मेरी भी उनसे बात हुई और उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने मुझे इतना बड़ा बना दिया है, सर्वोच्च पद दिया है, अगर पार्टी मुझे बोलती है कि यह जिम्मेदारी आपको निभानी है तो उसे निभाना मेरा कर्तव्य है.

सवाल- आरे में कारशेड और बुलेट ट्रेन का मुद्दा है. क्या आरे में कारशेड बनेगा और रुका हुआ बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट चलेगा?
जवाब-
मैंने पहले ही कहा कि जितने भी प्रोजेक्ट रुके हुए हैं, प्रोजेक्ट जितने डिले होते हैं, उतनी कॉस्ट बढ़ती है और लोगों को कोई फायदा नहीं है. जितने भी प्रोजेक्ट प्रलंबित हैं, उसे आगे हम बढ़ाएंगे और लोगों को जल्द से जल्द इन प्रोजेक्ट का फायदा मिले, ऐसी इस सरकार की ज़िम्मेदारी होगी.

सवाल- अमरावती के मामले को अब NIA को दिया गया है. बतौर मुख्यमंत्री आप इस मुद्दे को किस तरह देखते हैं कि नूपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट के वजह से एक शख्स की हत्या की जाती है.
जवाब-
यह बिल्कुल चिंताजनक बात है और जिन्होंने यह हत्याकांड किया है, उन सभी लोगों को गिरफ्तार किया गया है और अब NIA ने केस लिया है, यह नेशनल लेवल का घटना है, सरकार इस पर पूरी तरह ध्यान रखी हुई है.

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सवाल- शिवसेना के पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे का एक पत्र आया था कि आपको विधिमंडल के नेता के पद से वो निकाल रहे हैं, लेकिन आज जिस तरह से आप स्पीकर की बात कर रहे हैं, कि उन्हें विधिमंडल का नेता रखा गया है, तो क्या आने वाले दिनों में आप इस मुद्दे पर या आमतौर पर उनसे बातचीत करेंगे या बातचीत करने के पक्ष में आप हैं या नहीं?
जवाब-
आज जो फैसला हुआ है गुटनेता और व्हिप को लेकर, वो पेटिशन हमने फ़ाइल किया था और हमारे पास बहुमत और नंबर है. डेमोक्रेसी में नंबर का बहुत महत्त्व है और उन्होंने निर्णय दिया, उसका स्वागत मैं करता हूं. बाकी बातों पर मैं फिलहाल कुछ नहीं कहना चाहता हूं.